संबंधित जानकारी
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: जीवाश्म ईंधन से संक्रमण पर विशेष रूप से केंद्रित प्रथम वैश्विक सम्मेलन कोलंबिया के सांता मार्टा में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन की सह-मेजबानी कोलंबिया और नीदरलैंड द्वारा की गई थी।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस सम्मेलन में लगभग 57 देशों ने भाग लिया—जो विश्व की अर्थव्यवस्था के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं—और कोयला, तेल तथा गैस से दूरी बनाने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की।
- यह सम्मेलन COP28 (दुबई, 2023) में बनी गति पर आधारित है, जहाँ पहली बार देश ऊर्जा प्रणालियों में “जीवाश्म ईंधन से दूर जाने” पर सहमत हुए थे।
- यह वैश्विक जलवायु विमर्श में मानक-निर्धारण से हटकर कार्यान्वयन की ओर एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है, विशेष रूप से पेरिस समझौते के तहत 1.5°C के लक्ष्य को प्राप्त करने के संदर्भ में।
- शिखर सम्मेलन के समापन पर, तुवालु और आयरलैंड को जीवाश्म ईंधन से संक्रमण पर दूसरे सम्मेलन के सह-मेजबान के रूप में घोषित किया गया, जो 2027 में प्रशांत द्वीप राष्ट्र में आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन के मुख्य परिणाम
- जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध समापन का परिचालन: 57 देशों के गठबंधन ने जीवाश्म ईंधन के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने के लिए एक कार्य-उन्मुख रोडमैप पर सहमति व्यक्त की है। यह पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को केवल लक्ष्य निर्धारण से हटाकर उनके वास्तविक कार्यान्वयन की ओर एक स्पष्ट बदलाव का प्रतीक है।
- कार्यान्वयन कार्यधाराओं (वर्कस्ट्रीम्स) का शुभारंभ: प्रतिबद्धताओं को कार्यरूप में बदलने के लिए तीन प्रमुख कार्यधाराएं शुरू की गई हैं:
- संक्रमण रोडमैप: एनडीसी पार्टनरशिप और एक नवनिर्मित विज्ञान पैनल के सहयोग से, देशों को उनके ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) के अनुरूप विज्ञान-आधारित मार्ग विकसित करने में सहायता प्रदान करना।
- वित्त और व्यापक आर्थिक सुधार: वैश्विक वित्तीय संरचना में सुधारों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश जुटाना, साथ ही ऋण बाधाओं और जीवाश्म ईंधन पर निर्भर वित्तीय प्रणालियों जैसी संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना।
- उत्पादक-उपभोक्ता संरेखण जीवाश्म ईंधन उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देना ताकि एक नियोजित चरणबद्ध समापन सुनिश्चित किया जा सके, व्यापारिक व्यवधानों और ‘फंसी हुए संपत्तियों’ को कम किया जा सके तथा जीवाश्म ईंधन मुक्त व्यापार प्रणाली की ओर संक्रमण को सक्षम बनाया जा सके।
- जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि (FFNPT) पर बहस: सम्मेलन में FFNPT पर नए सिरे से बहस देखी गई, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन के नए विस्तार को रोकना, इसके निष्पक्ष चरणबद्ध समापन का प्रबंधन करना और एक न्यायोचित संक्रमण का समर्थन करना है। जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील राष्ट्रों ने इसे प्रबल समर्थन दिया है।
- यद्यपि इस संधि को औपचारिक रूप से नहीं अपनाया गया है, लेकिन इसके विचार ने अधिक राजनीतिक दृश्यता प्राप्त की है और अब यह 2027 के द्वितीय सम्मेलन में प्रमुखता से शामिल होने के लिए तैयार है।
- देश-स्तरीय घोषणाएं और नीतिगत संकेत: सम्मेलन में कई देशों ने जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध समापन हेतु ठोस रोडमैप के संकेत दिए, जिनमें शामिल हैं:
- फ्रांस ने प्रत्येक ईंधन के लिए अलग से चरणबद्ध समापन का रोडमैप तैयार किया है—2030 तक कोयला, 2045 तक तेल और 2050 तक गैस।
- कोलंबिया, ब्राजील, नीदरलैंड, तुवालु और आयरलैंड जैसे देश अपने राष्ट्रीय ऊर्जा संक्रमण को ‘निर्यातित उत्सर्जन और व्यापार’ पर TAFF कार्यों के साथ संरेखित करेंगे।
- विज्ञान-आधारित संक्रमण: ‘ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन‘ के लिए एक विज्ञान पैनल का गठन किया गया है, जो देशों को 1.5°C के लक्ष्य के अनुरूप साक्ष्य-आधारित मार्ग दिखाएगा और कार्यान्वयन में आने वाली कानूनी, वित्तीय और राजनीतिक बाधाओं को दूर करने में सहायता करेगा।
वैश्विक जलवायु शासन के लिए महत्व
- प्रतिबद्धताओं से कार्यान्वयन की ओर: यह सम्मेलन जलवायु संबंधी घोषणात्मक वादों से हटकर कार्ययोजना आधारित रणनीतियों की ओर एक बदलाव का प्रतीक है, जिसमें जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के ‘क्या’ के बजाय ‘कैसे’ पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- समानांतर जलवायु मंच का उदय: यह जलवायु कार्रवाई के लिए एक लचीले और गठबंधन-आधारित दृष्टिकोण के उदय का प्रतिनिधित्व करता है, जो UNFCCC प्रक्रिया के पूरक के रूप में कार्य करता है और इच्छुक देशों के बीच तीव्र प्रगति को सक्षम बनाता है।
- न्यायोचित संक्रमण के सिद्धांतों पर आगे बढ़ना: इक्विटी (समानता), वित्तपोषण और सामाजिक सुरक्षा पर बल देकर, यह सम्मेलन न्यायोचित और समावेशी ऊर्जा संक्रमण पर वैश्विक ध्यान को सुदृढ़ करता है।
- नीतिगत नवाचार और वैश्विक समन्वय: कार्यों और राष्ट्रीय रोडमैप की शुरुआत नीतिगत नवाचार, ज्ञान साझाकरण और समन्वित वैश्विक कार्रवाई को प्रोत्साहित करती है।
चुनौतियाँ और आगे की राह
- संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और भारत जैसे प्रमुख उत्सर्जकों की अनुपस्थिति या सीमित भागीदारी इस पहल के समग्र प्रभाव को कम करती है।
- विकासशील देशों को जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी तक पहुंच और ऋण के बोझ से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके संक्रमण प्रयासों में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- इस सम्मेलन में कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र का अभाव है, जिससे इसके कार्यान्वयन की प्रभावशीलता पर चिंताएं बढ़ रही हैं।
- बड़े पैमाने पर जलवायु वित्त जुटाने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप स्पष्ट, समयबद्ध राष्ट्रीय संक्रमण रणनीतियां विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है।
- 2027 के सम्मेलन सहित भविष्य के मंचों को मजबूत वैश्विक समन्वय की दिशा में कार्य करना चाहिए, साथ ही ‘न्यायोचित संक्रमण’ नीतियों जैसे कि पुनर्कौशल, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास को सुनिश्चित करना चाहिए।
