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सामान्य अध्ययन-2: विभिन्न क्षेत्रों के विकास हेतु सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप तथा उनके निर्माण एवं कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
संदर्भ: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और संस्थागत निगरानी के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से असंगठित श्रमिकों तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की है।
असंगठित श्रमिकों तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के बारे में

- वैधानिक ढाँचा: इसका गठन सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत किया गया है, जो 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुई।
- अध्यक्ष: केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया।
- उपाध्यक्ष: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव।
- संरचना: इसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों, एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
- बैठकें: केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार वर्ष में कम-से-कम तीन बार बैठक आयोजित की जाएगी।
- प्रमुख कार्य:
- असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों की विभिन्न श्रेणियों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करना।
- संहिता के प्रशासन से संबंधित मामलों में केंद्र सरकार को सलाह देना।
- केंद्र सरकार द्वाराs प्रशासित सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करना।
- संबंधित निधि एवं खाते से होने वाले व्यय तथा राज्य स्तर पर अभिलेखों के रखरखाव संबंधी कार्यों की समीक्षा करना।
- केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए अतिरिक्त कार्यों का निर्वहन करना।
बोर्ड की आवश्यकता एवं महत्त्व
- सामाजिक सुरक्षा का सीमित कवरेज: 29 जनवरी 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर केवल 8.58 लाख गिग श्रमिक पंजीकृत थे, जबकि नीति आयोग के अनुसार वर्ष 2025–26 में गिग श्रमिकों की अनुमानित संख्या 1.43 करोड़ थी। यह पंजीकरण एवं कल्याणकारी लाभों के कवरेज में व्यापक अंतर को दर्शाता है।
- व्यावसायिक सुरक्षा: कम समय में डिलीवरी की बाध्यता और प्रोत्साहन आधारित लक्ष्यों के कारण गिग श्रमिकों को सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता जोखिम रहता है। श्रमिक संघों के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान आंध्र प्रदेश में 45–50 गिग श्रमिकों की मृत्यु हुई तथा 200 से अधिक श्रमिक घायल हुए।
- कल्याणकारी योजनाओं का कमजोर कार्यान्वयन: एक संसदीय समिति ने पाया कि 18 फरवरी 2025 तक स्वीकृत 702 अनुग्रह राशि संबंधी दावों में से 201 का भुगतान लंबित था। यह सामाजिक सुरक्षा लाभों के वितरण में प्रशासनिक देरी को दर्शाता है।
- सांख्यिकीय अदृश्यता: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों की अलग से पहचान नहीं की जाती है। इससे उनकी रोजगार संबंधी परिस्थितियों, आय की अनिश्चितता और कल्याण संबंधी आवश्यकताओं का सटीक आकलन सीमित हो जाता है।
- संस्थागत जवाबदेही एवं प्रतिनिधित्व: सरकारों, एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं तथा श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधित्व के साथ-साथ कल्याणकारी योजनाओं और निधि व्यय की निगरानी से हितधारकों की भागीदारी एवं योजनाओं के कार्यान्वयन को सुदृढ़ किया जा सकता है।
असंगठित श्रमिकों तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए भारत की पहल
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों को औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान करती है तथा अधिसूचित योजनाओं के माध्यम से जीवन एवं दिव्यांगता सुरक्षा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य, मातृत्व एवं वृद्धावस्था सुरक्षा का प्रावधान करती है।
- सामाजिक सुरक्षा निधि: एग्रीगेटर कंपनियों के लिए अपने वार्षिक कारोबार का 1–2% योगदान देना अनिवार्य करती है। यह योगदान गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों को किए गए या देय भुगतानों के अधिकतम 5% तक सीमित होगा।
- ई-श्रम पोर्टल (2021): असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस (NDUW) तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया। इसके अंतर्गत आधार से जुड़ा पंजीकरण तथा सार्वभौमिक खाता संख्या (UAN) प्रदान की जाती है।
- आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY): बजट 2025–26 में ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत गिग श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य कवरेज की घोषणा की गई, जिसके अंतर्गत लगभग एक करोड़ लाभार्थियों को लक्षित किया गया है।
- प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM): स्वैच्छिक अंशदायी योजना के अंतर्गत पात्र असंगठित श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद ₹3,000 की सुनिश्चित मासिक पेंशन प्रदान करती है।
- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): पात्र श्रमिकों को दुर्घटना के कारण मृत्यु एवं दिव्यांगता के विरुद्ध बीमा सुरक्षा प्रदान करती है।
- राज्य स्तरीय पहल: राजस्थान ने प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक (पंजीकरण एवं कल्याण) अधिनियम, 2023 लागू किया है, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना ने भी गिग श्रमिकों के कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा की दिशा में कदम उठाए हैं।
