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सामान्य अध्ययन-3: सीमावती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

संदर्भ: वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (GTI) 2026 ने वर्ष 2025 में आतंकवाद में आई वैश्विक गिरावट को उजागर किया, तथापि उभरते संघर्षों और क्षेत्रीय अस्थिरता से भविष्य में इसके पुनरुत्थान का जोखिम उत्पन्न होता है।

रिपोर्ट के बारे में

• ‘इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस’ (IEP) द्वारा प्रकाशित वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 163 देशों में आतंकवाद के प्रभाव का विश्लेषण करने वाला एक व्यापक अध्ययन है, जो विश्व की 99.7% जनसंख्या को कवर करता है।

• यह रिपोर्ट वर्ष 2007 से दर्ज की गई 66,000 से अधिक आतंकवादी घटनाओं के डेटाबेस पर आधारित है और आतंकवाद की दीर्घकालिक वैश्विक प्रवृत्तियों एवं पैटर्न पर अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

• GTI स्कोर की गणना चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर की जाती है:

  • आतंकवादी घटनाओं की संख्या
  • हताहतों (मृतकों) की संख्या
  • घायलों की संख्या
  • बंधकों की संख्या

• प्रत्येक संकेतक को भारांक दिया जाता है और पांच वर्ष की अवधि में उनका औसत निकाला जाता है, जिससे यह सूचकांक आतंकवाद के तत्काल और दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रभावों को स्पष्ट कर सकता है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

वैश्विक रुझान:

• आतंकवाद से संबंधित मौतों में 28% की गिरावट दर्ज की गई, और इनकी संख्या 5,582 रह गई, जबकि आतंकवादी घटनाओं में 22% की कमी आई और यह 2,944 के स्तर पर पहुँच गई, जो 2007 के बाद का निम्नतम स्तर है।

• 81 देशों की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया, जबकि केवल 19 देशों की स्थिति में गिरावट आई, जो इस सूचकांक के इतिहास में गिरावट दर्ज करने वाले देशों की सबसे कम संख्या है।

• इस सुधार के बावजूद, आतंकवाद एक महत्वपूर्ण वैश्विक खतरा बना हुआ है, और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण भविष्य के जोखिम बढ़ रहे हैं।

क्षेत्रीय संकेंद्रण और केंद्र का स्थानांतरण:

• आतंकवाद अभी भी अत्यधिक संकेंद्रित है, क्योंकि लगभग 70% मौतें केवल पाँच देशों पाकिस्तान, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर और लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में हुई हैं।

• उप-सहारा अफ्रीका, विशेष रूप से साहेल क्षेत्र, आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बना हुआ है, जहाँ वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से होने वाली कुल मौतों की  आधे से अधिक मौतें होती हैं।

• समय के साथ, आतंकवाद का केंद्र मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) से स्थानांतरित होकर साहेल क्षेत्र बन गया है।

सर्वाधिक प्रभावित देश के रूप में पाकिस्तान:

• बुर्किना फासो को प्रतिस्थापित करते हुए पाकिस्तान विश्व का सर्वाधिक आतंकवाद प्रभावित देश बन गया है। यहाँ 1,139 मौतें और 1,045 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जो 2013 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह लगातार छठा वर्ष है जब पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों में वृद्धि देखी गई है।

• इसके प्रमुख चालकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का पुनरुत्थान, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की गतिविधियाँ और 2021 में तालिबान की वापसी के बाद अफगानिस्तान सीमा पर हुई अस्थिरता शामिल है।

भारत:

• भारत ‘वैश्विक आतंकवाद सूचकांक’ (GTI) 2026 में 6.428 के स्कोर के साथ 13वें स्थान पर रहा, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में दो स्थानों का सुधार हुआ है। भारत में आतंकवाद से संबंधित मौतों में गिरावट और आतंकवादी घटनाओं में लगभग 43% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

• वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के कारण होने वाली कुल मौतों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 2% रही।

अन्य देशों का प्रदर्शन:

• नाइजीरिया और लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में आतंकवाद से संबंधित मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

• बुर्किना फासो, जो पहले सबसे अधिक प्रभावित देश था, वहाँ मौतों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट (45%) देखी गई।

आतंकवादी संगठन:

• इस्लामिक स्टेट (IS) और उसके सहयोगी संगठन सबसे घातक आतंकवादी समूह बने हुए हैं, जो वैश्विक स्तर पर होने वाले लगभग 17% हमलों के लिए उत्तरदायी हैं।

• चार सबसे घातक समूह — IS, JNIM, TTP और अल-शबाब की सामूहिक रूप से वैश्विक आतंकवाद से होने वाली मौतों में 70% हिस्सेदारी है।

• इन समूहों में, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) एकमात्र ऐसा समूह था जिसके द्वारा हुई मौतों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

पश्चिम में उभरती चिंताएँ:

• पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 280% की वृद्धि हुई है, यद्यपि इनकी कुल संख्या अभी भी कम है।

• इस वृद्धि के मुख्य कारकों में राजनैतिक अतिवाद, यहूदी-विरोध और वैचारिक हिंसा शामिल हैं। साथ ही, ‘लोन-वोल्फ’ (lone-wolf) हमलों में भी वृद्धि हुई है, जो घातक हमलों के 93% हिस्से के लिए उत्तरदायी थे।

युवा कट्टरपंथ:

• युवा कट्टरपंथ एक प्रमुख वैश्विक खतरे के रूप में उभरा है।

• यूरोप और उत्तरी अमेरिका में आतंकवाद से जुड़ी लगभग 42% जाँचों में नाबालिग शामिल हैं, और ऑनलाइन दुष्प्रचार के कारण कट्टरपंथ की समय-सीमा घटकर अब केवल कुछ हफ्तों तक रह गई है।

• इसके कारणों में क्षेत्रवार भिन्नता है; जहाँ पश्चिमी देशों में सामाजिक अलगाव और विमुखता इसके मुख्य कारक हैं, वहीं उप-सहारा अफ्रीका में मानवाधिकारों का उल्लंघन और रोजगार का अभाव प्रमुख कारण हैं।

सीमावर्ती आतंकवाद:

• आतंकवाद तेजी से सीमाओं के निकट केंद्रित हो रहा है, जहाँ 41% हमले सीमा से 50 किमी के भीतर और 64% हमले 100 किमी के भीतर होते हैं।

• कमजोर शासन प्रणाली और कुप्रबंधित सीमा-पार समन्वय के कारण सीमावर्ती क्षेत्र ‘सुरक्षा शून्यता’ वाले क्षेत्रों के रूप में कार्य करते हैं।

• प्रमुख हॉटस्पॉट में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र, साहेल का त्रि-सीमा क्षेत्र और लेक चाड बेसिन प्रमुख हैं।

उभरते जोखिम और भविष्य का दृष्टिकोण:

• रिपोर्ट चेतावनी देती है कि वर्तमान सुधार अस्थायी हो सकते हैं, जिसका कारण मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में बढ़ते वैश्विक संघर्ष, ईरान में संभावित अस्थिरता और आतंकवादी नेटवर्क का विस्तार है।

• जारी संघर्षों के कारण जनसंख्या का विस्थापन हो सकता है, जिससे सीमा नियंत्रण कमजोर होगा और आतंकवाद के पुनरुत्थान के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनेंगी।

Sources:
New India Express
IEP
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