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सामान्य अध्ययन–2: संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व तथा संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ।
सामान्य अध्ययन–3: आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न करने में बाहरी राज्य एवं गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भूमिका; सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन।
संदर्भ: 27वें हॉर्नबिल महोत्सव (1–10 दिसंबर, 2026) से पहले, नागालैंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था को वापस लेने का आग्रह किया है। विधानसभा का तर्क है कि यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, निवेश और आर्थिक अवसरों को सीमित करती है।
संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था को समझना
- कानूनी आधार: संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था वर्तमान में आप्रवासन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 तथा आप्रवासन एवं विदेशी आदेश, 2025 द्वारा विनियमित होती है। इन्होंने क्रमशः पूर्ववर्ती विदेशी अधिनियम, 1946 तथा विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 का स्थान लिया है।
- लागू होना: PAP रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों के प्रवेश को विनियमित करता है। अधिसूचित संरक्षित क्षेत्रों में आने वाले विदेशी नागरिकों (भूटानी नागरिकों को छोड़कर) के लिए वैध भारतीय वीजा के अतिरिक्त PAP प्राप्त करना आवश्यक है। यह व्यवस्था कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ हिस्सों या संपूर्ण क्षेत्र पर लागू होती है।
- PAP और ILP के बीच अंतर: PAP सुरक्षा संबंधी विनियमन के लिए विदेशी नागरिकों पर लागू होता है, जबकि बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन, 1873 के अंतर्गत इनर लाइन परमिट (ILP) अन्य राज्यों से आने वाले भारतीय नागरिकों के प्रवेश को निर्दिष्ट क्षेत्रों में विनियमित करता है, ताकि मूल निवासी समुदायों की सुरक्षा की जा सके।
- वर्तमान में ILP अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है।
- नागालैंड में PAP व्यवस्था का विकास:
- 2011: केंद्र सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में PAP संबंधी प्रतिबंधों में ढील दी। इस छूट को समय-समय पर बढ़ाया गया, जिसमें दिसंबर 2027 तक का विस्तार भी शामिल था।
- दिसंबर 2024: केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए इस छूट को वापस ले लिया, जिससे तीनों राज्यों के संपूर्ण क्षेत्र PAP व्यवस्था के अंतर्गत आ गए।
- दिसंबर 2024 के सर्कुलर के अंतर्गत अतिरिक्त आवश्यकताएँ: अफगानिस्तान, चीन और पाकिस्तान के नागरिकों तथा इन देशों से मूल रूप से संबंधित विदेशी नागरिकों के लिए गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।
नागालैंड PAP व्यवस्था को वापस लेने की माँग क्यों कर रहा है?
- पर्यटन पर प्रभाव: अतिरिक्त परमिट संबंधी आवश्यकताएँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को हतोत्साहित करती हैं तथा राज्य के प्रमुख हॉर्नबिल महोत्सव को प्रभावित करती हैं, जिसमें भारत और विदेशों से पर्यटक आते हैं।
- नौकरशाही संबंधी बाधाएँ: वीजा जारी होने के बाद PAP की प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता अनिश्चितता और असुविधा उत्पन्न करती है। परमिट की प्रतीक्षा में विदेशी पर्यटकों का मूल्यवान यात्रा समय नष्ट हो सकता है।
- निवेश एवं अंतरराष्ट्रीय सहभागिता: प्रतिबंध विदेशी निवेश, व्यावसायिक साझेदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राजनयिक मिशनों की भागीदारी को हतोत्साहित कर सकते हैं।
- रोजगार सृजन: पर्यटन होटल, होमस्टे, परिवहन संचालकों, शिल्पकारों, कलाकारों और स्थानीय उद्यमियों को आजीविका प्रदान करता है। इस प्रकार यह विशेष रूप से युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
सुरक्षा संबंधी चिंताएँ एवं केंद्र–राज्य का दृष्टिकोण
- केंद्र का सुरक्षा संबंधी तर्क: गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2024 में नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए PAP व्यवस्था को पुनः लागू किया।
- नागालैंड का पक्ष: राज्य का तर्क है कि उसकी सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है। विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने सशस्त्र समूहों से संबंधित घटनाओं में गिरावट का उल्लेख किया। इनके अनुसार, वर्ष 2004–09 के दौरान ऐसी घटनाओं की संख्या 257 से अधिक थी, जो वर्ष 2021–26 के दौरान घटकर केवल 8 रह गई।
- अस्थायी छूट की अपर्याप्तता: केंद्र ने वर्ष 2025 के हॉर्नबिल महोत्सव से पहले PAP संबंधी प्रतिबंधों में ढील दी थी, लेकिन इस निर्णय की सूचना केवल 29 नवंबर को, महोत्सव से ठीक पहले दी गई। नागालैंड का तर्क है कि इतनी देर से दी गई छूट विदेशी पर्यटकों, निवेशकों और सांस्कृतिक भागीदारों को अपनी यात्राओं की पर्याप्त पूर्व योजना बनाने का अवसर नहीं देती।
- प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था: राज्य ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से विदेशी आगंतुकों के पंजीकरण और निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें पासपोर्ट, वीजा, यात्रा कार्यक्रम और आवास संबंधी विवरणों का डिजिटल रिकॉर्ड रखना शामिल है।
आगे की राह
- आवधिक सुरक्षा समीक्षा: बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए PAP प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके भौगोलिक दायरे का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
- जोखिम-आधारित विनियमन: पूरे राज्य में एकसमान प्रतिबंध लगाने के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों या आगंतुकों की विशिष्ट श्रेणियों के लिए लक्षित प्रतिबंधों पर विचार किया जाना चाहिए।
- प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी: राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के माध्यम से विदेशी आगंतुकों के डिजिटल पंजीकरण, सत्यापन और निगरानी को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- पूर्वानुमेय परमिट व्यवस्था: सरल प्रक्रियाएँ और अग्रिम अनुमति सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पर्यटक, निवेशक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि बिना किसी अनिश्चितता के अपनी यात्राओं की योजना बना सकें।
