200 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित जोधपुर मोजड़ी को मिला GI टैग
संदर्भ:
केंद्र सरकार ने जोधपुर की लगभग 200 वर्ष पुरानी मोजड़ी शिल्पकला को भौगोलिक संकेतक टैग प्रदान किया है। इससे इस पारंपरिक राजस्थानी हस्तनिर्मित जूता शिल्प को आधिकारिक मान्यता मिली है तथा राजस्थान की पारंपरिक पादुकाओं की विशिष्ट पहचान और सुदृढ़ होगी।
अन्य संबंधित जानकारी
- वर्ष 2021 में प्रस्तुत आवेदन के आधार पर जोधपुर हस्तशिल्प निर्यातक संघ तथा ग्राम विकास सेवा संस्थान को GI प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
- यह शिल्प लगभग 400 निर्माताओं, 35,000 से अधिक कारीगरों तथा जोधपुर के 5,000 से अधिक परिवारों की आजीविका का आधार है।
- जोधपुर मोजड़ी का घरेलू बाज़ार लगभग 100 करोड़ रुपये का है, जबकि इसका निर्यात लगभग 10 करोड़ रुपये का है। GI टैग से निर्यात में वृद्धि तथा बाज़ार तक बेहतर पहुँच मिलने की उम्मीद है।
जोधपुर मोजड़ी के बारे में
- 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में विकसित जोधपुर मोजड़ी एक पारंपरिक हस्तनिर्मित चमड़े की पादुका है, जो जोधपुर तथा उसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी हुई है।
- इसका निर्माण परंपरागत रूप से जीनागर (जिंगर) समुदाय द्वारा किया जाता है, जो ऐतिहासिक रूप से सेनाओं के लिए जीन (घोड़े की काठी) तथा म्यान (चमड़े की खोल) बनाने के लिए प्रसिद्ध रहा है।
- कभी राजघरानों के संरक्षण में विकसित यह शिल्प समय के साथ जोधपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन गया है तथा अपनी मजबूती, आरामदायक बनावट और उत्कृष्ट कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है।
- यह पादुका राजस्थान की गर्म जलवायु के अनुकूल बनाई जाती है तथा पारंपरिक रूप से पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा पहनी जाती है।
भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के बारे में
- भौगोलिक संकेतक (GI) ऐसा चिन्ह है, जो उन वस्तुओं की पहचान करता है जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशिष्ट विशेषताएँ किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से मूलतः जुड़ी होती हैं।
- GI टैग पारंपरिक उत्पादों को नकल से संरक्षण प्रदान करता है, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करता है तथा उनके बाज़ार मूल्य और निर्यात क्षमता को बढ़ाता है।
- भारत में GI संरक्षण भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। यह अधिनियम विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ट्रिप्स (TRIPS) समझौते के अनुरूप बनाया गया था तथा वर्ष 2003 से प्रभावी है।
- भारत में GI पंजीकरण का प्रशासन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा चेन्नई स्थित GI रजिस्ट्री के माध्यम से किया जाता है।
- दार्जिलिंग चाय वर्ष 2004–05 में भारत का पहला GI टैग प्राप्त उत्पाद बना।
तीसरा नमस्ते (NAMASTE) दिवस
संदर्भ:
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 14 जुलाई 2026 को तीसरा नमस्ते दिवस (NAMASTE Day) मनाया। यह राष्ट्रीय यंत्रीकृत स्वच्छता पारितंत्र हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAMASTE) योजना के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
अन्य संबंधित जानकारी
- नमस्ते दिवस प्रतिवर्ष स्वच्छता कर्मियों के योगदान को सम्मानित करने तथा उनकी गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
- इसका उद्देश्य यंत्रीकृत स्वच्छता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वच्छता कर्मियों के अधिकारों तथा खतरनाक स्वच्छता कार्यों के उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
नमस्ते (NAMASTE) योजना के बारे में
- नमस्ते (राष्ट्रीय यंत्रीकृत स्वच्छता पारितंत्र हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका संयुक्त रूप से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) के माध्यम से क्रियान्वयन किया जाता है।
