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सामान्य अध्ययन-2: शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग ने दुनिया भर से भारतीय मूल के प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं और पेशेवरों को भारत के अनुसंधान एवं नवाचार इकोसिस्टम की ओर आकर्षित करने के लिए ‘प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर (PMRC) योजना 2026’ के आवेदन जारी किए हैं।
अन्य संबंधित जानकारी
- PMRC, फेलो और मेजबान संस्थानों दोनों के लिए आवेदन 1 जून 2026 से समर्पित PMRC पोर्टल के माध्यम से शुरू हो चुके हैं।
- इसमें भाग लेने वाले संस्थानों और फेलो का चयन एक अत्यंत पारदर्शी और कठोर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी निगरानी भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति द्वारा की जाएगी।
- यह योजना वैश्विक भारतीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय महत्व के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के तेजी से बढ़ते अनुसंधान, विकास, नवाचार और प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से जोड़ने का प्रयास करती है।
प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर (PMRC) योजना के बारे में

- प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर (PMRC) योजना की शुरुआत वर्ष 2026 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की गई थी।
- उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों से भारतीय मूल के प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और पेशेवरों को आकर्षित करना और उन्हें जोड़ना है।
- यह उन्हें पूरे भारत में सरकार के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs), राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों के साथ जोड़ने का प्रयास करती है।
- विज़न: इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, शिक्षण और मार्गदर्शन के लिए भारतीय मूल की वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना और उन्हें जोड़ना है, तथा भारत को अग्रणी ज्ञान सृजन एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक वैश्विक दिग्गज के रूप में स्थापित करना है।
- यह योजना तीन मुख्य स्तंभों पर निर्भर है:
- अग्रणी संस्थान
- मेजबान संस्थान
- PMRC फेलो
- इन स्तंभों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुसंधान मिशन के अनुरूप, राष्ट्र के लिए प्रासंगिक और प्रभावोन्मुख हो।
- फेलो की श्रेणियाँ: यह योजना तीन श्रेणियों के तहत अवसर प्रदान करती है:
- यंग रिसर्च फेलो (YRF): पीएचडी के बाद 0 से 5 वर्ष से कम का अनुभव रखने वाले शुरुआती करियर के शोधकर्ता।
- सीनियर फेलो (SF): पीएचडी के बाद 5 से 10 वर्ष से कम का अनुभव रखने वाले करियर के मध्यवर्ती चरण के शोधकर्ता।
- रिसर्च चेयर (RC): पीएचडी के बाद 10 वर्ष या उससे अधिक का अनुभव रखने वाले और प्रमाणित अनुसंधान नेतृत्व प्रदर्शित करने वाले प्रतिष्ठित शोधकर्ता।
- फेलो की पात्रता: इसके पात्र आवेदकों में विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिक, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक और अनुसंधान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति (PIOs) शामिल हैं।
- फेलो को मिलने वाले लाभ: चयनित फेलो को फेलोशिप और रिसर्च अनुदान सहायता, प्रयोगशालाओं एवं अनुसंधान अवसंरचना तक पहुंच तथा भारत के प्रमुख सरकारी संस्थानों के साथ काम करने के अवसर प्राप्त होंगे।
- पात्र मेजबान संस्थानों में शामिल हैं:
- ऐसे सरकारी उच्च शिक्षा संस्थान (HEIs) जो NIRF 2025 की ‘समग्र’ या ‘अभियांत्रिकी’ श्रेणियों में शीर्ष 100 में, या NIRF 2025 की ‘अनुसंधान’ श्रेणी में शीर्ष 50 में स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
- डीएसटी (DST), डीबीटी (DBT), आईसीएमआर (ICMR) और सीएसआईआर (CSIR) जैसी एजेंसियों के अंतर्गत आने वाली राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं और अनुसंधान संस्थान।
- सात प्रमुख संस्थानों को अग्रणी संस्थान के रूप में चिह्नित किया गया है:
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) धनबाद
- भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
महत्व
- वैश्विक प्रतिभा का लाभ उठाना और अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करना: यह योजना भारतीय मूल के प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं को भारत के अनुसंधान एवं विकास (R&D) इकोसिस्टम में एकीकृत करती है, जिससे अनुसंधान की गुणवत्ता और संस्थागत क्षमता में वृद्धि होती है तथा वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार में भारत की स्थिति सुदृढ़ होती है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना: मेजबान संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, वैश्विक स्तर पर स्थापित शोधकर्ताओं और पेशेवरों के साथ जुड़ाव, तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विस्तारित अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों के माध्यम से लाभान्वित होंगे।
- नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास को समर्थन: यह योजना भारत की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार प्राथमिकताओं के अनुरूप रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान तथा नवाचार को गति प्रदान करेगी।
- मेंटरशिप और ज्ञान हस्तांतरण: यह योजना विशिष्ट क्षेत्रों में मार्गदर्शन प्रदान करेगी और दीर्घकालिक तथा सुव्यवस्थित जुड़ाव के माध्यम से अनुसंधान, शिक्षण और परामर्श को बढ़ावा देगी।
- राष्ट्रीय विकास में योगदान: इस पहल का उद्देश्य भारत की अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ावा देना, नवाचार-प्रेरित विकास की दिशा में आगे बढ़ना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘विकसित भारत’ के विज़न में योगदान देना है।
Sources:
DD News
News On Air
PIB
PMRC Education
