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सामान्य अध्ययन-2: भारतीय संविधान—ऐतिहासिक प्रावधान; संघ और राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ; सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।

संदर्भ: महानदी के जल बँटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद हाल ही में और तीव्र हो गया है। इसके समाधान हेतु महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) ने दोनों राज्यों को सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है।

 अन्य संबंधित जानकारी

  • MWDT  ने दोनों राज्यों को परस्पर स्वीकार्य समझौते पर पहुँचने के लिए मई 2026 की अंतिम समय-सीमा दी है, जिसमें विफल रहने पर वह एक बाध्यकारी निर्णय सुनाएगा।
  • न्यायाधिकरण ने बार-बार होने वाले विलंब और स्थगन के लिए दोनों राज्यों की आलोचना भी की है, तथा सहयोग और समयबद्ध समाधान की आवश्यकता पर बल दिया है।
  • सौहार्दपूर्ण समाधान के प्रारंभिक संकेतों के बावजूद, दोनों राज्य जल-बँटवारे के फॉर्मूले पर सहमत होने में असमर्थ रहे हैं, जिससे यह विवाद अंतिम अधिनिर्णयन के निकट पहुँच गया है।
  • केंद्र ने समाधान के लिए अतिरिक्त समय देने हेतु न्यायाधिकरण के कार्यकाल को विस्तारित किया है, जो इस मुद्दे की जटिलता को दर्शाता है।

विवाद में मुख्य मुद्दे

  • अपस्ट्रीम-डाउनस्ट्रीम संघर्ष: ओडिशा का तर्क है कि ऊर्ध्वप्रवाह परियोजनाएं गैर-मानसून अवधि के दौरान जल प्रवाह को कम करती हैं, जबकि छत्तीसगढ़ विकास संबंधी आवश्यकताओं के लिए अपने क्षेत्र के भीतर जल का उपयोग करने के अपने अधिकार पर बल देता है।
  • जल की उपलब्धता और उपयोग संबंधी विवाद: औसत वार्षिक प्रवाह (MAF), वर्तमान उपयोग और भविष्य की मांग के अनुमानों पर असहमति बनी हुई है, जो न्यायसंगत जल बँटवारे के निर्धारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
  • डेटा साझाकरण और विश्वास की कमी: विश्वसनीय और पारस्परिक रूप से स्वीकृत जल-वैज्ञानिक (हाइड्रोलॉजिकल) डेटा के अभाव ने वार्ताओं को बाधित कर दिया है, जो राज्यों के बीच गहन विश्वास की कमी को दर्शाता है।
  • संघीय और शासन संबंधी चुनौतियाँ: विवाद की लंबी अवधि विलंबित अधिनिर्णयन, समन्वय की विफलता और न्यायाधिकरण के निर्णयों के बाद भी कार्यान्वयन की अनिश्चितता जैसे मुद्दों को रेखांकित करती है।

अंतर्राज्यीय नदी जल विवादों के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचा

  • संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 262 के तहत, संसद को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के अधिनिर्णयन की शक्ति प्राप्त है और वह ऐसे मामलों में न्यायालयों के क्षेत्राधिकार को वर्जित कर सकती है।
    • इसके अंतर्गत, संसद ने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (ISWD) अधिनियम, 1956 अधिनियमित किया है।
  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956
    • यह अधिनियम राज्यों के बीच विवादों के समाधान के लिए MWDT जैसे तदर्थ (ad-hoc) न्यायाधिकरणों के गठन का प्रावधान करता है।
    • न्यायाधिकरण के निर्णय (अवॉर्ड) अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, तथा अनुच्छेद 262(2) और अधिनियम की धारा 11 के तहत, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार वर्जित है।
    • यद्यपि अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक, 2019 में एक स्थायी न्यायाधिकरण तंत्र का प्रस्ताव किया गया था, परंतु 17वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही वर्ष 2024 में यह विधेयक व्यपगत हो गया, और इस प्रकार मामला-विशिष्ट न्यायाधिकरणों की वर्तमान व्यवस्था जारी है।

SOURCES
Indian Express
The Hindu
Times Of India

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