संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा वित्तपोषण फ्रेमवर्क

संदर्भ: हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र ने सड़क सुरक्षा प्रणालियों को मज़बूत करने और सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए भारत के चार राज्यों के साथ साझेदारी में एक ‘सड़क सुरक्षा वित्तपोषण फ्रेमवर्क’ लॉन्च किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह परियोजना राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम में क्रियान्वित की जाएगी।
  • इसका समन्वय भारत में ‘संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर’ कार्यालय द्वारा किया जाएगा।
  • इसके लिए वित्तपोषण ‘संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष से प्राप्त होगा।     
  • इस पहल के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
    • सड़क सुरक्षा शासन के लिए राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण करना।
    • सड़क सुरक्षा कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन में सुधार करना।
    • सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मृत्यु-दर और गंभीर क्षति में कमी लाना, जिसमें  वे दुर्घटनाएं भी शामिल हैं जो स्थायी विकलांगता का कारण बनती हैं।

महत्व

  • यह पहल इस तथ्य को रेखांकित करती है कि विश्व, सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई के दशक (2021-2030)’ के अंतर्गत, वर्ष 2030 तक सड़क यातायात से होने वाली मृत्यु और चोटों को 50% तक कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं कर रहा है।
  • यह भारत के गंभीर सड़क सुरक्षा संकट को रेखांकित करता है, जहाँ सड़क दुर्घटनाओं के कारण प्रतिदिन लगभग 600 मौतें (लगभग 25 मौते प्रति घंटा) होती हैं।
  • दुर्घटना में जीवित बचे लोगों की एक बड़ी संख्या आजीवन विकलांगता का शिकार हो जाती है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक और स्वास्थ्य देखभाल का बोझ बढ़ता है।
  • सड़क दुर्घटनाएँ एक बड़ा आर्थिक नुकसान पहुँचाती हैं; विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, इससे भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 7% नुकसान होता है।
  • यह परियोजना संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से सड़क सुरक्षा शासन में प्रणालीगत सुधारों की आवश्यकता पर बल देती है।
  • यह पहल प्राथमिकता के आधार पर किए जाने वाले हस्तक्षेपों पर बल देती है, जैसे—सड़क सुरक्षा शिक्षा, नियमों का अधिक कड़ाई से प्रवर्तन, वाहनों की फिटनेस जाँच, बेहतर सड़क संकेत और दुर्घटना के बाद की बेहतर देखभाल।
  • यह पहल भारत जैसे विकासशील देशों में सड़क सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और वित्तपोषण तंत्र के महत्व को भी दर्शाती है। 

ऑपरेशन ‘ग़ज़ब लिल हक’

संदर्भ: हाल ही में, डूरंड रेखा के साथ बढ़ती सीमा पार शत्रुता के बाद, पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के खिलाफ ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक नामक एक जवाबी सैन्य अभियान शुरू किया है।

ऑपरेशन ‘ग़ज़ब लिल हक’ के बारे में

  • ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक, जिसका अर्थ है “रैथ फॉर द ट्रुथ” या “रैथ फॉर द सेक ऑफ ट्रुथ”, पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के भीतर तालिबान के ठिकानों के खिलाफ अपने समन्वित हवाई और ज़मीनी हमलों को दिया गया नाम है।
  • यह अभियान 26 फरवरी को शुरू किया गया था, जिसमें लड़ाकू विमान, तोपखाना और ज़मीनी बल काबुल, कंधार, नंगरहार और पक्तिका में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले कर रहे हैं।

अभियान के पीछे के कारण

  • तात्कालिक कारण: पाकिस्तान ने इस अभियान को विवादित डूरंड रेखा के पार अफगान तालिबान बलों द्वारा कथित बिना उकसावे के की गई गोलीबारी की तत्काल प्रतिक्रिया बताया है।
  • रणनीतिक तर्क: इस्लामाबाद ने इन हमलों को क्षेत्रीय अखंडता और सीमा सुरक्षा की रक्षा के लिए एक जवाबी कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके लिए उन्होंने अफगान क्षेत्र से कथित रूप से संचालित होने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आतंकवादियों की उपस्थिति का हवाला दिया है।
  • अंतर्निहित संघर्ष: यह सैन्य अभियान डूरंड रेखा से जुड़े दीर्घकालिक तनावों की परिणति है, जिसमें दोनों देशों के संबंध सीमा पार उग्रवाद, संप्रभुता के उल्लंघन के प्रत्यारोपों और गहरे ऐतिहासिक अविश्वास से घिरे रहे हैं। 

