संदर्भ : 

हाल ही में, बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation-BIMSTEC) समूह का पहला ऐतिहासिक चार्टर लागू होने के बाद बिम्सटेक में अब नए सदस्यों और पर्यवेक्षकों को शामिल करने का मार्ग खुल गया है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • बिम्सटेक चार्टर को उसके 5 वें बिम्सटेक नेताओं के वर्चुअल शिखर सम्मेलन में अपनाया गया, वर्ष 2022 में इसकी अध्यक्षता श्रीलंका द्वारा की गई थी।
  • पिछले महीने नेपाल की संसद ने बिम्सटेक चार्टर पर विचार किया और उसका अनुसमर्थन किया, जिससे चार्टर के लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
  • चार्टर के लागू होने के बाद, बिम्सटेक को अब एक विधिक पहचान  मिल गई है तथा वह अन्य समूहों और देशों के साथ संरचित राजनयिक वार्ता करने में सक्षम हो गया है।

बिम्सटेक के बारे में:

बिम्सटेक का अर्थ ‘बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) है। 

बिम्सटेक एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 06 जून, 1997 को बैंकॉक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। 

  • शुरुआत में, इसे BIST-EC (बांग्लादेश-भारत-श्रीलंका-थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के नाम से जाना जाता था, तथा इसमें सात सदस्य देश शामिल हैं, इसमें 22 दिसंबर, 1997 को म्यांमार, तथा फरवरी, 2004 में भूटान और नेपाल को शामिल किया गया।

बिम्सटेक के उद्देश्य:

  • सहमत क्षेत्रों में तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग परियोजनाओं की पहचान करने के साथ-साथ उसे क्रियान्वित करना तथा सदस्य देशों द्वारा सहमत सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज करना।
  • समानता और साझेदारी पर आधारित संयुक्त प्रयासों के माध्यम से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति में तेजी लाना।
  • आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में साझा हित के मामलों पर सदस्य देशों के बीच सक्रिय सहयोग और पारस्परिक सहायता को बढ़ावा देना।

सार्क (SAARC) बनाम बिम्सटेक (BIMSTEC):

सार्क (SAARC) को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है तथा इसकी अंतिम बैठक 2014 में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीति के  अनुरूप बिम्सटेक पर ध्यान केन्द्रित करने में रुचि दिखाई है।

  • यह बदलाव आतंकवादी हमलों के बाद पाकिस्तान के साथ उत्पन्न तनाव के कारण देखने को मिला है।

सार्क और बिम्सटेक समान क्षेत्रों को कवर करते हैं, परंतु इनका दायरा अलग-अलग है।

  • सार्क पूर्णतः क्षेत्रीय संगठन है, जबकि बिम्सटेक अंतर्क्षेत्रीय है तथा यह दक्षिण-एशिया और आसियान को साथ लाता है। 

बिम्सटेक की सफलता से सार्क अप्रासंगित नहीं होगा तथा यह दक्षिण-एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता रहेगा।

बिम्सटेक और इसके चार्टर का महत्व:

  • यह चार्टर संगठन हेतु नियमों का एक समूह, एक रूपरेखा और दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करने की सुविधा प्रदान करेगा।
  • इससे बिम्सटेक के परिचालन को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और साथ ही, संगठन को अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।
  • बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सार्थक सहयोग और गहन सम्मिलन हेतु विधिक और संस्थागत ढाँचा प्रदान करेगा।
  • बिम्सटेक चार्टर के लागू होने से समृद्ध, शांतिपूर्ण और सतत पड़ोस के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है।
  • बिम्सटेक चार्टर सुरक्षा, संपर्क, व्यापार, कृषि, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि तथा लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
  • बिम्सटेक का महत्व इसकी व्यापक आबादी 1.68 बिलियन तथा सदस्य देशों की संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 3.697 ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष होना है।
  • यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीति के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और हिंद महासागर तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार और सुरक्षा को मजबूत करना है, जो क्वाड देशों के लिए फोकस का क्षेत्र है।

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