संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
संदर्भ: सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की लखनऊ के कुकरैल आरक्षित वन में कुकरैल नाइट सफारी और जूलॉजिकल पार्क परियोजना को मंजूरी दे दी है।
अन्य संबंधित जानकारी

- सर्वोच्च न्यायालय ने यह देखते हुए पूर्व अनुमोदन प्रदान किया है कि परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) से सिफारिशें प्राप्त हो गई थीं, साथ ही सभी पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।
- न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसकी मंजूरी वन (संरक्षण) अधिनियम, जल अधिनियम, वायु अधिनियम, जैविक विविधता अधिनियम और EIA/SEIAA ढांचे जैसे कानूनों के तहत वैधानिक मंजूरी का स्थान नहीं लेती है।
- केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने लखनऊ चिड़ियाघर को स्थानांतरित करने और एडवेंचर ज़ोन स्थापित करने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया, साथ ही निर्धारित शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण करने का निर्देश दिया।
परियोजना के बारे में
- 1,510 करोड़ रुपये की यह परियोजना लखनऊ के 2,027 हेक्टेयर कुकरैल आरक्षित वन (Kukrail Reserve Forest) के भीतर 855 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी और इसे भारत की पहली नाइट सफारी के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
- यह एक एकीकृत वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान, शिक्षा और इको-टूरिज्म परियोजना है जिसे दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा:
- चरण I: कुकरैल नाइट सफारी और इको-टूरिज्म ज़ोन
- चरण II: डे ज़ू (Day Zoo)
- इस परियोजना का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, बंदी प्रजनन, अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा और टिकाऊ पर्यटन को जोड़ना है।
- आगंतुक निर्धारित फ़ॉरेस्ट ट्रेल्स पर बैटरी-संचालित/इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से सफारी की यात्रा करेंगे।
- मास्टर प्लान में शामिल हैं:
- संरक्षण प्रजनन सुविधाएँ
- वन्यजीव व्याख्या और शिक्षा केंद्र
- अनुसंधान प्रयोगशालाएँ
- ऑडिटोरियम
- 7D थिएटर
- परियोजना क्षेत्र का लगभग 71% (610.34 एकड़) हिस्सा ग्रीन कवर (हरियाली) के अंतर्गत रहेगा।
- CEC ने केवल आवश्यक पेड़ काटने की अनुमति दी है और 1:10 के अनुपात में क्षतिपूरक वृक्षारोपण निर्धारित किया है, साथ ही पर्यावरणीय अनुपालन की समय-समय पर निगरानी करने का निर्देश दिया है।
- 2022 में अपनी घोषणा के बाद से यह परियोजना कई वन, वन्यजीव, पर्यावरणीय और न्यायिक स्वीकृतियों से गुज़री है क्योंकि यह एक आरक्षित वन के भीतर स्थित है।
कुकरैल नाइट सफारी के बारे में

- कुकरैल नाइट सफारी को भारत की पहली नाइट सफारी के रूप में प्रस्तावित किया गया है, और सिंगापुर, थाईलैंड, चीन तथा इंडोनेशिया में समान सुविधाओं के बाद यह दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी।
- यह आगंतुकों को विशेष रूप से डिज़ाइन की गई मूनलाइट-मिमिकिंग लाइटिंग सिस्टम (चाँदनी का आभास कराने वाली प्रकाश व्यवस्था) का उपयोग करके उनके प्राकृतिक सक्रिय घंटों के दौरान निशाचर वन्यजीवों का अवलोकन करने की अनुमति देगा, जिससे जानवरों को कम से कम परेशानी हो।
- सफारी में भारत और विदेशों में वन्यजीव परिदृश्यों से प्रेरित थीम-आधारित प्राकृतिक आवास होंगे, साथ ही फ़ॉरेस्ट ट्रेल्स और इको-टूरिज्म के अनुभव भी होंगे।
- प्रस्तावित पशु प्रजातियों में शामिल हैं:
- एशियाई शेर
- बंगाल टाइगर
- तेंदुआ
- लकड़बग्घा
- उड़न गिलहरी
- घड़ियाल
- प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को साकार करने के लिए, इन आवासों में घास के मैदानों, आर्द्रभूमि, चट्टानी संरचनाओं और स्थानीय वनस्पतियों को हूबहू विकसित किया जाएगा।
