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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य और मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘एनीमिया मुक्त भारत (AMB) अभियान परिचालन दिशानिर्देश (2026)’ जारी किए हैं। यह कार्यक्रम अब अधिक व्यापक, प्रौद्योगिकी-सक्षम और सामुदायिक-संचालित पहल के रूप में परिवर्तित हो गया है, ताकि एनीमिया के खिलाफ भारत के संघर्ष को गति दी जा सके।

एनीमिया मुक्त भारत (AMB) अभियान दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएँ:

  • एनीमिया मुक्त भारत अभियान में संक्रमण: यह कार्यक्रम अब ‘एनीमिया मुक्त भारत (AMB)’ से विकसित होकर ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ बन गया है, जो एक समग्र जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाता है।
    • इसके दायरे में अब केवल आयरन सप्लीमेंटेशन से आगे बढ़कर परीक्षण, चिकित्सीय प्रबंधन, स्वस्थ आहार, डिजिटल ट्रैकिंग और सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं।
  • 7×7×7 रणनीति: मौजूदा 6×6×6 रणनीति का विस्तार करके इसे 7×7×7 ढांचे में बदला गया है, जिसमें निम्नलिखित को जोड़ा गया है:
    • 7वां लाभार्थी समूह: कम वजन वाले नवजात शिशु (0–6 महीने)।
    • 7वां हस्तक्षेप: “ईटिंग राइट” (सही खान-पान) पहल, जो आयरन से भरपूर और विविध आहार के नियमित सेवन को बढ़ावा देती है।
    • 7वां संस्थागत तंत्र: डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से मजबूत की गई निगरानी और मूल्यांकन (M&E) प्रणाली।
  • T3 से T4 रणनीति में संक्रमण: कार्यक्रम ने अपने दृष्टिकोण को T3 (टेस्ट, ट्रीट, टॉक) से बदलकर T4 (टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक) कर दिया है।
    • संशोधित रणनीति नियमित हीमोग्लोबिन परीक्षण, प्रोटोकॉल-आधारित उपचार, व्यवस्थित रेफरल और फॉलो-अप, तथा स्वस्थ आहार संबंधी परामर्श पर जोर देती है।
  • गंभीर एनीमिया का प्रबंधन: गंभीर एनीमिया से पीड़ित या मौखिक आयरन थेरेपी का असर न होने वाली गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए:
    • फेरिक कार्बोक्सिमल्टोस (FCM) और आयरन सुक्रोज का उपयोग करते हुए नसों के जरिए आयरन थेरेपी दी जाएगी।
  • डिजिटल निगरानी इकोसिस्टम: कार्यक्रम ने एक एकीकृत डिजिटल तंत्र की स्थापना की है:
    • JANANI पोर्टल: गर्भवती महिलाओं के लिए।
    • RBSK पोर्टल: बच्चों के लिए।
    • U-WIN पोर्टल: बच्चों के टीकाकरण और लाभार्थी रिकॉर्ड के लिए।
    • ये सभी प्लेटफॉर्म निगरानी, विश्लेषण और साक्ष्य-आधारित योजना बनाने के लिए ‘एकीकृत एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल’ में समाहित होंगे।

एनीमिया मुक्त भारत (AMB) के बारे में

  • इसे 2018 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत शुरू किया गया था।
  • इसे ‘नेशनल आयरन प्लस इनिशिएटिव (NIPI)’ के तहत जीवन-चक्र दृष्टिकोण (life-cycle approach) का उपयोग करके लागू किया गया है।
  • उद्देश्य: संवेदनशील जनसंख्या समूहों में एनीमिया के पोषण संबंधी और गैर-पोषण संबंधी, दोनों कारणों का समाधान करके एनीमिया के प्रसार को कम करना।
  • संबंधित कार्यक्रम:
    • नेशनल आयरन प्लस इनिशिएटिव (NIPI)
    • साप्ताहिक आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (WIFS)
    • राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (10 फरवरी और 10 अगस्त)

एनीमिया के बारे में:

  • एनीमिया ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, जिससे रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एनीमिया को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित करता है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनमें हीमोग्लोबिन की सांद्रता सामान्य से कम होती है। यह मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करता है।
  • कारण: आयरन की कमी (सबसे सामान्य), फोलेट की कमी, विटामिन B12 की कमी, विटामिन A की कमी, संक्रमण, कृमि संक्रमण, आनुवंशिक रक्त विकार (जैसे सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया), और आहार में विविधता की कमी।
  • लक्षण: थकान और कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, सांस फूलना, शारीरिक कार्य क्षमता में कमी, और हाथ-पैर ठंडे पड़ना।
  • संवेदनशील समूह: 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, कम वजन वाले (LBW) शिशु, किशोरियाँ, प्रजनन आयु की महिलाएं, तथा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं।
  • प्रभाव: बच्चों में संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास में बाधा, सीखने की क्षमता और उत्पादकता में कमी, खराब मातृ स्वास्थ्य, समय से पूर्व प्रसव का बढ़ा हुआ जोखिम, कम वजन वाले (LBW) शिशु, और मातृ एवं प्रसवकालीन मृत्यु दर में वृद्धि।
  • रोकथाम: आयरन युक्त और विविध आहार, आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन, कृमिनाशक दवाएं, समय पर हीमोग्लोबिन की जांच, अंतर्निहित कारणों का उपचार, तथा पोषण संबंधी परामर्श और स्वस्थ खान-पान की आदतें।
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