ब्लॉकचेन इंडिया चैलेंज पहल

संदर्भ: हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘ब्लॉकचेन इंडिया चैलेंज’ लॉन्च किया है। यह एक राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स को सरकारी उपयोग के मामलों के लिए परमिशंड ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल गवर्नेंस समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस पहल को MeitY के सहयोग से सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • यह पहल भारतीय स्टार्टअप्स को सरकारी कार्यों के अनुरूप ‘परमिशनड ब्लॉकचेन’ समाधानों को डिज़ाइन करने और उनका प्रायोगिक परीक्षण करने के लिए आमंत्रित करती है।
    • परमिशनड ब्लॉकचेन समाधान ऐसी ‘डिस्ट्रिब्यूटेड लेज़र टेक्नोलॉजी’ (DLT) हैं जिन्हें उन उद्यम परिवेशों के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ पहुँच नियंत्रण, गोपनीयता और शासन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
    • बिटकॉइन जैसे सार्वजनिक नेटवर्क के विपरीत, इसमें भागीदारी केवल ज्ञात और जांचे-परखे निकायों तक ही सीमित होती है, जो इसे उच्च-स्तरीय ‘बिजनेस-टू-बिजनेस’ (B2B) कार्यों के लिए आदर्श बनाती है।
  • इसका मुख्य ध्यान गैर-क्रिप्टो आधारित ब्लॉकचेन और वेब3 (Web3) अनुप्रयोगों पर है जो नियामक नियंत्रण और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
  • इस पहल का उद्देश्य ऐसे छेड़छाड़-मुक्त डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है जो समस्त सरकारी प्रणालियों के मध्य ‘सत्य के साझा एवं प्रामाणिक स्रोत’ के रूप में स्थापित हो सकें।
  • कार्यक्रम के अंतर्गत शासन के दस क्षेत्रों (डोमेन) की पहचान की गई है, जिनमें ई-खरीद, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, विद्युत क्षेत्र, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) एकीकरण, भूमि रिकॉर्ड, और पर्यावरण एवं स्थिरता शामिल हैं।    
  • ये क्षेत्र केवल संकेतात्मक हैं, और स्टार्टअप्स सरकारी विभागों के सहयोग से अन्य प्रभावशाली उपयोग के मामलों का प्रस्ताव देने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • यह प्रतियोगिता चार चरणों में आयोजित की जाएगी: विचार सृजन, प्रोटोटाइप, न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (MVP) और परिनियोजन।
  • ‘उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग’ (DPIIT) द्वारा मान्यता प्राप्त चयनित स्टार्टअप्स को चरण-वार वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।

चुनौती के प्रमुख केंद्र बिंदु

  • राज्यों के सरकारी संस्थानों/विभागों के सहयोग से वेब3 और ब्लॉकचेन पर आधारित विजेताओं के 10 पायलट समाधानों का विकास और कार्यान्वयन।
  • स्टार्टअप्स के लिए चुनौती पूरी होने के बाद परिणामों को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने के अवसर।
  • ब्लॉकचेन तकनीक और वेब3 के क्षेत्र में उद्यमियों को बढ़ावा देना और इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाना।
  • विजेताओं के लिए अपने अनुप्रयोगों को नेशनल ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी स्टैक के हिस्से के रूप में होस्ट करने और कार्यान्वयन के लिए उपयोगकर्ता एजेंसियों/विभागों के साथ सहयोग करने का अवसर।
  • इस हैकाथॉन के तहत विकसित समाधान गैर-क्रिप्टो आधारित ब्लॉकचेन और वेब3 अनुप्रयोग होंगे।

अभ्यास धर्म गार्जियन

संदर्भ: भारत, उत्तराखंड के चौबटिया स्थित ‘फॉरेन ट्रेनिंग नोड’ में भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) के बीच वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्जियन के 7वें संस्करण की मेजबानी कर रहा है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस अभ्यास का आयोजन 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक किया जा रहा है।
  • जापानी दल का प्रतिनिधित्व 32वीं इन्फेंट्री रेजिमेंट के सैनिकों द्वारा किया जा रहा है, जबकि भारतीय सेना के दल में लद्दाख स्काउट्स के सैनिक शामिल हैं।
  • भारत और जापान में बारी-बारी से आयोजित होने वाला यह अभ्यास दोनों राष्ट्रों के बीच रक्षा सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है।

उद्देश्य

  • भारत और जापान के बीच सैन्य सहयोग को मज़बूत करना।
  • अर्ध-शहरी वातावरण में संयुक्त संचालन के लिए संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाना।
  • संयुक्त योजना और अभ्यास के माध्यम से अंतर-संचालनीयता और सामरिक समन्वय में सुधार करना।
  • यह अभ्यास आधुनिक तकनीक और समकालीन परिचालन पद्धतियों के उपयोग पर आधारित है।

