बायो-बिटुमेन टेक्नोलॉजी
संदर्भ: भारत ने सड़क निर्माण के लिए एक स्वदेशी बायो-बिटुमेन टेक्नोलॉजी लॉन्च की है। यह टिकाऊ राजमार्गों के निर्माण और आयातित जीवाश्म ईंधन-आधारित सामग्रियों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
अन्य संबंधित जानकारी
• केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने “पायरोलिसिस के माध्यम से बायो-बिटुमेन: कृषि अवशेषों से सड़कों तक” तकनीक के सफल हस्तांतरण की घोषणा की।
• यह तकनीक CSIR–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI), नई दिल्ली और CSIR–भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP), देहरादून द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है।
बायो-बिटुमेन तकनीक के बारे में
• यह तकनीक पायरोलिसिस की प्रक्रिया के माध्यम से कृषि अवशेषों को बायो-बिटुमेन में बदलती है।
- पायरोलिसिस एक ताप-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कार्बनिक पदार्थों को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति (या नगण्य उपस्थिति) में गर्म किया जाता है, जिससे वे बिना जले सरल पदार्थों में विघटित हो जाते हैं।
• यह नवाचार सड़क निर्माण में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक पेट्रोलियम-व्युत्पन्न बिटुमेन का एक बायो-आधारित विकल्प उपलब्ध कराता है।
• बायो- बिटुमेन का उपयोग करके बनाई गई सड़कों के अधिक टिकाऊ होने की उम्मीद है, साथ ही इनमें निर्माण और रखरखाव की लागत भी कम आएगी।
• यह प्रक्रिया उत्सर्जन-मुक्त है और चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा ‘अपशिष्ट से धन’ के सिद्धांतों के अनुरूप है।
आर्थिक और रणनीतिक महत्त्व
• भारत वर्तमान में अपनी बिटुमेन जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत आयात करता है।
• स्वदेशी बायो- बिटुमेन में सालाना ₹25,000–30,000 करोड़ लागत के आयात को प्रतिस्थापित करने की क्षमता है।
• यह तकनीक बुनियादी ढांचा सामग्री पर विदेशी निर्भरता को कम करके आत्मनिर्भर भारत का समर्थन करती है।
• यह कृषि कचरे से मूल्य निर्माण (value creation) करते हुए आर्थिक स्वावलंबन का समर्थन करती है।
भारत ने 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की
संदर्भ: 1 जनवरी, 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता आधिकारिक तौर पर ब्राजील से भारत को हस्तांतरित हो गई है। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच लचीलेपन, नवाचार और ग्लोबल साउथ के सहयोग को बढ़ाना है।
अन्य संबंधित जानकारी
• ब्राजील ने ब्रिक्स शेरपाओं की एक बैठक के दौरान औपचारिक रूप से भारत को अध्यक्षता सौंपी।
- ब्रिक्स शेरपा प्रत्येक ब्रिक्स देश द्वारा नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिकारी होते हैं, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों और मंत्रिस्तरीय बैठकों के लिए समन्वय, बातचीत और एजेंडा तैयार करने का कार्य करते हैं।
• इन टिप्पणियों को भारत के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था।
• इन घोषणाओं और प्राथमिकताओं की रूपरेखा भारत के प्रधानमंत्री द्वारा रियो डी जेनेरियो में आयोजित BRICS 2025 शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत की गई थी।
• उनके संबोधन के मुख्य अंश भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs – MEA) की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए थे।
BRICS के बारे में
• “BRIC” (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) शब्द का प्रयोग सबसे पहले 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने किया था।
• एक औपचारिक समूह के रूप में BRIC की शुरुआत 2006 में सेंट पीटर्सबर्ग में G8 आउटरीच शिखर सम्मेलन के साथ-साथ रूस, भारत और चीन के नेताओं की बैठक के बाद हुई।
