प्रधानमंत्री मोदी ने श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

संदर्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर 2026 को क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत के संघर्ष में उनके योगदान को याद किया।

श्यामजी कृष्ण वर्मा के बारे में

  • 4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ के मांडवी में जन्मे श्यामजी कृष्ण वर्मा संस्कृत के विद्वान, वकील और राष्ट्रवादी थे।
  • स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रभावित होकर वे बॉम्बे आर्य समाज के प्रथम अध्यक्ष बने।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

  • इंडियन होम रूल सोसाइटी (1905): भारत के स्वशासन को बढ़ावा देने और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का विरोध करने के लिए लंदन में इसकी स्थापना की।
  • इंडिया हाउस (1905): भारतीय विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करने के लिए लंदन में इसकी स्थापना की। यह आगे चलकर क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ और इसका संबंध विनायक दामोदर सावरकर तथा अन्य क्रांतिकारियों से रहा।
  • द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट (1905): एक मासिक पत्रिका शुरू की, जिसके माध्यम से राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार किया गया और ब्रिटिश शासन की आलोचना की गई।

विरासत

  • वर्मा 1907 में पेरिस चले गए और बाद में अपने जीवन के अंतिम वर्ष स्विट्जरलैंड के जिनेवा में बिताए, जहाँ 30 मार्च 1930 को उनका निधन हुआ।

अंतर-संसदीय संघ (IPU) का 153वाँ सम्मेलन

संदर्भ: राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश 5–9 अक्टूबर 2026 तक तंजानिया के अरूशा में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) के 153वें सम्मेलन में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • विषय: “समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के माध्यम से सुशासन को बढ़ावा देना और समुदायों को सशक्त बनाना।”
  • प्रमुख एजेंडा: सम्मेलन में समावेशी सामाजिक विकास पर चर्चा की जाएगी, जिसमें दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए संसदीय रणनीतियाँ भी शामिल हैं। गवर्निंग काउंसिल नए IPU अध्यक्ष का चुनाव करेगी और सदस्य एक प्रस्तावित आपातकालीन विषय पर भी विचार करेंगे।

अंतर-संसदीय संघ (IPU) के बारे में

  • 1889 में स्थापना: IPU की स्थापना यूनाइटेड किंगडम के सांसद विलियम रैंडल क्रेमर और फ्रांस के सांसद फ्रेडरिक पासी ने की थी। IPU संसदीय कूटनीति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देता है।
  • संरचना और शासन
    • महासभा: IPU का प्रमुख वैश्विक मंच, जहाँ सांसद अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित होते हैं।
    • शासी काउंसिल: IPU का प्रमुख प्रशासनिक और नीति-निर्माण निकाय।
    • कार्यकारी समिति: प्रशासन की देखरेख करती है और गवर्निंग काउंसिल को सिफारिशें देती है।
    • अध्यक्ष और महासचिव: अध्यक्ष राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हैं, जबकि महासचिव संगठन के प्रशासन का प्रमुख होता है।
  • मुख्यालय और सदस्यता
    • अंतर-संसदीय संघका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। वर्तमान में इसके 183 सदस्य संसद और 15 सहयोगी सदस्य हैं।
    • नाउरू (Naoero) के 153वें सम्मेलन के दौरान IPU का 184वाँ सदस्य संसद बनने की उम्मीद है।
  • भारत की सदस्यता
    • भारत 1949 में IPU में शामिल हुआ और उसी वर्ष इसने स्टॉकहोम में आयोजित इसके सम्मेलन में भाग लिया।
  • भारतीय संसदीय समूह (IPG)
    • भारतीय संसदीय समूह (IPG) एक स्वायत्त निकाय है, जिसका गठन 1949 में 1948 में संविधान सभा (विधानमंडल) द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव के बाद किया गया था।
    • लोकसभा अध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं और एक कार्यकारी समिति इसके कार्यों का प्रबंधन करती है।
    • IPG, IPU में भारत के राष्ट्रीय समूह के रूप में कार्य करता है तथा राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) की भारत में मुख्य शाखा है। यह भारतीय और विदेशी सांसदों के बीच विचारों एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है।

NABKISAN ने भारत का पहला WASH-केंद्रित सोशल बॉन्ड सूचीबद्ध किया

संदर्भ: NABKISAN फाइनेंस लिमिटेड ने 1 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर केवल जल, स्वच्छता और स्वच्छता व्यवहार (WASH) क्षेत्र के लिए समर्पित भारत का पहला सोशल बॉन्ड सूचीबद्ध किया। इसके माध्यम से ₹180 करोड़ जुटाए गए। नाबकिसान राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की एक सहायक कंपनी है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • बॉन्ड का विवरण: पाँच वर्षीय इस बॉन्ड को 1.8 गुना अधिक अभिदान प्राप्त हुआ। इस पर 8.10% कूपन दर है और यह सितंबर 2031 में परिपक्व होगा। इसे क्रिसिल AAA (स्थिर) और CARE AAA (स्थिर) रेटिंग प्रदान की गई है।
  • धन का उपयोग: जुटाए गए ₹180 करोड़ का उपयोग ग्रामीण और वंचित समुदायों में सुरक्षित जल, स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी समाधानों तक पहुँच का विस्तार करने के लिए किया जाएगा। इससे बेहतर स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन की गुणवत्ता में योगदान मिलने की उम्मीद है।

