संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारत सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है, जिसके अंतर्गत नीति-निर्माण में इसकी भूमिका को सशक्त बनाने हेतु नए नेतृत्व और पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति की गई है।

अन्य संबंधित जानकारी

• प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया है कि नीति आयोग भारत की नीति-निर्माण संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन सुगमता) को बढ़ावा दे रहा है।

• अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

• निम्नलिखित व्यक्तियों को पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है: राजीव गौबा, के. वी. राजू, गोवर्धन दास, अभय करंदीकर और एम. श्रीनिवास।

• प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त सदस्यों को एक उत्पादक और प्रभावशाली कार्यकाल के लिए अपनी शुभकामनाएँ भेजी।

NITI आयोग (नेशनल इंस्टिट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के बारे में

• 1 जनवरी, 2015 को, भारत सरकार (केंद्रीय मंत्रिमंडल) के एक अधिशासी प्रस्ताव के माध्यम से योजना आयोग के उत्तरवर्ती के रूप में नीति (NITI) आयोग की स्थापना की गई थी।

• यह एक गैर-संवैधानिक (संविधान द्वारा निर्मित नहीं) और गैर-सांविधिक निकाय (संसद के अधिनियम द्वारा निर्मित नहीं) है।

नीति आयोग की भूमिका और कार्य 

• नीति आयोग भारत सरकार के प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है, जो दिशात्मक और नीतिगत दोनों प्रकार के इनपुट प्रदान करता है।

• यह राष्ट्रीय विकास के लिए रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करने हेतु उत्तरदायी है।

• यह केंद्र और राज्यों, दोनों को तकनीकी परामर्श भी उपलब्ध कराता है।

• यह संस्थान योजना आयोग के युग से एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को चिह्नित करता है:

  • केंद्र से राज्यों की ओर नीति के एकतरफा प्रवाह के स्थान पर केंद्र और राज्यों के बीच एक वास्तविक साझेदारी स्थापित की गई है।
  • यह पूर्ववर्ती ‘कमांड-एंड-कंट्रोल’ (आदेश और नियंत्रण) मॉडल के बजाय एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण को अपनाता है।
  • संघवाद की भावना के अनुरूप, यह ‘टॉप-डाउन’ मॉडल के बजाय ‘बॉटम-अप’  दृष्टिकोण का अनुसरण करता है, जिसमें विभिन्न हितधारकों के सुझावों को सम्मिलित किया जाता है।

• नीति आयोग इस रूप में भी कार्य करता है: 

  • सहकारी संघवाद के लिए एक मंच।
  • निष्पादन-आधारित सूचकांकों के माध्यम से प्रतिस्पर्धी संघवाद का प्रवर्तक।
  • साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण का समर्थन करने वाला एक ज्ञान और नवाचार केंद्र।

• नीति आयोग की संरचना:

  • अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
  • शासी परिषद: इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल सम्मिलित होते हैं।
  • क्षेत्रीय परिषदें: इसका गठन एक से अधिक राज्यों या क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले विशिष्ट विषयों के समाधान हेतु किया जाता है।

                        इन्हें प्रधानमंत्री द्वारा आहूत किया जाता है।

                        इनकी अध्यक्षता नीति आयोग के अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित व्यक्ति द्वारा की जाती है।

  • विशेष आमंत्रित: प्रधानमंत्री द्वारा नामित विशेषज्ञ, विशेषज्ञता प्राप्त व्यक्ति और अनुभवी पेशेवर।
  • पूर्णकालिक संगठनात्मक फ्रेमवर्क:

                    उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किए जाते हैं तथा उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।

                    पूर्णकालिक सदस्य: इन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।

                    अंशकालिक सदस्य: अग्रणी विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से (आवर्तन/रोटेशन के आधार पर) लिए जाते हैं।

                    पदेन सदस्य: प्रधानमंत्री द्वारा नामित अधिकतम चार केंद्रीय मंत्री।

                    मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): प्रधानमंत्री द्वारा एक निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त किए जाते हैं।

                    सचिवालय: प्रशासनिक और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

Sources:
PIB
Decanherald
NITI
NITI

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