भारत–न्यूज़ीलैण्ड ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्पत्ति-संबंधी आँकड़ों के आदान-प्रदान पर सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

संदर्भ: भारत और न्यूज़ीलैंड ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्पत्ति-संबंधी आँकड़ों के आदान-प्रदान पर सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस सहयोग ज्ञापन पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड तथा न्यूज़ीलैंड सीमा शुल्क सेवा की नियंत्रक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टीन स्टीवेन्सन ने हस्ताक्षर किए।
  • इसका उद्देश्य सीमा शुल्क संबंधी सहयोग को बढ़ावा, उत्पत्ति से संबंधित जानकारी के आदान-प्रदान और सत्यापन में सुधार करना, सूचना की कमियों को दूर करना तथा मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत रियायती शुल्क का लाभ प्राप्त करना सुगम बनाना है।
  • यह व्यवस्था दोनों देशों द्वारा भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान की प्रणाली विकसित किए जाने के दौरान अंतरिम सत्यापन प्रक्रियाओं को समर्थन देती है। इससे निर्यातकों या आयातकों के लिए कोई नई आवश्यकता निर्धारित नहीं होती।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के बारे में

  • हस्ताक्षर एवं लागू होना: इस समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर किए गए और यह 20 अक्टूबर 2026 से लागू हुआ।
  • बाज़ार तक पहुँच: न्यूज़ीलैंड भारतीय निर्यात के लिए सभी शुल्क श्रेणियों में 100% शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान करता है। इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग वस्तुएँ, औषधियाँ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ लाभान्वित होंगे।
  • भारत द्वारा शुल्क रियायतें: भारत अपनी 70.03% शुल्क श्रेणियों पर रियायतें प्रदान करता है, जिनमें न्यूज़ीलैंड के भारत को होने वाले वर्तमान निर्यात का लगभग 95% शामिल है। हालाँकि, डेयरी उत्पाद, चीनी और खाद्य तेल जैसे संवेदनशील उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है।
  • निवेश प्रतिबद्धता: न्यूज़ीलैंड ने भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • व्यापार लक्ष्य: दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाना है।
  • उत्पत्ति के नियम: रियायती शुल्क का लाभ केवल उन्हीं पात्र वस्तुओं पर लागू होता है, जो मुक्त व्यापार समझौते के उत्पत्ति संबंधी नियमों और लागू दस्तावेज़ी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।

प्लायमाउथ, ब्रिटेन के तट पर कोंकण-26 अभ्यास का समापन

संदर्भ: भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास KONKAN-26 का समापन 15 अक्टूबर 2026 को ब्रिटेन के प्लायमाउथ तट के पास हुआ।

कोंकण-26 अभ्यास के बारे में

  • अवधि: 8–15 अक्टूबर 2026।
  • भाग लेने वाले जहाज: आईएनएस त्रिशूल (भारतीय नौसेना का स्टील्थ फ्रिगेट) और एचएमएस सदरलैंड (ब्रिटेन की रॉयल नेवी का ड्यूक श्रेणी का पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत)।
  • आयोजन: ब्रिटेन की रॉयल नेवी के बेड़े के संचालन मानक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा।
  • समुद्री चरण: 12–15 अक्टूबर 2026। इसमें सामरिक अभ्यास, संचार प्रक्रियाएँ, सतह पर मौजूद जहाजों के विरुद्ध असममित युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध तथा हथियारों का परीक्षण शामिल था।

सिंगापुर–भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (SIMBEX-2026)

संदर्भ: सिंगापुर–भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास का 33वाँ संस्करण 21 अक्टूबर 2026 को विशाखापत्तनम में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना है।

अभ्यास के बारे में

  • प्रतिभागी: भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना। सिंगापुर की नौसेना का प्रतिनिधित्व आरएसएस सुप्रीम ने किया।
  • उत्पत्ति: वर्ष 1994 में इसकी शुरुआत ‘लायन किंग अभ्यास’ के रूप में हुई।
  • अवधि: 21–26 अक्टूबर 2026।
  • उद्घाटन समारोह: 21 अक्टूबर को आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस कमोर्टा पर आयोजित किया गया।
  • बंदरगाह चरण (21–23 अक्टूबर): पेशेवर विचार-विमर्श, विषय विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा तथा योजना संबंधी सम्मेलन आयोजित किए गए।
  • समुद्री चरण (24–26 अक्टूबर): बंगाल की खाड़ी में आयोजित इस चरण में पनडुब्बी-रोधी, सतह-रोधी और वायु-रोधी युद्धाभ्यास, नौचालन कौशल संबंधी अभ्यास तथा सामरिक युद्धाभ्यास शामिल हैं।

IBSAMAR IX 2026 का समापन

संदर्भ: भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका समुद्री अभ्यास (IBSAMAR IX 2026) का नौवाँ संस्करण 20 अक्टूबर 2026 को दक्षिण अफ्रीका के साइमन’स टाउन में संपन्न हुआ। इस अभ्यास से त्रिपक्षीय नौसैनिक सहयोग और समुद्री अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा मिला।

भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका समुद्री अभ्यास (IBSAMAR IX 2026) के बारे में

  • भाग लेने वाली नौसेनाएँ: भारतीय नौसेना, ब्राज़ीलियाई नौसेना और दक्षिण अफ्रीकी नौसेना।
  • अवधि: बंदरगाह और समुद्री चरणों के दौरान दस दिनों तक संयुक्त गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
  • प्रमुख गतिविधियाँ: अंतर-संचालनीयता और आपसी समझ में सुधार के लिए पेशेवर विचार-विमर्श, परिचालन संबंधी गतिविधियाँ और संयुक्त समुद्री प्रशिक्षण।
  • प्रमुख उद्देश्य: परिचालन सहयोग को मजबूत करना, नौसैनिक कर्मियों के बीच विश्वास बढ़ाना तथा तीनों नौसेनाओं की एक साथ कार्य करने की क्षमता में वृद्धि करना।
  • प्रमुख विशेषता: आईएनएस तरकश के कमांडिंग ऑफिसर ने इस बात पर जोर दिया कि IBSAMAR संयुक्त प्रशिक्षण, पेशेवर विचार-विमर्श और आपसी सीख के माध्यम से लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक संबंधों को सार्थक नौसैनिक सहयोग में बदलता है।
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