- यह योजना वित्तीय वर्ष 2023–24 से 2025–26 तक लागू की गई। इसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैनुअल सफाई को यंत्रीकरण के माध्यम से समाप्त करना तथा स्वच्छता कर्मियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- इस योजना के अंतर्गत सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों (SSWs) को शामिल किया गया है तथा जून 2024 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कचरा बीनने वालों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है।
- योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्वच्छता कर्मी को सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए उसके अंदर प्रवेश न करना पड़े, जिससे पूर्णतः यंत्रीकृत स्वच्छता पारितंत्र की स्थापना हो सके।
SwaYaan पहल के अंतर्गत NIDAR 2.0 का शुभारंभ
संदर्भ:
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के सहयोग से स्वयान (SwaYaan) पहल के अंतर्गत वर्ष 2026–27 के लिए ड्रोन अनुप्रयोग एवं अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय नवाचार चुनौती (NIDAR 2.0) का शुभारंभ किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- NIDAR 2.0 का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ड्रोन संचालन तक सीमित न रखकर, उन्हें ड्रोन की मूल बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों तथा स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स के विकास हेतु प्रोत्साहित करना है, जिससे भारत का आत्मनिर्भर ड्रोन पारितंत्र सुदृढ़ हो सके।
- यह चुनौती स्वदेशी VEGA प्रोसेसर पर आधारित ड्रोन विकसित करने को प्रोत्साहित करती है, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा तथा विदेशी चिप डिज़ाइनों पर निर्भरता कम होगी।
NIDAR 2.0 के बारे में
- NIDAR (ड्रोन अनुप्रयोग और शोध के लिए राष्ट्रीय नवाचार चुनौती), SwaYaan पहल के अंतर्गत MeitY की प्रमुख नवाचार चुनौती है।
- NIDAR का प्रथम संस्करण (2025–26), मार्च 2025 में प्रारंभ किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ड्रोन अनुप्रयोगों एवं नवाचार को बढ़ावा देना तथा भारत के उभरते ड्रोन पारितंत्र में विद्यार्थियों की सहभागिता की नींव रखना था।
- NIDAR 2.0 में चुनौती का स्तर बढ़ाते हुए ध्यान स्वायत्त प्रणालियों, स्वदेशी एवियोनिक्स तथा ड्रोन के मूलभूत घटकों के विकास पर केंद्रित किया गया है। साथ ही, उन्नत नवाचार एवं उत्पाद विकास को प्रोत्साहित करने के लिए 65 लाख रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।
- इस चुनौती के अंतर्गत दो प्रमुख ट्रैक हैं:
- ड्रोन नवाचार: आपदा प्रबंधन के लिए स्वायत्त ड्रोन समूह तथा GPS-विहीन (GPS-denied) वातावरण में इनडोर औद्योगिक निरीक्षण हेतु ड्रोन का विकास।
- घटक नवाचार: VEGA प्रोसेसर पर आधारित स्वदेशी फ्लाइट कंट्रोलर एवं ऑटोपायलट प्रणाली का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक घटकों के उपयोग से डिज़ाइन एवं विकास।
- घटक नवाचार ट्रैक के अंतर्गत चयनित शीर्ष 100 टीमों को परीक्षण एवं एकीकरण के लिए दो-दो VEGA प्रोसेसर डेवलपमेंट किट प्रदान किए जाएंगे।
SwaYaan के बारे में
- स्वयान (SwaYaan), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की एक पहल है, जिसे वर्ष 2022 में 89.87 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ भारत के ड्रोन क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तथा नवाचार पारितंत्र विकसित करने हेतु स्वीकृति प्रदान की गई।
- इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIITs), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NITs), सी-डैक (C-DAC) तथा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) जैसे प्रमुख संस्थानों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अब तक 51,000 से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- यह कार्यक्रम निम्नलिखित पाँच प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- वायु-यांत्रिकी
- ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक्स
- मार्गदर्शन, नौवहन एवं नियंत्रण एल्गोरिद्म एवं सिमुलेशन
- ड्रोन अनुप्रयोग
- संबद्ध मानव रहित विमान प्रणाली
CAC49 में खाद्य मानकों के क्षेत्र में भारत का सुदृढ़ वैश्विक नेतृत्व
संदर्भ:
