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सामान्य अध्ययन-2: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन एवं कार्यप्रणाली तथा सरकार के मंत्रालयों एवं विभाग।
संदर्भ: न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया है। इसका उद्देश्य न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 को निरस्त करना तथा न्यायाधिकरणों की दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता में सुधार के लिए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC) की स्थापना करना है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान

- राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC) की स्थापना: विधेयक NTC को न्यायाधिकरणों में नियुक्ति, प्रशासन और कार्यप्रणाली की निगरानी करने वाली एक सर्वोच्च संस्था के रूप में स्थापित करता है।
- इसका मुख्यालय नई दिल्ली में होगा तथा इसमें 1 अध्यक्ष, 2 न्यायिक सदस्य और 2 तकनीकी सदस्य होंगे।
- अध्यक्ष: सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश; न्यायिक सदस्य: उच्च न्यायालय के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश।
- तकनीकी सदस्य: लोक प्रशासन, वित्त, विधि, लेखांकन, बैंकिंग, प्रबंधन या प्रौद्योगिकी में कम-से-कम 25 वर्षों का अनुभव।
- कार्यकाल: 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
- नियुक्ति: केंद्र सरकार द्वारा; अध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद की जाएगी।
- NTC के कार्य:
- NTC न्यायाधिकरण के सदस्यों का चयन, कार्य-निष्पादन की समीक्षा, सदस्यों के विरुद्ध शिकायतों की निगरानी तथा राष्ट्रीय न्यायाधिकरण डेटा ग्रिड का रखरखाव करेगा।
- चयन समितियाँ: यह न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों के लिए खोज-सह-चयन समितियों का गठन करेगा।
- समितियों में NTC के सदस्य, सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, एक सरकारी सचिव, विशेषज्ञ तथा आयोग के सचिव शामिल होंगे।
- सिफारिशें: प्रत्येक रिक्ति के लिए नियुक्ति हेतु एक नाम और प्रतीक्षा सूची के लिए एक नाम दिया जाएगा।
- नियुक्ति: केंद्र सरकार को सिफारिश प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर नियुक्ति करनी होगी।
- कार्यकाल और सेवा शर्तों में एकरूपता:
- कार्यकाल: अध्यक्ष — 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक; अन्य सदस्य — 5 वर्ष या 67 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
- पुनर्नियुक्ति: पिछले कार्य-निष्पादन के आधार पर; सदस्यों के लिए संबंधित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से परामर्श आवश्यक होगा।
- सेवा शर्तें: केंद्र सरकार योग्यता, चयन, वेतन, भत्ते, त्यागपत्र, पद से हटाने तथा अन्य शर्तों के संबंध में नियम निर्धारित करेगी।
- पद से हटाना और जवाबदेही: केंद्र सरकार NTC या न्यायाधिकरण के अध्यक्षों/सदस्यों को दिवालियापन, नैतिक अधमता से संबंधित दोषसिद्धि, अक्षमता, पद के दुरुपयोग या हितों के टकराव के आधार पर पद से हटा सकती है; न्यायाधिकरण के सदस्यों को अक्षमता, अकुशलता या पारिश्रमिक वाले कार्यों के लिए भी हटाया जा सकता है।
- NTC न्यायाधिकरण के अध्यक्षों और सदस्यों के विरुद्ध शिकायतों की जाँच की निगरानी करेगा।
- राष्ट्रीय न्यायाधिकरण डेटा ग्रिड (NTDG): विधेयक में न्यायाधिकरण के मामलों से संबंधित जानकारी वाले NTDG का प्रस्ताव किया गया है, ताकि पारदर्शिता और कार्य-निष्पादन की निगरानी में सुधार हो सके।
- शामिल न्यायाधिकरण: 16 न्यायाधिकरण/प्राधिकरण: इनमें केंद्रीय और राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण, ऋण वसूली न्यायाधिकरण, दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय न्यायाधिकरण, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण शामिल हैं।
- विधेयक उनके मूल अधिनियमों के अंतर्गत न्यायाधिकरणों के अधिकार-क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं करता।
- केंद्र सरकार राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से न्यायाधिकरणों को जोड़ या उनमें परिवर्तन कर सकती है, बशर्ते इसे संसद के समक्ष रखा जाए।
- निरसन और वित्तीय प्रावधान: न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 को निरस्त किया गया है तथा नियुक्तियों और सेवा शर्तों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप एक रूपरेखा प्रदान की गई है।
- NTC की स्थापना से पहले 2021 के अधिनियम के अंतर्गत की गई मौजूदा नियुक्तियों और शुरू की गई चयन प्रक्रियाओं को संरक्षण प्रदान किया गया है।
- NTC और उसके सचिवालय के लिए प्रतिवर्ष ₹27.14 करोड़ की आवश्यकता का अनुमान है — ₹24.79 करोड़ आवर्ती और ₹2.35 करोड़ अनावर्ती।
विधेयक की आवश्यकता और महत्त्व
- न्यायिक स्वतंत्रता को सुदृढ़ करना: विधेयक नियुक्तियों और निगरानी के लिए न्यायिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता वाले एक सर्वोच्च NTC की स्थापना करके न्यायाधिकरणों को अत्यधिक कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त करने का प्रयास करता है।
- न्यायाधिकरणों में रिक्तियों का समाधान: केंद्र सरकार द्वारा सिफारिश प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर नियुक्तियाँ करने की अनिवार्यता लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों को दूर करने तथा न्यायाधिकरणों के समयबद्ध कामकाज में सुधार करने में सहायक हो सकती है।एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना: विधेयक न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों के लिए योग्यता, चयन, कार्यकाल और सेवा शर्तों के एकरूप मानदंड प्रस्तुत करता है तथा पारदर्शी खोज-सह-चयन समितियों का गठन करता है।न्यायाधिकरणों की जवाबदेही में सुधार: न्यायाधिकरणों के कार्य-निष्पादन की समीक्षा तथा अध्यक्षों और सदस्यों के विरुद्ध शिकायतों की जाँच की निगरानी में NTC की भूमिका संस्थागत जवाबदेही को सुदृढ़ कर सकती है।
- न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ करना: NTDG और अधिक कुशल न्यायाधिकरण व्यवस्था कराधान, कंपनी विधि, पर्यावरण और प्रतिभूति जैसे क्षेत्रों में पारदर्शिता, मामलों की निगरानी तथा विशेषीकृत और त्वरित न्याय के वितरण में सुधार कर सकती है।
