भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भूमिका
संदर्भ: हाल ही में, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने वैश्विक मानवीय अभियानों के लिए चावल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम वैश्विक भुखमरी उन्मूलन की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस समझौता ज्ञापन के तहत, FCI विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को 200,000 मीट्रिक टन चावल (25% तक टूटा हुआ) की आपूर्ति करेगा।
- यह समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा और आपसी सहमति से इसे बढ़ाया जा सकता है।
- मूल्य का निर्धारण वार्षिक आधार पर आपसी सहमति से किया जाएगा, वर्तमान मूल्य 31 मार्च 2026 तक ₹2,800 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
- यह समझौता किसी को भी भूखा न रहने देने के भारत के संकल्प को प्रदर्शित करता है।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बारे में
- भारतीय खाद्य निगम (FCI) एक प्रमुख वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना खाद्य निगम अधिनियम 1964 के तहत 14 जनवरी 1965 को की गई थी।
- यह उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
- FCI खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद, भंडारण और वितरण के लिए जिम्मेदार है। यह मिशन समता, पहुंच और समावेशिता के मूल मूल्यों को दर्शाता है क्योंकि हम सभी नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण भोजन प्रदान करने का प्रयास करते हैं।
- भारतीय खाद्य निगम (FCI) का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के बारे में
- विश्व खाद्य कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन है जो आपात स्थितियों में जीवन बचाता है और संघर्ष, आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से उबरने वाले लोगों के लिए शांति, स्थिरता और समृद्धि का मार्ग बनाने के लिए खाद्य सहायता का उपयोग करता है।
- WFP की स्थापना 1961 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (प्रस्ताव 1714) और खाद्य एवं कृषि संगठन (प्रस्ताव 1/61) के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में की गई थी।
- इसका मुख्यालय रोम, इटली में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के भीतर स्थित है।
- WFP को भूख से लड़ने और शांति के लिए स्थितियों में सुधार करने के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार (2020) प्राप्त हुआ।
इंडिया ग्रिड्स ऑफ द फ्यूचर एक्सेलेरेटर
संदर्भ: हाल ही मे, ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (GEAPP) ने मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में ‘इंडिया ग्रिड्स ऑफ द फ्यूचर एक्सेलेरेटर’ लॉन्च किया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- अलायंस की योजना 2028 तक 25 मिलियन डॉलर निवेश करने की है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक और निजी निवेश के माध्यम से 2030 तक 100 मिलियन डॉलर जुटाना है।
- यह फंडिंग बिजली वितरण प्रणालियों के आधुनिकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण (स्टोरेज) को एकीकृत करने के साथ-साथ बढ़ती मांग के लिए भारत के ग्रिड को तैयार करेगी।
- इस प्लेटफॉर्म को ‘ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ (ISA) द्वारा समर्थन प्राप्त है।
- दिल्ली और राजस्थान की वितरण कंपनियों को इस पहल के तहत “चैंपियन यूटिलिटीज” के पहले समूह के रूप में नामित किया गया है।
- इस कार्यक्रम में ENTICE 3.0 का भी शुभारंभ किया गया, जो ‘एनर्जी ट्रांजिशन इनोवेशन चैलेंज’ का नवीनतम संस्करण है।
- 3.0 संस्करण मुख्य रूप से ऊर्जा भंडारण, ग्रिड डिजिटलीकरण और गैर-लिथियम भंडारण समाधानों पर केंद्रित है ताकि त्वरित योजना और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण में सहायता मिल सके।
इंडिया ग्रिड्स ऑफ द फ्यूचर एक्सेलेरेटर की प्रमुख विशेषताएं
- यह पहल एक संरचित D4 फ्रेमवर्क के माध्यम से भारत के ग्रिड को बदलने का प्रयास करती है:
- यह फ्रेमवर्क डिजिटल ट्विन्स और उन्नत एनालिटिक्स के माध्यम से उपयोगिताओं के डिजिटलीकरण (D1) को बढ़ावा देता है।
- यह फ्रेमवर्क नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण सहित विकेंद्रीकृत ऊर्जा संसाधनों (D2) के स्मार्ट एकीकरण को सक्षम बनाता है।
- यह फ्रेमवर्क उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रणाली में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाकर बिजली के लोकतंत्रीकरण (D3) को बढ़ावा देता है।
- यह फ्रेमवर्क भविष्य के लिए तैयार समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास (D4) को आगे बढ़ाता है।
- इस एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से, पहल का लक्ष्य 15 या अधिक उपयोगिताओं (Utilities) को सहायता प्रदान करना है, जिससे 2030 तक भारत भर में लगभग 300 मिलियन लोग सकारात्मक रूप से प्रभावित होंगे।
- प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी निवेश के द्वार खोलने के लिए 2026 से 2028 तक तीन साल के 100 मिलियन डॉलर के धन जुटाने के प्रयास की योजना बना रहा है।
ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (GEAPP) के बारे में
- ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (GEAPP) एक वैश्विक सहयोगी मंच है जिसे 2021 में COP26 में लॉन्च किया गया था।
- GEAPP विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नवीन हरित ऊर्जा समाधानों को विकसित और विस्तारित करके ऊर्जा गरीबी और जलवायु संकट से निपटने के लिए कार्य करता है।
- ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (GEAPP) का मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर में स्थित है।
भारत की AI कंप्यूट क्षमता
संदर्भ: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में घोषणा की कि भारत अपनी मौजूदा 38,000 GPUs की कंप्यूट क्षमता को 20,000 अतिरिक्त GPUs जोड़कर और बढ़ाएगा।
अन्य संबंधित जानकारी
- केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि प्राथमिकता उत्तरदायी AI के विकास और उसे स्वास्थ्य सेवा तथा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापक रूप से लागू करने पर है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।
- कई अन्य देशों के विपरीत, जहाँ AI अवसंरचना कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है, भारत ने अपनी बड़ी आबादी के लिए AI कंप्यूट संसाधनों को सुलभ बनाया है।
- इन संसाधनों का उपयोग करने के लिए भौतिक उपस्थिति आवश्यक नहीं है। स्टार्टअप, शोधकर्ता और विद्यार्थी ‘इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल’ के माध्यम से इस वितरित “सुपरक्लस्टर” का वर्चुअल रूप से लाभ उठाते हैं।
- ‘इंडियाएआई मिशन’ के अंतर्गत 38,000 से अधिक उच्च-क्षमता (हाई-एंड) GPUs ₹65 प्रति घंटे की रियायती दर पर उपलब्ध कराए गए हैं (जबकि बाजार दर ₹300–500 प्रति घंटा है), जिससे स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, छात्रों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए कंप्यूट संबंधी बाधाएँ काफी कम हुई हैं।
- 58,000 GPUs के लक्ष्य के साथ प्रस्तावित विस्तार भारत को वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 संप्रभु AI कंप्यूट देशों में स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) के बारे में
- ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है जिसे विभिन्न उपकरणों पर कंप्यूटर ग्राफिक्स और इमेज प्रोसेसिंग की गति बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन उपकरणों में वीडियो कार्ड, सिस्टम बोर्ड, मोबाइल फोन और पर्सनल कंप्यूटर (PCs) शामिल हैं।
- 1990 के दशक में GPU के आविष्कार से पहले, PCs और वीडियो गेम कंट्रोलर्स में ग्राफिक्स कंट्रोलर कार्यों को चलाने के लिए कंप्यूटर की सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट पर निर्भर थे।
- एक मानक प्रोसेसर (CPU) के विपरीत, जो जटिल कार्यों को एक-एक करके संभालता है, GPU पैरेलल प्रोसेसिंग के लिए बनाया गया है, जिसका अर्थ है कि यह एक ही समय में हजारों सरल और दोहराव वाली गणनाएं कर सकता है।
- AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और जटिल डेटासेट को संभालने के लिए GPUs अनिवार्य हैं, और ये भारत की डिजिटल विकास रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ हैं।
भाषिणी (BHASHINI)
संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नई दिल्ली में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में एक ओपन-सोर्स, एंड-टू-एंड वॉयस एआई स्टैक, VoicERA लॉन्च किया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इसका शुभारंभ डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन द्वारा एकस्टेप फाउंडेशन (EkStep Foundation) के नेतृत्व में, COSS, IIIT बेंगलुरु और AI4Bharat के सहयोग से किया गया।
- इस प्लेटफॉर्म को बहुभाषी वॉयस और लैंग्वेज एआई हेतु एक राष्ट्रीय निष्पादन परत के रूप में भाषिणी राष्ट्रीय भाषा अवसंरचना पर क्रियान्वित किया गया।
VoicERA और इसकी संरचना के बारे में

- इस प्लेटफॉर्म को एक ओपन-सोर्स, एंड-टू-एंड वॉयस एआई स्टैक के रूप में डिज़ाइन किया गया है जो खुला (Open), प्लगेबल (Pluggable), इंटरऑपरेबल, क्लाउड-डिप्लॉयबल और ऑन-प्रिमाइसेस के लिए तैयार है।
- इसकी संरचना वॉयस स्टैक को मॉड्यूलराइज करती है और प्रयासों की पुनरावृत्ति को कम करती है, साथ ही वेंडर लॉक-इन की समस्या को समाप्त करती है।
- यह प्रणाली सरकारी विभागों, अनुसंधान संस्थानों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों में वॉयस सिस्टम की सुरक्षित और स्केलेबल तैनाती को सक्षम बनाती है।
- यह एकीकरण ‘भाषिणी’ का विस्तार अनुवाद और भाषा उपकरणों से आगे बढ़ाकर रियल-टाइम स्पीच सिस्टम, कन्वर्सेशनल एआई और जनसंख्या स्तर पर बहुभाषी टेलीफोनी तक करता है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के लिए महत्व
- यह पहल नागरिक सेवाओं के लिए आवाज़ (वॉयस) को एक सहज माध्यम बनाकर भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को सशक्त बनाती है।
- यह ढांचा विभागों को कृषि परामर्श, शिक्षा सहायता, आजीविका सेवा, शिकायत निवारण, नागरिक फीडबैक और योजनाओं की खोज जैसी वॉयस-सक्षम सेवाओं को अपनाने में सक्षम बनाता है।
- यह प्लेटफॉर्म इंटरऑपरेबल और सुरक्षित एआई सिस्टम का समर्थन करता है जो विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं तक समावेशी पहुंच को बढ़ाता है।