प्रमुख सामरिक गतिविधियाँ

  • एक अस्थायी ऑपरेटिंग बेस स्थापित करना।
  • एक इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकोनिसेंस (ISR) ग्रिड विकसित करना।
  • मोबाइल वाहन चेक पोस्ट स्थापित करना।
  • प्रतिकूल वातावरण में घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाना।
  • हेलीबोर्न ऑपरेशन्स का निष्पादन करना।
  • ‘हाउस इंटरवेंशन ड्रिल’ (मकानों में घुसकर कार्रवाई करने का अभ्यास) आयोजित करना।

अभ्यास धर्म गार्जियनके बारे में

  • रणनीतिक और रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए 2017 के भारत-जापान शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय के बाद अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ की स्थापना की गई थी।
  • यह ‘भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • यह अर्ध-शहरी और उग्रवाद विरोधी परिदृश्यों में संयुक्त संचालन पर केंद्रित है, जिससे दोनों सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल बढ़ता है।
  • संस्करणों की समयरेखा:
  • प्रथम संस्करण (2018): काउंटर इन्सर्जेन्सी एंड जंगल वारफेयर स्कूल (CIJW), वैरेंगते, मिजोरम (भारत)
  • 5वाँ संस्करण (2024): महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, राजस्थान (भारत)      
  • छठा संस्करण (2025): ईस्ट फुजी मैन्यूवर ट्रेनिंग एरिया (जापान)
  • 7वाँ संस्करण (2026): चौबटिया, उत्तराखंड (भारत)               

अभ्यास वज्र प्रहार

संदर्भ: भारत 24 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक बकलोह (हिमाचल प्रदेश) स्थित विशेष बल प्रशिक्षण स्कूल में भारत-अमेरिका संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ के 16वें संस्करण का आयोजन कर रहा है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • इस अभ्यास का उद्देश्य अंतर-संचालनीयता, संयुक्तता और विशेष अभियान युक्तियों के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना है।
  • भारतीय सेना की टुकड़ी में इसके विशेष बल इकाइयों के 45 कर्मी सम्मिलित हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिनिधित्व अमेरिकी विशेष बलों के ‘ग्रीन बेरेट्स’ के 12 कर्मियों द्वारा किया जा रहा है।
  • यह प्रशिक्षण पर्वतीय भू-भाग में संयुक्त विशेष बल संचालन पर केंद्रित है, जो वास्तविक परिचालन वातावरण को प्रतिबिंबित करता है।
  • इनमें उच्च भौतिक अनुकूलन, संयुक्त मिशन योजना, संयुक्त सामरिक अभ्यासों का निष्पादन, और विशेष अभियानों में सर्वोत्तम पद्धतियों एवं परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान सम्मिलित है।
  • इस अभ्यास से पारस्परिक विश्वास, अंतर-संचालनीयता और पेशेवर सौहार्द बढ़ने की अपेक्षा है, जो निरंतर विस्तारित होते भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।

अभ्यास वज्र प्रहारके बारे में

  • अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष बलों के मध्य प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला एक द्विपक्षीय संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है।
  • प्रथम आयोजन: 2010 (भारत)।
  • प्रारूप: यह बारी-बारी से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित किया जाता है।
  • पिछला संस्करण: 15वाँ संस्करण (नवंबर 2024)।
    • स्थान: ऑर्चर्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग सेंटर, इडाहो (USA)।

अभ्यास अग्नि वर्षा

संदर्भ: हाल ही में, भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के सैनिकों ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अभ्यास ‘अग्नि वर्षा’ का आयोजन किया।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • इस अभ्यास ने मरुस्थलीय क्षेत्र में भारतीय सेना की परिचालन तैयारी और एकीकृत युद्ध क्षमता को कि पुष्टि की|
  • इस गश्त ने संयुक्त शस्त्रों के समन्वित उपयोग, सटीक लंबी दूरी की मारक क्षमता और नेटवर्क-सक्षम कमांड और नियंत्रण प्रणालियों का प्रदर्शन किया।
  • थार मरुस्थल के वास्तविक युद्धक्षेत्र वातावरण में आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य चुनौतीपूर्ण भू-भाग की स्थितियों में युद्ध प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।

अभ्यास की मुख्य विशेषताएँ

  • इसका मुख्य केंद्र विभिन्न डोमेन में यंत्रीकृत बलों के निर्बाध एकीकरण को वैधता प्रदान करना था।
  • अभ्यास में युद्ध निष्पादन के दौरान गति, सटीकता और सामंजस्य पर बल दिया गया।
  • इसमें समकालीन युद्धक्षेत्र प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें मानव रहित विमान प्रणाली, ड्रोन-रोधी समाधान और सटीक प्रहार करने वाले रॉकेट शामिल थे।
  • यह अभ्यास प्रौद्योगिकी समावेशन, स्वदेशीकरण और क्षमता विकास पर सेना के विशेष फोकस को रेखांकित करता है।
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