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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नवीनतम अपडेट के अनुसार, विश्व ने संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। अब वैश्विक महासागर का 10.01% हिस्सा आधिकारिक तौर पर संरक्षित (protected and conserved areas) के रूप में नामित किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
• यह 2024 के 8.6% से बढ़कर 10.01% हो गया है, जिसका अर्थ है कि मात्र दो वर्षों में लगभग 50 लाख वर्ग किमी समुद्री क्षेत्र को संरक्षण नेटवर्क में जोड़ा गया है।
• हालांकि, यह उपलब्धि आइची जैव विविधता लक्ष्यों के तहत निर्धारित मूल लक्ष्य से छह साल की देरी से प्राप्त हुई है, जहाँ देशों ने 2020 तक 10% महासागर को संरक्षित करने पर सहमति व्यक्त की थी।
• यह उपलब्धि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के तहत व्यापक वैश्विक लक्ष्य से संबद्ध है, जो 2030 तक 30% भूमि और समुद्र की रक्षा करने का आह्वान करता है (“30×30 लक्ष्य”)।
नवीनतम अपडेट के मुख्य बिंदु
• वैश्विक समुद्री संरक्षण ने पहली बार 10% की सीमा को पार कर लिया है, जो समुद्री संरक्षण के प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रगति है।

• पिछले दो वर्षों में संरक्षित क्षेत्रों में हुई वृद्धि काफी व्यापक है, जिसने यूरोपीय संघ से भी बड़े क्षेत्र को कवर किया है। यह त्वरित प्रगति को तो दर्शाता है, किंतु अभी भी यह अपर्याप्त है।
• हालांकि, प्रभावी संरक्षण अभी भी सीमित है, क्योंकि इन क्षेत्रों का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही पूर्णतः या सख्ती से संरक्षित है। यह समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) की गुणवत्ता और उनके प्रवर्तन संबंधी चिंताएँ उत्पन्न करता है।
• यह प्रगति अत्यधिक असमान है; अधिकांश उपलब्धियाँ राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार के भीतर केंद्रित हैं, जबकि राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों (उच्च सागर/खुले सागर) में संरक्षण अभी भी न्यूनतम बना हुआ है।
• 2030 तक 30×30 लक्ष्य को पूरा करने के लिए, वैश्विक समुद्री संरक्षण का विस्तार व्यापक रूप से होना चाहिए—लगभग हिंद महासागर के बराबर क्षेत्र को इसके दायरे में लाना होगा। यह आवश्यक प्रयासों के विशाल पैमाने को रेखांकित करता है।
महासागर संरक्षण का महत्व
• पारिस्थितिक महत्व: महासागर अत्यधिक जैव विविधता के केंद्र हैं, जिनमें प्रवाल भित्तियाँ, गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र और प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।
• जलवायु विनियमन: समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रमुख कार्बन सिंक (ब्लू कार्बन) के रूप में कार्य करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं।
• आर्थिक मूल्य: महासागर मत्स्य पालन, पर्यटन और करोड़ों लोगों की आजीविका का समर्थन करते हैं, जो वैश्विक नीली अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख स्तंभ का निर्माण करते हैं।
• आपदा लचीलापन: स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जैसे कि मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री तूफानों और तटीय कटाव के विरुद्ध प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
• 30×30 लक्ष्य के बीच अंतराल: लगभग 10% संरक्षण तक पहुँचने के बावजूद, वर्तमान गति अत्यंत धीमी है। 2030 तक 30% का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सुप्रबंधित समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) के तीव्र और बड़े पैमाने पर विस्तार की आवश्यकता होगी।
• “पेपर पार्क्स” की समस्या: कई समुद्री संरक्षित क्षेत्रों में प्रभावी प्रवर्तन और निगरानी का अभाव है। ये क्षेत्र केवल कागजों पर अस्तित्व में हैं और हानिकारक गतिविधियों को रोकने में विफल रहते हैं, जिससे वास्तविक संरक्षण प्रभाव सीमित हो जाता है।
• सीमित ‘उच्च सागर’ शासन: कमजोर कानूनी ढांचे और समन्वय की चुनौतियों के कारण राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में संरक्षण अभी भी न्यूनतम है, जो वैश्विक प्रभावशीलता को कम करता है।
• वित्तपोषण और क्षमता की कमी: विकासशील देशों को अक्सर वित्तीय और तकनीकी सीमाओं का सामना करना पड़ता है, जो संरक्षित क्षेत्रों के उचित प्रबंधन, निगरानी और प्रवर्तन में बाधा उत्पन्न करते हैं।
• हितों का टकराव: संरक्षण के प्रयास अक्सर मछली पकड़ने, शिपिंग और खनन जैसी आर्थिक गतिविधियों के साथ टकराते हैं, जिससे नीतिगत समझौता (trade-offs) करना पड़ता है और कार्यान्वयन की गति धीमी हो जाती है।
वैश्विक पहल और समझौते
• कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (2022): यह “30×30 लक्ष्य” निर्धारित करता है, जो देशों को 2030 तक वैश्विक भूमि और महासागरों के 30% हिस्से की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध करता है। यह जैव विविधता संरक्षण के लिए केंद्रीय मार्गदर्शक ढांचे के रूप में कार्य करता है।
• BBNJ समझौता (उच्च सागर संधि): यह राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह ‘उच्च सागर’ के शासन में मौजूद अंतराल को दूर करने का प्रयास है।
• संरक्षित ग्रह पहल (Protected Planet Initiative): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के नेतृत्व में, यह पहल संरक्षित क्षेत्रों पर वैश्विक प्रगति की निगरानी करती है और डेटा-आधारित संरक्षण योजना का समर्थन करती है।
• संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 14 (जल के नीचे जीवन): इसका उद्देश्य महासागरों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, जो वैश्विक प्रयासों को व्यापक सतत विकास उद्देश्यों के साथ जोड़ता है।
SOURCES
Down To Earth
Oceangraphi
IUCN
