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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि सुंदरवन अपना पारिस्थितिक लचीलापन खो रहा है, जिससे इसकी दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:
- लचीलेपन में गिरावट का विस्तार: सुंदरवन का लगभग 10-15% हिस्सा अपनी पुनर्प्राप्ति क्षमता खो चुका है। उत्तरी और तटीय सीमाओं पर सबसे तीव्र गिरावट देखी गई है। अध्ययन में पाया गया कि भारत का पश्चिमी भाग बांग्लादेश के पूर्वी क्षेत्र की तुलना में कम लचीला है।
- चरम घटनाओं का प्रभाव: सिद्र, रश्मि और आइला (2007-09) जैसे भीषण चक्रवातों ने महत्वपूर्ण पारिस्थितिक बदलाव किए हैं। इन घटनाओं ने बड़े वन क्षेत्रों (लगभग 800-1,100 वर्ग किमी प्रति घटना) को ‘अत्यधिक लचीली’ श्रेणी से ‘मध्यम लचीली’ श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया है।
- पारिस्थितिक अस्थिरता का उदय: अध्ययन “क्रिटिकल स्लोइंग डाउन” पर प्रकाश डालता है, जहाँ पारिस्थितिकी तंत्र को उथल-पुथल से उबरने में अधिक समय लगता है। यह बढ़ती अस्थिरता और पारिस्थितिक टिपिंग पॉइंट के करीब होने का संकेत है।
- बदलते संवेदनशील क्षेत्र: उत्तर-पूर्वी सुंदरवन में एक न्य संवेदनशील हॉटस्पॉट उभरा है, जबकि मध्य और तटीय क्षेत्र निरंतर व्यवधानों का सामना कर रहे हैं जो उनके लचीलेपन को क्षीण करते हैं।
- जैव विविधता और कार्बन की क्षति: बीमारियों के कारण सुंदरी (Heritiera fomes) जैसी प्रमुख प्रजातियों पर बढ़ते तनाव ने प्रजातियों की विविधता में कमी ला दी है और वन संरचना को बदल दिया है। कुछ क्षेत्र कार्बन सिंक से कार्बन स्रोत में बदल रहे हैं, जिससे प्रत्यक्ष पारिस्थितिक और आर्थिक नुकसान हो रहा है।
लचीलेपन में गिरावट के कारण
- जलवायु परिवर्तन के कारक: बढ़ता तापमान, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और लवणता का प्रवेश मैंग्रोव की कार्यप्रणाली को बदल रहे हैं। इसके कारण वृक्षों को अपनी ऊर्जा वृद्धि के बजाय जीवित रहने की ओर मोड़नी पड़ती है, जिससे उनकी पुनर्जनन क्षमता कम हो रही है।
- चक्रवात और चरम घटनाएँ: बार-बार आने वाले उच्च तीव्रता के चक्रवात वनों के कैनोपी आवरण और जड़ प्रणालियों को क्षति पहुँचाते हैं। ये निरंतर व्यवधान पारिस्थितिकी तंत्र की रिकवरी को धीमा कर देते हैं और वनों को कम लचीली स्थिति में पहुंचा देते हैं।
- जल विज्ञान संबंधी परिवर्तन: ऊपरी जलधाराओं पर बने बांध और मीठे पानी के प्रवाह में परिवर्तन से तलछट और मीठे पानी की आवक कम हो जाती है। इससे लवणता बढ़ती है और डेल्टा का प्राकृतिक जल विज्ञान संतुलन बिगड़ जाता है।
- मानवजनित क्षरण: झींगा पालन, अतिक्रमण, अवैध कटाई और पोषक तत्वों का प्रदूषण (जैसे कि फास्फोरस की अधिकता) वन संरचना को खराब करते हैं। ये गतिविधियाँ मिट्टी में अवायवीय स्थिति उत्पन्न करती हैं और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को खतरे में डालती है।
सुंदरवन के बारे में
- सुंदरवन विश्व का सबसे विशाल सतत मैंग्रोव वन है, जो गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा में स्थित है।
- यह भारत और बांग्लादेश में 10,000 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। अपने पारिस्थितिक महत्व के कारण इसे युनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- जनवरी 2019 में, भारतीय सुंदरवन को रामसर कन्वेंशन के तहत ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि’ का दर्जा दिया गया था।
- यह भारत का 27वाँ रामसर स्थल था। 4,200 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्रफल के साथ, यह देश का सबसे बड़ा संरक्षित आर्द्रभूमि है।
- सुंदरवन का बांग्लादेशी हिस्सा (6,000 वर्ग किमी से अधिक) बहुत पहले 1992 में ही रामसर स्थल घोषित कर दिया गया था।
- डेल्टा के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से को कवर करने वाला भारतीय सुंदरवन, देश के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र का लगभग 43% हिस्सा है और इसमें भारत की 90% मैंग्रोव प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- भारतीय सुंदरवन कई दुर्लभ और विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियों का निवास स्थान है, जैसे: उत्तरी नदी टेरापिन (Batagur baska): गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered), इरावदी डॉल्फिन (Orcaella brevirostris): लुप्तप्राय, बंगाल टाइगर (Panthera tigris tigris): लुप्तप्राय, फिशिंग कैट (Prionailurus viverrinus): सुभेद्य।
सुंदरवन का महत्व
- पारिस्थितिक महत्व: सुंदरवन एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जो विविध वनस्पतियों और जीवों को आश्रय प्रदान करता है तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
- जलवायु विनियमन: मैंग्रोव वन महत्वपूर्ण कार्बन सिंक (ब्लू कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र) के रूप में कार्य करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
- आपदा सुरक्षा: यह पारिस्थितिकी तंत्र चक्रवात, झंझा महोर्मि और तटीय कटाव के विरुद्ध एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है, जिससे लाखों लोगों की सुरक्षा होती है।
- आजीविका सहायता: यह मत्स्य पालन, वानिकी और कृषि के माध्यम से लाखों लोगों का भरण-पोषण करता है और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के आधार के रूप में कार्य करता है।