महत्त्व

  • नवीन विकास वित्तपोषण: यह पहल दर्शाती है कि पूँजी बाजार के साधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण विकास प्राथमिकताओं के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं तथा सामाजिक अवसंरचना परियोजनाओं को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है।
  • ग्रामीण विकास: ग्रामीण और वंचित समुदायों में WASH समाधानों के लिए वित्तपोषण से स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ आवश्यक सेवाओं तक पहुँच अभी भी अपर्याप्त है।
  • सतत वित्त को बढ़ावा: यह पहल भारत के सतत-वित्त पारितंत्र के विकास में योगदान देती है, क्योंकि यह पूँजी बाजार से प्राप्त वित्तपोषण को स्पष्ट रूप से परिभाषित सामाजिक परिणामों से जोड़ती है।

पाँच शास्त्रीय भाषाओं के लिए उत्कृष्टता केंद्र

संदर्भ: हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त पाँच भाषाओं—असमिया, बंगाली, पालि, मराठी और प्राकृत के अध्ययन, अनुसंधान, संरक्षण और संवर्धन को मजबूत करने के लिए पाँच उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence—CoEs) को मंजूरी दी है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • पाँच उत्कृष्टता केंद्र निम्नलिखित संस्थानों में स्थापित किए जाएंगे:
    • असमिया — तेजपुर विश्वविद्यालय, असम
    • बंगाली — विश्वभारती विश्वविद्यालय
    • पालि — केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय
    • प्राकृत — केंद्रीय गुजरात विश्वविद्यालय
    • मराठी — डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे
  • ये केंद्र इन भाषाओं की भाषाई और साहित्यिक विरासत के अकादमिक अनुसंधान, डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रसार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इससे इन भाषाओं से जुड़ी ज्ञान परंपराओं को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने में सहायता मिलेगी।

शास्त्रीय भाषाओं के बारे में

  • भारत सरकार ने 2004 में ऐसी भाषाओं को मान्यता देने के लिए शास्त्रीय भाषा श्रेणी बनाई, जिनका लंबा इतिहास, समृद्ध प्राचीन साहित्य तथा महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं बौद्धिक योगदान रहा है।
  • इसके बाद 2005 और 2024 में शास्त्रीय भाषा के मानदंडों में संशोधन किया गया। ये संशोधन साहित्य अकादमी के अंतर्गत गठित भाषाविद् विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों के आधार पर किए गए।
  • अक्टूबर 2024 में मराठी, पालि, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया। इसके साथ भारत में शास्त्रीय भाषाओं की कुल संख्या बढ़कर 11 हो गई।
  • अन्य छह शास्त्रीय भाषाएँ हैं—तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और ओड़िया।
  • 2024 में संशोधित मानदंडों में शामिल हैं:
    • प्रारंभिक ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या लगभग 1,500–2,000 वर्षों का दर्ज इतिहास।
    • प्राचीन साहित्य और ग्रंथों का ऐसा समृद्ध भंडार, जिसे पीढ़ियों से विरासत के रूप में स्वीकार किया गया हो।
    • ज्ञान संबंधी ग्रंथ, विशेष रूप से गद्य, के साथ-साथ काव्य तथा अभिलेखीय या शिलालेखीय प्रमाण।
    • शास्त्रीय भाषा और उसका साहित्य अपने वर्तमान स्वरूप से भिन्न हो या बाद के भाषाई रूपों के साथ उसमें निरंतरता का अभाव हो।

शास्त्रीय भाषा का दर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?

  • विरासत का संरक्षण: प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों, शिलालेखों, साहित्यिक परंपराओं और ज्ञान प्रणालियों को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने में सहायता करता है।
  • अनुसंधान और विद्वतापूर्ण अध्ययन: समर्पित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से भाषाई, साहित्यिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है।
  • डिजिटलीकरण और पहुँच: पांडुलिपियों तथा अन्य भाषाई संसाधनों के डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण को समर्थन मिलता है, जिससे ये शोधकर्ताओं और व्यापक जनसमुदाय के लिए अधिक सुलभ बनते हैं।
  • ज्ञान का हस्तांतरण: भारत की प्राचीन बौद्धिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन एवं प्रसार को सुगम बनाता है तथा उन्हें समकालीन विद्वानों से जोड़ता है।