• इस समूह को 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान BRIC विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में औपचारिक रूप दिया गया था।
• सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
भारत की BRICS अध्यक्षता के बारे में
• भारत पहली बार दस सदस्य देशों के विस्तारित प्रारूप में ब्रिक्स का नेतृत्व करेगा।
• अध्यक्षता का विषय लचीलेपन को मजबूत करने और सहयोग तथा स्थिरता के लिए नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
• भारत ब्रिक्स को ‘मानवता प्रथम’ के सिद्धांत द्वारा निर्देशित एक जन-केंद्रित मंच के रूप में पुनः परिभाषित करना चाहता है।
• भारत 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना
संदर्भ: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए एक देशव्यापी कैशलेस उपचार योजना शुरू करेंगे। इसका उद्देश्य पीड़ितों को दुर्घटना के तुरंत बाद समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
• यह योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ₹1.5 लाख तक का कैशलेस चिकित्सा उपचार मुहैया कराएगी।
• यह योजना देश की सभी सड़कों पर लागू होगी और केवल राष्ट्रीय राजमार्गों तक सीमित नहीं रहेगी।
• उपचार दुर्घटना के बाद कम से कम सात दिनों की अवधि के लिए उपलब्ध होगा।
• संभावना है कि इस योजना का देशव्यापी शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।
वित्तपोषण और बीमा फ्रेमवर्क
• चिकित्सा व्यय को वाहन पंजीकरण के समय खरीदे गए थर्ड-पार्टी मोटर बीमा के तहत कवर किया जाएगा।
• उन मामलों में जहाँ दुर्घटना में शामिल वाहन का बीमा नहीं है, उपचार का खर्च सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा कोष (Road Safety Fund) से वहन किया जाएगा।
- सड़क सुरक्षा कोष (RSF) एक समर्पित और गैर-व्यपगत कोष है, जिसे मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, मृत्यु दर और चोटों को कम करने के उपायों के लिए वित्त पोषण प्रदान करना है।
• जो व्यक्ति दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुँचाएंगे, उन्हें इस योजना के तहत ‘राहवीर’ (Rahveers) कहा जाएगा।
• ऐसे नेक मददगारों को ₹25,000 का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
• प्रोत्साहन प्रति दुर्घटना केवल एक पीड़ित परिवार को ही मिलेगा।
2025 में भारत की डेटा सेंटर क्षमता में दोगुनी से अधिक वृद्धि
संदर्भ: हाल ही में, भारत ने 2025 में डेटा सेंटर क्षमता में भारी वृद्धि दर्ज की है। उल्लेखनीय है कि इसकी नई आपूर्ति पिछले वर्ष के 191 MW IT की तुलना में दोगुनी से भी अधिक होकर 387 MW IT हो गई है।
अन्य संबंधित जानकारी
• भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 70% हिस्सा अकेले मुंबई और चेन्नई में केंद्रित है। माँग में वृद्धि का मुख्य कारण गूगल, एडब्ल्यूएस (AWS) और माइक्रोसॉफ्ट जैसे हाइपरस्केलर्स द्वारा स्थानीय डेटा स्टोरेज और AI वर्कलोड के लिए क्षमता बढ़ाना है।
• भारत की डेटा सेंटर खपत वर्ष 2025 में वार्षिक आधार पर 5% बढ़कर 427 MW IT हो गई, जो 2024 में 407 MW IT थी।
- MW IT क्षमता का तात्पर्य उस विद्युत शक्ति (इलेक्ट्रिकल पावर) से है, जिसे मेगावाट में मापा जाता है, और जो एक डेटा सेंटर सुविधा अपने आईटी बुनियादी ढांचे के लिए उपयोग कर सकती है।
• विशाखापत्तनम कोलकाता (48% CAGR) और हैदराबाद (44% CAGR ) जैसे शहरों में उच्च CAGR दर्ज की जा रही है। जहाँ नीतिगत समर्थन, लागत लाभ, अंडरसी केबल लिंक और 5G-IoT-आधारित ‘लो-लेटेंसी’ (कम विलंबता) की मांग हैं।
• रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत का डेटा सेंटर बाजार 2030 तक तिगुना होकर 4 GW IT क्षमता से अधिक हो जाएगा, जो 23% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगा।