स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में 6–10 जुलाई 2026 के दौरान आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग (Codex Alimentarius Commission-CAC) के 49वें सत्र (CAC49) में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। इस दौरान भारत के नेतृत्व में विकसित कई अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानकों को औपचारिक रूप से अपनाया गया।
अन्य संबंधित जानकारी
- आयोग ने भारत की अध्यक्षता एवं सह-अध्यक्षता में विकसित 7 कोडेक्स मानकों एवं दिशानिर्देशों को अपनाया, जिससे वैश्विक खाद्य मानकों के निर्माण में भारत की भूमिका और सुदृढ़ हुई।
- प्रमुख स्वीकृत मानकों में सूखे धनिया के बीज तथा ताज़ी करी पत्तियों के लिए कोडेक्स मानक शामिल हैं, जिन्हें मसाले एवं पाक-उपयोगी जड़ी-बूटियों पर कोडेक्स समिति (CCSCH) की भारत की अध्यक्षता में विकसित किया गया।
- CAC49 ने काजू गिरी के लिए कोडेक्स मानक विकसित करने के भारत के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलने तथा उत्पादकों को लाभ होने की उम्मीद है।
कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग (CAC) के बारे में
- कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग एक अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानक निर्धारण निकाय है, जिसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से वर्ष 1963 में की गई थी।
- इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना तथा सामंजस्यपूर्ण खाद्य मानकों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार में निष्पक्ष प्रथाओं को सुनिश्चित करना है।
- कोडेक्स मानकों को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के स्वच्छता एवं पादप स्वच्छतासमझौते के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय संदर्भ मानकों के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- भारत वर्ष 1964 में CAC का सदस्य बना तथा इसमें भारत का प्रतिनिधित्व भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा किया जाता है।
विम्बलडन 2026
संदर्भ:
विश्व का सबसे पुराना एवं सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट विम्बलडन चैंपियनशिप 2026 का समापन ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब, लंदन में हुआ। इस वर्ष यानिक सिनर और लिंडा नोस्कोवा ने क्रमशः पुरुष एवं महिला एकल खिताब जीते।
अन्य संबंधित जानकारी
- पुरुष एकल: यानिक सिनर (इटली) ने लगातार दूसरा विम्बलडन खिताब जीता।
- महिला एकल: लिंडा नोस्कोवा (चेक गणराज्य) ने अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता।
- पुरुष युगल: हैरी हेलियोवारा (फ़िनलैंड) एवं हेनरी पैटन (ग्रेट ब्रिटेन)।
- महिला युगल: गुओ हान्यू (चीन) एवं क्रिस्टिना म्लादेनोविच (फ्रांस)।
- मिश्रित युगल: मार्सेलो अरेवालो (एल साल्वाडोर) एवं येलेना ओस्तापेंको (लातविया)।
विम्बलडन चैंपियनशिप के बारे में
- वर्ष 1877 में स्थापित विम्बलडन विश्व का सबसे पुराना टेनिस टूर्नामेंट है।
- इसका आयोजन प्रतिवर्ष ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब, लंदन में किया जाता है।
- विम्बलडन एकमात्र ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट है, जो घास कोर्ट (Grass Court) पर खेला जाता है।
- यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए पूर्णतः सफेद परिधान तथा स्ट्रॉबेरी और क्रीम परोसने जैसी अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।
ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट के बारे में
- ग्रैंड स्लैम विश्व के चार सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट हैं:
- ऑस्ट्रेलियन ओपन – हार्ड कोर्ट (जनवरी)
- फ्रेंच ओपन (रोलां गैरो) – मिट्टी का कोर्ट (क्ले कोर्ट) (मई–जून)
- विम्बलडन – घास का कोर्ट (ग्रास कोर्ट) (जून–जुलाई)
- यूएस ओपन – हार्ड कोर्ट (अगस्त–सितंबर)
- इन चारों टूर्नामेंटों का आयोजन स्वतंत्र रूप से किया जाता है, लेकिन साझा हितों से जुड़े विषयों पर ये ग्रैंड स्लैम ढाँचे के अंतर्गत सहयोग करते हैं।
- एक ही कैलेंडर वर्ष में चारों ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीतने की उपलब्धि को कैलेंडर ग्रैंड स्लैम कहा जाता है।
