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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; निवेश मॉडल समावेशी विकास

संदर्भ: नीति आयोग  ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निवेश आकर्षित करने तथा उसे दीर्घकाल तक बनाए रखने हेतु अनुकूल वातावरण सृजित करने की क्षमता का आकलन करने के लिए पहली बार निवेश अनुकूलता सूचकांक (Investment Friendliness Index-IFI) 2026 जारी किया है।

निवेश अनुकूलता सूचकांक के बारे में

  • यह नीति आयोग द्वारा विकसित डेटा-आधारित मूल्यांकन ढाँचा है, जिसके माध्यम से सभी 28 राज्यों एवं 8 केंद्रशासित प्रदेशों के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन किया जाता है।
  • यह सूचकांक 8 प्रमुख मूल्यांकन स्तंभों के अंतर्गत 84 संकेतकों के आधार पर राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की निवेश-तत्परता का मूल्यांकन करता है।
  • यह सूचकांक इसके मानक निर्धारित करता है कि राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश घरेलू तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए कितना अनुकूल एवं सक्षम वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं।
  • उद्देश्य
    •  प्रतिस्पर्धी एवं सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना, ताकि राज्य अपने प्रदर्शन का तुलनात्मक आकलन कर सकें, नीतिगत कमियों की पहचान करें, बेहतर पद्धतियों को अपनाएँ तथा निरंतर सुधार कर सकें।
    • इस सूचकांक की परिकल्पना जुलाई 2024 में आयोजित नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा “निवेश-अनुकूल चार्टर” तैयार करने के निर्देश के बाद की गई थी।
    • इसके पश्चात केंद्रीय बजट 2025–26 में निवेश अनुकूलता सूचकांक के विकास की घोषणा की गई।

प्रमुख निष्कर्ष

  • समग्र प्रदर्शन: भारत का सबसे निवेश-अनुकूल राज्य रहा।  इसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा एवं ओडिशा का स्थान रहा।
  • शीर्ष प्रदर्शनकर्ता: गुजरात ने 56.6 अंक, महाराष्ट्र ने 53.7 अंक तथा तमिलनाडु ने 53.3 अंक प्राप्त किए, जो उनकी मजबूत अवसंरचना, अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तथा प्रभावी नीतिगत समर्थन को दर्शाते हैं।  
  • प्रदर्शन श्रेणियाँ: सूचकांक के आधार पर राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया—
    • 5 शीर्ष प्रदर्शनकर्ता (Top Performers)
    • 15 अग्रणी राज्य (Frontrunners)
    • 8 उभरते प्रदर्शनकर्ता (Emerging Performers)
    • 8 आकांक्षी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश (Aspiring States/UTs)
  • समकक्ष समूह रैंकिंग:
    • बड़े राज्यों में गुजरात प्रथम स्थान पर रहा।
    • पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों में उत्तराखंड प्रथम स्थान पर रहा।
    • केंद्रशासित प्रदेश एवं नगर-राज्य श्रेणी में गोवा प्रथम, जबकि दिल्ली एवं चंडीगढ़ क्रमशः दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे।
  • प्रदर्शन के चालक:
    • गुजरात: कुशल बंदरगाह, प्रतिस्पर्धी विद्युत क्षेत्र, अनुकूल व्यावसायिक वातावरण
    • महाराष्ट्र: सुदृढ़ प्राइवेट इक्विटी एवं वेंचर कैपिटल पारिस्थितिकी तंत्र, नवाचार, मजबूत आर्थिक संकेतक
    • तमिलनाडु: उच्च गुणवत्ता वाली अवसंरचना, कुशल बंदरगाह, मजबूत निर्यात प्रदर्शन, लगभग 100% समझौता ज्ञापन (MoU) रूपांतरण दर
  • राज्य प्रोफ़ाइल: रिपोर्ट में प्रत्येक राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश की विस्तृत प्रोफ़ाइल दी गई है, जिसमें शामिल हैं—व्यापक आर्थिक संकेतक, क्षेत्रीय शक्तियाँ, निवेशकों की धारणा, स्तंभवार प्रदर्शन, समकक्ष समूह तुलना।  इनके माध्यम से सुधार की प्राथमिकताओं की पहचान की गई है।
  • भारत की निवेश आवश्यकता: वित्त वर्ष 1992 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत की औसत वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.1% रही।
    • विश्व बैंक के अनुसार, 2047 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था (High-Income Economy) बनने के लिए भारत को अगले दो दशकों में औसतन 7.8% वास्तविक GDP वृद्धि दर प्राप्त करनी होगी।
    • रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 1992 से भारत की आर्थिक वृद्धि में आधे से अधिक योगदान निवेश का रहा है, जो निवेश-आधारित सतत आर्थिक विकास की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

रिपोर्ट का महत्त्व

  • सुधारों के लिए मानक: राज्यों को निवेश-तत्परता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने तथा सुधार की प्राथमिकताओं की पहचान करने हेतु एक मानक ढाँचा प्रदान करता है।
  • संघवाद को बढ़ावा: राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, पीयर लर्निंग एवं श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने को प्रोत्साहित करता है।
  • निवेश वातावरण में सुधार: बेहतर अवसंरचना, नियामकीय दक्षता, संस्थागत गुणवत्ता एवं नीतिगत पूर्वानुमेयता को बढ़ावा देता है।
  • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण: वस्तुनिष्ठ आँकड़ों तथा निवेशकों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर लक्षित शासन सुधारों को दिशा प्रदान करता है।
  • निवेशक विश्वास में वृद्धि: विस्तृत राज्य प्रोफ़ाइल तथा तुलनात्मक प्रदर्शन मूल्यांकन के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाता है।
  • विकसित भारत @2047 को समर्थन: उच्च निजी निवेश, रोजगार सृजन तथा दीर्घकालिक सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है।
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