• 5G विस्तार और बढ़ती डिजिटल खपत, स्थानीय प्रोसेसिंग और लो-लेटेंसी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए टियर-2 शहरों में हाइपरस्केल डेटा सेंटर की मांग को बढ़ावा दे रही है।
• ये रुझान बड़े पैमाने पर दीर्घकालिक डेटा सेंटर निवेश के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूती प्रदान करते हैं।
डेटा सेंटर के बारे में
• डेटा सेंटर एक भौतिक कमरा, भवन या सुविधा है जिसमें एप्लिकेशन और सेवाओं के निर्माण, संचालन और वितरण के लिए आईटी बुनियादी ढांचा रखा जाता है।
• यह उन एप्लिकेशनों और सेवाओं से संबंधित डेटा को स्टोर और प्रबंधित करता है।
• वर्ष 2006 में, गूगल ने द डलेस, ओरेगन (The Dalles, Oregon) में पहला हाइपरस्केल डेटा सेंटर लॉन्च किया था।
• डेटा सेंटर के प्रकार:
- एंटरप्राइज (on-premises) डेटा सेंटर: इस डेटा सेंटर मॉडल में सभी आईटी बुनियादी ढाँचा और डेटा कंपनी के अपने परिसर में रहता है। कई कंपनियां सुरक्षा और नियंत्रण के लिए ऑन-प्रिमाइसेस डेटा सेंटर चुनती हैं।
- पब्लिक क्लाउड और हाइपरस्केल डेटा सेंटर: क्लाउड डेटा सेंटर एक साझा आईटी बुनियादी ढांचे को होस्ट करते हैं, जिसे इंटरनेट के माध्यम से कई ग्राहकों द्वारा एक्सेस किया जाता है। इनमें से सबसे बड़े सेंटर्स को ‘हाइपरस्केल’ डेटा सेंटर के रूप में जाना जाता है, जिन्हें प्रमुख क्लाउड सेवा प्रदाताओं जैसे कि AWS, गूगल क्लाउड, IBM क्लाउड और Microsoft Azure द्वारा संचालित किया जाता है।
- मैनेज्ड (Managed) डेटा सेंटर: इन डेटा सेंटर्स में, ग्राहक समर्पित सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग हार्डवेयर को पट्टे पर लेते हैं, जबकि सेवा प्रदाता इसके प्रशासन, निगरानी और संचालन का प्रबंधन करता है।
UIDAI ने आधार शुभंकर ‘उदय’ लॉन्च किया
संदर्भ: हाल ही में, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने तिरुवनंतपुरम में आधार के आधिकारिक शुभंकर ‘उदय’ (Udai) को लॉन्च किया।
अन्य संबंधित जानकारी
• इस शुभंकर का चयन MyGov प्लेटफॉर्म पर आयोजित एक राष्ट्रीय डिजाइन और नाम प्रतियोगिता के माध्यम से प्राप्त विभिन्न प्रविष्टियों में से किया गया है।
- MyGov भारत का आधिकारिक नागरिक सहभागिता मंच है, जो डिजिटल माध्यमों से प्रशासन, नीति-निर्धारण और राष्ट्र निर्माण की पहलों में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम बनाता है।
• उदय एक नया ‘निवासी-केंद्रित संचार साथी’ है, जिसे आधार सेवाओं के प्रति जनसामान्य की समझ को सरल बनाने के लिए तैयार किया गया है।
• यह आधार से संबंधित जानकारी को अधिक प्रासंगिक और जनता-अनुकूल बनाएगा।

• यह आधार सेवाओं के संचार को सरल करेगा, जिसमें अपडेट, प्रमाणीकरण, ऑफलाइन सत्यापन, चयनात्मक डेटा साझाकरण, नई तकनीकें और जिम्मेदार उपयोग जैसे विषय शामिल होंगे।
• इसे लॉन्च किया जाना आधार सेवाओं के प्रति उपयोगकर्ता जागरूकता, जिम्मेदार उपयोग और नागरिक-अनुकूल संचार को बढ़ाने के लिए UIDAI द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
• शुभंकर डिजाइन प्रतियोगिता में अरुण गोकुल (त्रिशूर, केरल) ने प्रथम पुरस्कार जीता, उसके बाद इदरीस दवाईवाला (पुणे, महाराष्ट्र) दूसरे स्थान पर और कृष्ण शर्मा (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) तीसरे स्थान पर रहे।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बारे में :
• UIDAI आधार अधिनियम, 2016 के तहत एक सांविधिक प्राधिकरण है, जिसे 12 जुलाई 2016 को इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत स्थापित किया गया था। इसमें ‘आधार और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2019’ द्वारा संशोधन किया गया।
• इसका गठन भारत के सभी निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या (UID), जिसे “आधार” नाम दिया गया है, जारी करने के लिए किया गया था।
• इसे सुरक्षित और लागत प्रभावी प्रमाणीकरण के माध्यम से नकली और फर्जी पहचान को समाप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
