संदर्भ: 

केंद्र सरकार ने साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग की जाने वाली 1,000 से अधिक स्काइप आईडी को ब्लॉक कर दिया हैं।

अन्य संबंधित जानकारी:

• साइबर अपराधी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारी प्राधिकरणों के रूप में अपना परिचय देकर पूरे भारत में भारी वित्तीय नुकसान पहुँचा रहे हैं।

  • गृह मंत्रालय के अनुसार, यह एक संगठित आर्थिक ऑनलाइन अपराध था और इसे सीमा पार से अपराधियों के सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जा रहा था।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)

  • गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन अक्टूबर, 2018 में इसकी स्थापित किया गया।
  • इसका उद्देश्य भारत में समन्वित और व्यापक स्तर पर साइबर अपराध से निपटना है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के कार्य:

  • सेंट्रल हब: यह सूचना साझा करने, अन्वेषण में समन्वय और साइबर अपराध नीति विकास के लिए मुख्य केंद्र के रूप में कार्य करता है।
  • सहयोग: यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs), सरकारी निकायों और निजी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करता है।
  • क्षमता निर्माण: यह साइबर अपराध पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) तथा हितधारकों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम विकसित करता है।
  • सार्वजनिक जागरूकता: यह सुरक्षित ऑनलाइन प्रथाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ साइबर खतरों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाता है।

अपराधियों की रणनीति के प्रकार:     

  • छद्मवेश: अपराधियों के द्वारा अधिकारी बनकर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाना कि वे आपराधिक गतिविधि में शामिल हैं।  
  • ब्लैकमेल: अपराधियों के द्वारा पैसे ऐंठने के लिए पीड़ितों को फर्जी कानूनी परिणामों की धमकी देना।
  • डिजिटल गिरफ्तारी: भय को बढ़ाने के लिए आधिकारिक व्यवस्था का अनुकरण करते हुए पीड़ितों को वीडियो कॉल पर दिखाई देने के लिए मजबूर करना।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के द्वारा उठाए गए कदम :

  • ब्लॉक करना: अपराधियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले धोखाधड़ी वाले स्काइप आईडी, सिम कार्ड और मोबाइल उपकरणों को ब्लॉक करना।

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