RoDTEP योजना का दिसंबर 2026 तक विस्तार

संदर्भ: वाणिज्य विभाग ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की छूट (RoDTEP) योजना का विस्तार 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह योजना पहले 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाली थी। इस प्रकार, इसे तीन महीने का विस्तार दिया गया है।
  • इस विस्तार के अंतर्गत घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) इकाइयों, अग्रिम प्राधिकरण (AA) धारकों, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) इकाइयों और निर्यातोन्मुख इकाइयों (EOUs) द्वारा किए जाने वाले निर्यात शामिल हैं।
  • परिशिष्ट 4R और परिशिष्ट 4RE के तहत 30 सितंबर 2026 को लागू मौजूदा RoDTEP दरें और मूल्य सीमा बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।
  • विस्तारित अवधि के दौरान योजना को नियंत्रित करने वाले अन्य नियम एवं शर्तें भी अपरिवर्तित रहेंगी।

निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की छूट  (RoDTEP) के बारे में

  • शुरुआत: 1 जनवरी 2021
  • उद्देश्य: निर्यातित उत्पादों में शामिल प्रतिपूर्ति न किए गए केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों, करों एवं उपकरों की छूट देना, जिसमें पूर्ववर्ती चरणों में संचित अप्रत्यक्ष कर भी शामिल हैं।
  • यह उन करों एवं शुल्कों को संबोधित करती है, जिनकी अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से वापसी या प्रतिपूर्ति नहीं होती, ताकि घरेलू कर निर्यात कीमतों में अंतर्निहित न रह जाएँ।
  • इसका लाभ सामान्यतः निर्यात मूल्य के एक अधिसूचित प्रतिशत के रूप में दिया जाता है, जो उत्पाद-विशिष्ट मूल्य सीमा (Value Caps) के अधीन होता है। कुछ उत्पादों के लिए प्रति इकाई एक निश्चित राशि भी लागू हो सकती है।
  • वर्तमान में अधिसूचित छूट की दरें उत्पाद के आधार पर 0.3% से 3.9% तक हो सकती हैं।
  • लाभ हस्तांतरणीय इलेक्ट्रॉनिक शुल्क क्रेडिट स्क्रिप (ई-स्क्रिप) के माध्यम से प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें ICEGATE प्लेटफॉर्म पर बनाए रखा जाता है।
  • इन ई-स्क्रिप का उपयोग मूल सीमा शुल्क के भुगतान के लिए किया जा सकता है और इन्हें हस्तांतरित भी किया जा सकता है।
  • यह योजना वार्षिक बजटीय ढाँचे के अंतर्गत संचालित होती है, जिसमें दरों और लाभों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।
  • इसका उद्देश्य निर्यात कीमतों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करके अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

आसियान-भारत समुद्री अभ्यास (AIME-2026)

संदर्भ: आसियान-भारत समुद्री अभ्यास (AIME-2026) का दूसरा संस्करण 28 सितंबर 2026 को फिलीपींस के सुबिक बे में शुरू हुआ। इसमें भारत और आसियान देशों की समुद्री सेनाओं ने भाग लिया।

आसियान-भारत समुद्री अभ्यास 2026 के बारे में

  • AIME-2026 आसियान-भारत समुद्री अभ्यास का दूसरा संस्करण है। इसका आयोजन “विश्वास में निहित, समुद्र में एकजुट” (Anchored in Trust, United at Sea) विषय के तहत किया गया।
  • पहला संस्करण: AIME-2023 का आयोजन मई 2023 में सिंगापुर में किया गया था।
  • इस अभ्यास की सह-मेजबानी भारतीय नौसेना और फिलीपींस नौसेना द्वारा की जा रही है। इसमें INS सह्याद्रि और INS कुलिश के साथ आसियान सदस्य देशों की समुद्री सेनाएँ भाग ले रही हैं।
    • बंदरगाह चरण (Harbour Phase): इसमेंविषय विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान, परिचालन समन्वय, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ और सामुदायिक सहभागिता शामिल हैं। विचार-विमर्श के प्रमुख क्षेत्रों मेंमानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), समुद्री क्षेत्र जागरूकता, लॉजिस्टिक्स तथा महिला, शांति और सुरक्षा शामिल हैं।
    • समुद्री चरण (Sea Phase): इसमें परिचालन समन्वय और अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने के लिए समन्वित समुद्री अभ्यास किए जाते हैं। इनमें बोर्डिंग ऑपरेशन, हेलीकॉप्टर क्रॉस-डेक लैंडिंग और चिकित्सा निकासी शामिल हैं।
  • यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट नीति और MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) विजन का समर्थन करता है।

महत्व

  • समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करता है: भारत और आसियान की समुद्री सेनाओं के बीच पारस्परिक समझ तथा व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाता है।
  • अंतर-संचालनीयता में सुधार: संयुक्त प्रशिक्षण और समन्वित गतिविधियाँ भाग लेने वाली सेनाओं की एक साथ प्रभावी ढंग से संचालन करने की क्षमता को मजबूत करती हैं।
  • समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है: समुद्री क्षेत्र जागरूकता और समन्वित समुद्री अभियानों जैसे क्षेत्रों में सहयोग एक सुरक्षित समुद्री वातावरण को बढ़ावा देता है।
  • क्षेत्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाता है: आसियान के साथ भारत के रणनीतिक जुड़ाव तथा व्यापक हिंद-प्रशांत समुद्री पहुंच को बेहतर बनाता है।
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