पंखुड़ी (PANKHUDI) पोर्टल
संदर्भ: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 8 जनवरी 2026 को पंखुड़ी (PANKHUDI) पोर्टल लॉन्च किया, जो एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल है। इसे कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और महिला एवं बाल विकास पर केंद्रित साझेदारी की पहलों को सुचारू करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
• पंखुड़ी एक सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों, अनिवासी भारतीयों (NRIs), गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के योगदानकर्ताओं, कॉर्पोरेट संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों को एक साथ एक मंच पर लाता है।
• इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, समन्वय में तेजी लाना और स्वैच्छिक एवं संस्थागत भागीदारी के लिए एक संरचित डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
• यह योगदानकर्ताओं को पंजीकरण करने, पहलों की पहचान करने, आवेदन जमा करने और निर्धारित अनुमोदन वर्कफ़्लो के माध्यम से परियोजना की प्रगति को ट्रैक करने में सक्षम बनाता है।
• पंखुड़ी मंत्रालय के प्रमुख मिशनों जैसे- मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति शामिल हैं, में सहायता करता है, जिनमें ।
• जवाबदेही और पता लगाने की क्षमता सुनिश्चित करने के लिए प्लेटफॉर्म पर सभी योगदानों को गैर-नकद माध्यमों से संसाधित किया जाएगा।
• पंखुड़ी पोर्टल का शुभारंभ भारत भर में महिलाओं और बच्चों के समावेशी, सहयोगात्मक और परिणाम-उन्मुख विकास के लिए डिजिटल समाधानों का लाभ उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम ढांचे के माध्यम से सरकार के साथ CSR और साझेदारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
• यह पोर्टल 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों, 5,000 बाल देखभाल संस्थानों, लगभग 800 वन स्टॉप केंद्रों (OSCs), 500 से अधिक सखी निवास और 400 से अधिक शक्ति सदनों में बुनियादी ढांचे और सेवाओं को सुदृढ़ करेगा, जिससे अंततः करोड़ों नागरिकों के जीवन की सुगमता में सुधार होगा।
• यह एक ऐसा डिजिटल मंच प्रदान करके ‘जन भागीदारी’ की भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जो सामाजिक विकास के लिए सरकार, नागरिकों और संस्थानों को एकजुट करता है।
रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल 2026
संदर्भ: रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल भारत का एक नया विज्ञान कूटनीति मंच है, जिसे 2026 के संस्करण में रायसीना संवाद के ढांचे के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति को संयुक्त रूप से प्रयोग करने के लिए शुरू किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
• भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने ‘रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल’ के उद्घाटन समारोह के लिए साझेदारी की घोषणा की।
• यह घोषणा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान की गई।
पहल के उद्देश्य

• इस पहल का उद्देश्य रायसीना डायलॉग के भीतर विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए एक समर्पित मंच तैयार करना है।
• यह वैश्विक नीति और राजनयिक जुड़ाव को आकार देने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को मुखरता से उजागर करने का प्रयास करता है।
• यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की बदलती प्राथमिकताओं और अवसरों को दर्शाता है।
• यह विज्ञान-नीति इंटरफेस पर क्षमता निर्माण और सूचित वैश्विक संवाद के लिए एक मंच प्रदान करता है, और सरकारों, वैज्ञानिक समुदायों और कूटनीति विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ाता है।
