संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: अवसंरचना,पोर्ट.

संदर्भ: सरकार ने ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) प्रस्तावित की है। इसका उद्देश्य देश में शिपिंग कंटेनरों के उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा भारत के व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स तंत्र को अधिक सुदृढ़ और आपूर्ति-शृंखला व्यवधानों के प्रति सक्षम बनाना है।

कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) के बारे में

  • कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) की घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई थी, जिसके लिए पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
  • उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं संस्थागत सहायता प्रदान करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
  • इसका लक्ष्य भारत की वार्षिक घरेलू कंटेनर विनिर्माण क्षमता को लगभग 7.5 लाख ट्वेंटी-फुट समतुल्य इकाइयों (TEUs) तक बढ़ाना है।
  •  योजना की प्रमुख विशेषताएँ
    • ग्रीनफील्ड सहायता: योजना नई ग्रीनफील्ड विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए पूंजीगत सहायता प्रदान करेगी।
    • ब्राउनफील्ड विस्तार: यह मौजूदा ब्राउनफील्ड विनिर्माण इकाइयों के विस्तार को समर्थन प्रदान करेगी।
    • परिचालन सहायता: यह घरेलू कंटेनर निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए परिचालन सहायता प्रदान करेगी।
    • परीक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण: योजना परीक्षण अवसंरचना, कौशल विकास पहलों और क्षमता निर्माण को समर्थन देगी।
    • रोजगार सृजन: इस योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
    • सहायक उद्योग: इससे कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील से जुड़े उद्योगों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

विनियामक एवं डिजिटल समुद्री सुधार

  • व्यापारी नौवहन अधिनियम, 2025, तटीय नौवहन अधिनियम, 2025 और भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 का उद्देश्य नौवहन, तटीय व्यापार और पत्तन प्रशासन के विनियामक ढाँचे को आधुनिक बनाना है।
  • वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस, मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, दस्तावेजीकरण को कम करना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
  • CMAS, पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, सागरमाला कार्यक्रम और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 का पूरक है।
  • सरकार ने घरेलू जहाज निर्माण को मजबूत करने और समुद्री विनिर्माण में निवेश आकर्षित करने के लिए ₹70,000 करोड़ के जहाज निर्माण वित्तीय सहायता पैकेज की भी घोषणा की है।

    योजना का महत्व एवं आवश्यकता

    •  रणनीतिक महत्व: वैश्विक वस्तु व्यापार की मात्रा का लगभग 80% समुद्री मार्गों से परिवहन किया जाता है, जबकि कंटेनरीकृत माल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कुल मूल्य का लगभग दो-तिहाई है। इससे वैश्विक व्यापार में कंटेनर आधारित लॉजिस्टिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका स्पष्ट होती है।
    •  आयात निर्भरता एवं उत्पादन अंतर: भारत प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों का आयात करता है, जबकि वित्त वर्ष 2024 में घरेलू कंटेनर उत्पादन केवल लगभग 24,000 TEUs रहा। इसके विपरीत, चीन का उत्पादन कई मिलियन TEUs है। यह स्थिति भारत में घरेलू विनिर्माण क्षमता के विस्तार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
    •  बढ़ता व्यापार एवं आपूर्ति शृंखला की प्रत्यास्थता: भारत में विनिर्माण तथा आयात-निर्यात व्यापार के विस्तार से कंटेनरों की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं, कोविड-19 महामारी, स्वेज नहर अवरोध, यूक्रेन युद्ध, लाल सागर में हूती हमले तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव जैसी घटनाओं ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और समुद्री परिवहन की कमजोरियों को उजागर किया है।
    •  माल ढुलाई एवं समुद्री प्रत्यास्थता: घरेलू स्तर पर पर्याप्त कंटेनर उपलब्ध होने से कंटेनर की कमी तथा माल ढुलाई दरों में उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है। CMAS तथा प्रस्तावित भारत कंटेनर शिपिंग लाइन भारत के आयात-निर्यात लॉजिस्टिक्स तंत्र के महत्वपूर्ण घटकों पर उसकी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं।
    • विनिर्माण एवं रोजगार: यह योजना कॉर्टेन स्टील, कॉर्नर कास्टिंग और लकड़ी के फ्रेम जैसे सहायक उद्योगों को प्रोत्साहन देने के साथ लगभग 3,000 प्रत्यक्ष एवं 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने में योगदान दे सकती है।
    •  वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: आईएसओ मानकों एवं सीएससी आवश्यकताओं के अनुरूप कंटेनरों का उत्पादन भारत को वैश्विक समुद्री परिवहन तंत्र के लिए एक विश्वसनीय कंटेनर निर्माता के रूप में स्थापित कर सकता है तथा देश के घरेलू समुद्री विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ा सकता है।
    Shares: