अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस

संदर्भ: प्रतिवर्ष 28 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस के बारे में

  • इसका उद्देश्य डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता की रक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • इस वर्ष, यूरोपीय डेटा संरक्षण बोर्ड (EDPB) ने बच्चों के व्यक्तिगत डेटा को ऑनलाइन सुरक्षित रखने को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में निर्धारित किया है।
  • इस दिन को ‘डेटा संरक्षण दिवस’ के रूप में भी जाना जाता है, जिसे यह नाम 2006 में ‘काउंसिल ऑफ यूरोप’ द्वारा ‘कन्वेंशन 108’ पर हस्ताक्षर की स्मृति में दिया गया था।
    • कन्वेंशन 108, जिसे आधिकारिक तौर पर “व्यक्तिगत डेटा की स्वचालित प्रोसेसिंग के संबंध में व्यक्तियों के संरक्षण हेतु कन्वेंशन” कहा जाता है, डेटा संरक्षण पर विश्व की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
  • डिजिटल युग में डेटा गोपनीयता दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो व्यक्तिगत सूचनाओं को सुरक्षित रखने और डेटा-प्रबंधन प्रक्रियाओं को गोपनीयता एवं नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देता है।
  • यह व्यक्तियों को उनके डेटा के संबंध में बुद्धिमानी से निर्णय लेने में सक्षम बनाता है और बेहतर गोपनीयता कानूनों की वकालत करता है।
    • डेटा गोपनीयता सप्ताह (26-30 जनवरी, 2026) भी एक अंतर्राष्ट्रीय पहल के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों और व्यवसायों को अपनी गोपनीयता का सम्मान करने, डेटा सुरक्षित रखने और विश्वास बनाए रखने के लिए सशक्त बनाना है। इस वर्ष का विषय “अपने डेटा पर नियंत्रण रखें” है।

भारत की डेटा गोपनीयता और सुरक्षा तैयारी

  • सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000
    • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, साइबरस्पेस के लिए भारत का मुख्य कानून है, जो ई-गवर्नेंस, डिजिटल वाणिज्य और साइबर सुरक्षा का कानूनी आधार बनता है।
    • राष्ट्रीय डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप, यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता प्रदान करता है, जिससे सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन और सार्वजनिक सेवाओं का डिजिटल वितरण संभव होता है।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
    • यह डिजिटल माध्यमों से एकत्र किए गए व्यक्तिगत डेटा की प्रोसेसिंग को विनियमित करता है, जिसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटल किए गए डेटा भी शामिल हैं।
    • यह अधिनियम व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा करने और नवाचार, सेवा वितरण तथा आर्थिक विकास का समर्थन करने हेतु डेटा के वैध उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 

संदर्भ: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 के अनुसार, भारत विश्व के शीर्ष सर्वाधिक यातायात संकुल देशों में शामिल है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • बैरेंक्विला, कोलंबिया, लंदन (यूनाइटेड किंगडम) इस सूची में शीर्ष स्थान पर हैं।
  • भारत का यातायात संकुलन प्रोफाइल
    • राष्ट्रीय स्तर पर, भारत विश्व का 5वां सबसे अधिक संकुल देश और एशिया में फिलीपींस के बाद दूसरा सबसे अधिक संकुल देश है।
    • सबसे कम यात्रा समय के मामले में बेंगलुरु तीसरे स्थान पर रहा, जिसके बाद कोलकाता चौथे स्थान पर रहा।
    • बेंगलुरु:
      • वर्ष 2025 में मेक्सिको सिटी के बाद बेंगलुरु को दुनिया के दूसरे सबसे अधिक संकुलित शहर के रूप में स्थान दिया गया है।
      • यहाँ औसत संकुलन स्तर 74.4% दर्ज की गई; पीक आवर्स के दौरान 4.2 किमी की दूरी तय करने में 15 मिनट का समय लगा, जिसमें औसत गति 16.6 किमी प्रति घंटा रही।
      • यातायात के कारण यात्रियों को प्रति वर्ष औसतन 168 घंटों का नुकसान हुआ, जो लगभग एक पूरे वर्किंग वीक के बराबर है।
    • पुणे:
      • पुणे 71.1% के संकुलन स्तर के साथ वैश्विक स्तर पर लगभग 5वें स्थान पर रहा।
      • यह बेंगलुरु के बाद भारत का दूसरा सबसे अधिक यातायात संकुल शहर है।
    • मुंबई:
      • मुंबई 63% संकुलन स्तर के साथ वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 शहरों में शामिल है।
      • पिछले वर्ष की तुलना में इसकी स्थिति में मामूली सुधार देखा गया है।
  •  टॉमटॉम इंडेक्स के आँकड़े वर्ष 2025 में वैश्विक आवागमन पैटर्न में एक बड़े बदलाव का संकेत भी देते हैं।
    • प्रातःकालीन संकुलन (सुबह 7-9 बजे): वर्तमान में यातायात की यह अवधि अधिक विस्तारित  हो गई है; जहाँ प्रातःकाल के आरंभिक घंटों में यातायात का दबाव न्यून रहता है, वहीं देर सुबह तक वाहनों का प्रवाह निरंतर बना रहता है।
    • मध्याह्न और दोपहर के आरंभ का यातायात (पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक): इस समयावधि के दौरान यातायात घनत्व में वृद्धि दर्ज की गई है, जो लचीली कार्य-अवधि और मिश्रित कार्य-योजना की उभरती प्रवृत्ति को परिलक्षित करती है।
    • सांयकालीन संकुलन (शाम 3 बजे से): सांध्यकालीन संकुलन का प्रारंभ अपेक्षाकृत शीघ्र हुआ और यह शाम 6 बजे तक बना रहा। यद्यपि इस अवधि के दौरान यातायात का पीक स्तर बहुत तीव्र नहीं था, तथापि इसके प्रभाव से वाहनों की औसत गति में गिरावट दर्ज की गई।

टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के बारे में

  • इसकी शुरुआत अनाम जीपीएस डेटा और खरबों किलोमीटर में रिकॉर्ड की गई वास्तविक ड्राइविंग गति के आधार पर की गई है।
  • यह विभिन्न देशों और शहरों के बीच विस्तृत तुलना करने में सक्षम बनाती है, जो शहरों, सरकारों, संगठनों और मीडिया संस्थानों को गतिशीलता के विकास और उसके प्रति अनुक्रिया को समझने के लिए विश्वसनीय अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
  • डेटा को बड़े महानगरीय क्षेत्रों (“मेट्रो”) और केंद्रीय शहरी क्षेत्रों (“सिटी”) के भीतर ड्राइवरों से गुप्त तरीके से एकत्र किया गया था, जिसमें संपूर्ण सड़क नेटवर्क, तीव्र मार्ग (Fast roads) और इन क्षेत्रों से गुजरने वाले राजमार्ग शामिल हैं।
  • 2025 का सूचकांक 60 से अधिक देशों के 500 शहरों को कवर करता है और यह अब तक का सबसे व्यापक संस्करण है।

‘एंड ऑफ लाइफ व्हीकल्स’ पर नीति आयोग की रिपोर्ट

संदर्भ: नीति आयोग की रिपोर्ट “भारत में ELVs की चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना” (Enhancing Circular Economy of ELVs in India) के अनुसार, भारत में एंड ऑफ लाइफ (ELVs) की संख्या वर्ष 2025 के लगभग 2.3 करोड़ से लगभग दोगुनी होकर 2030 तक 5 करोड़ पहुँच सकती है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • पर्यावरणीय चिंताएं: पुराने वाहन अत्यधिक प्रदूषणकारी होते हैं।  BS-I मानक वाले वाहन, BS-VI मानकों को पूरा करने वाले वाहनों की तुलना में आठ गुना अधिक उत्सर्जन करते हैं।
  • कमजोर स्क्रैप प्रबंधन संरचना:
    • इन वाहनों के परीक्षण, स्क्रैपिंग और पुनर्चक्रण के लिए बनी प्रणालियाँ इस चुनौती से निपटने में कारगर नहीं रही हैं।
    • भारत की वर्तमान ELV स्क्रैपिंग प्रणाली को एक प्रभावी और कुशल इकोसिस्टम स्थापित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • प्रमुख चुनौतियाँ:
    • स्वचालित परीक्षण स्टेशनों (ATS) की सीमित उपलब्धता, पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं (RVSF) का अनुपस्थित होना या कम उपयोग होना और डी-रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण रद्द करने) की जटिल प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं प्रमुख बाधाएं हैं।
    • एक अनियमित और अनौपचारिक स्क्रैपिंग क्षेत्र, जो कम लागत पर संचालित होता है और वाहन मालिकों को आकर्षक बोलियों की पेशकश करता है।

प्रमुख सिफारिशें:

  • भारत के स्क्रैपेज इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना: समन्वित बुनियादी ढांचा विकास, क्षेत्र के औपचारिकीकरण, सरलीकृत प्रक्रियाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से।
  • बुनियादी ढांचे का विस्तार: वाहनों की सीमित संख्या वाले राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में प्रति जिला एक ATS स्थापित करना। ATS और RVSF को समयबद्ध आधार पर स्थापित किया जाना चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): व्यापक भौगोलिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए निजी संचालन के साथ सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के नेतृत्व वाले मॉडलों की तलाश की जा सकती है।
  • क्षेत्र का औपचारिकीकरण: ELVs से जुड़े स्पेयर पार्ट्स व्यापार का औपचारिकीकरण, उच्च अनिवार्य रिकवरी दर और मूल्य प्राप्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
  • प्रक्रियात्मक सुधार: वाहन का डी-रजिस्ट्रेशन केवल RVSF द्वारा जारी किए गए वैध ‘जमा प्रमाण पत्र’ जमा करने पर ही होना चाहिए।
  • सूचना प्रसार: परिवहन कार्यालयों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ATS और RVSF की जानकारी व्यापक रूप से उपलब्ध कराना।

एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ELVs) के बारे में:

  • ELVs वे वाहन हैं जिनका पंजीकरण अब वैध नहीं है और जिन्हें अधिकृत स्वचालित फिटनेस केंद्र या सड़क परिवहन अधिकारी द्वारा अनुपयुक्त घोषित किया गया है। ऐसे वाहनों को उनके वैध पंजीकृत मालिक द्वारा स्वेच्छा से अपशिष्ट घोषित कर दिया जाता है।
  • वाहन स्क्रैपेज नीति:
    • 2021 में शुरू की गई इस नीति का उद्देश्य ATS और RVSF के माध्यम से पुराने, प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बाहर करना है।
    • 20 वर्ष से पुराने निजी वाहनों और 15 वर्ष से पुराने वाणिज्यिक वाहनों को फिटनेस टेस्ट पास करना होगा या उनका पंजीकरण रद्द कर उन्हें स्क्रैप करना होगा।
    • यह नीति स्वैच्छिक स्क्रैपिंग को प्रोत्साहित करने के लिए स्क्रैप मूल्य, शुल्क छूट, और गैर-परिवहन वाहनों के लिए 25% तक तथा परिवहन वाहनों के लिए 15% तक कर रियायत  जैसे प्रोत्साहन प्रदान करती है।
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