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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र / सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: विश्व क्षय रोग दिवस प्रतिवर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इस वैश्विक महामारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके उन्मूलन के प्रयासों को गति देना है।
विश्व क्षय रोग दिवस के बारे में

- विश्व क्षय रोग दिवस वर्ष 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ की खोज की स्मृति में मनाया जाता है। यह एक ऐसी क्रांतिकारी खोज थी जिसने क्षय रोग के निदान और उपचार को संभव बनाया।
- वर्ष 2026 का विषय: वर्ष 2026 के लिए इस दिवस का विषय “हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं”। यह विषय तात्कालिकता और आशावाद दोनों को दर्शाता है। यह इस बात पर बल देता है कि सुदृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता, नवाचार और सामूहिक कार्यवाही के माध्यम से टीबी की महामारी को समाप्त करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
- यह दिन टीबी के कारण अपनी जान गँवाने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि है, स्वास्थ्य कर्मियों और हितधारकों के प्रयासों को मान्यता प्रदान करता है, और इस बीमारी से लड़ने के लिए वैश्विक एकजुटता का आह्वान करता है।
विश्व क्षय रोग दिवस का महत्व
- क्षय रोग रोकथाम योग्य और उपचार योग्य होने के बावजूद, विश्व स्तर पर सबसे घातक संक्रामक रोगों में से एक बना हुआ है।
- वर्ष 2024 में लगभग 1.07 मिलियन लोग टीबी से ग्रसित हुए और 1.23 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई।
- प्रतिदिन लगभग 3,500 मौतें होती हैं, जो इसके निरंतर बने रहने वाले बोझ को रेखांकित करती हैं।
- वर्ष 2000 से अब तक लगभग 83 मिलियन लोगों का जीवन बचाया जा चुका है, जो इस दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है।
- इस दिवस को मनाने के लक्ष्य:
- प्रसार को कम करने के लिए शीघ्र निदान और उपचार को बढ़ावा देना।
- लक्षणों, रोकथाम और सामाजिक धारणा के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- दवा-प्रतिरोधी टीबी (MDR/XDR-TB) जैसी चुनौतियों को उजागर करना।
- गरीबी, अल्पपोषण और असमानता के साथ इसके संबंधों को संबोधित करना।
- वैश्विक सहयोग और निवेश को प्रोत्साहित करना।
क्षय रोग के बारे में

- क्षय रोग एक जीवाणुजन्य संक्रामक रोग है जो ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ के कारण होता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है (पल्मोनरी टीबी), लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों जैसे मस्तिष्क, गुर्दे और रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित कर सकता है।
- टीबी हवा के माध्यम से तब फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खाँसता, छींकता या बोलता है।
- यह दो रूपों में विद्यमान है: सुप्त टीबी (Latent TB) (कोई लक्षण नहीं, संक्रामक नहीं) और सक्रिय टीबी (Active TB) (लक्षण दिखाई देते हैं, संक्रामक)।
- क्षय रोग के प्रकार:
- पल्मोनरी टीबी: फेफड़ों को प्रभावित करता है; यह सबसे सामान्य और संक्रामक रूप है।
- एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी: अन्य अंगों जैसे लसीका ग्रंथियों, मस्तिष्क, गुर्दे या रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है।
- मिलिअरी टीबी: एक गंभीर रूप जिसमें टीबी रक्तप्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाती है।
- दवा–प्रतिरोधी टीबी:
- MDR-TB (मल्टी ड्रग– रेसिस्टेंट टीबी): प्रथम श्रेणी (First-line) की दवाओं जैसे रिफैम्पिसिन और आइसोनियाज़िड के प्रति प्रतिरोधी।
- XDR-TB (एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी): अधिक उन्नत दवाओं के प्रति प्रतिरोधी, जिससे उपचार अत्यंत कठिन हो जाता है।
- लक्षण: टीबी के सामान्य लक्षणों में निरंतर बनी रहने वाली पुरानी खाँसी (कभी-कभी रक्त के साथ), रात में पसीने के साथ ज्वर, अचानक वजन कम होना, अत्यधिक थकान और सीने में दर्द शामिल हैं।
- जोखिम कारक: इसमें कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (जैसे HIV), अल्पपोषण और मधुमेह, तंबाकू एवं शराब का सेवन, तथा अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली रहने की स्थितियाँ प्रमुख हैं।
- बचाव और निदान: बच्चों को टीबी के गंभीर रूपों से बचाने के लिए बी.सी.जी. (BCG) टीकाकरण, त्वरित आणविक परीक्षणों के माध्यम से शीघ्र पहचान, त्वचा परीक्षण (TST) और IGRA, तथा उच्च जोखिम वाली आबादी की अनिवार्य स्क्रीनिंग शामिल है।
- उपचार: क्षय रोग (टीबी) 4-6 महीने (या अधिक) तक ली जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं से पूरी तरह उपचार योग्य है, जिसमें सामान्यतः रिफैम्पिसिन, आइसोनियाज़िड, पायrazिनामाइड और इथाम्बुटोल शामिल हैं; दवा प्रतिरोध को रोकने के लिए दवाओं का सख्ती से पालन (अनिवार्य है।
क्षय रोग के उन्मूलन के लिए प्रमुख पहल
- राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP): वर्ष 2020 में, भारत सरकार ने ‘संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (RNTCP) का नाम बदलकर ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ (NTEP) कर दिया। इसका लक्ष्य वैश्विक समय सीमा (2030) से पाँच वर्ष पूर्व, अर्थात् 2025 तक टीबी का उन्मूलन करना है। यह कार्यक्रम ‘खोजें–उपचार करें–रोकें–निर्माण करें’ (Detect–Treat–Prevent–Build) की रणनीति पर आधारित है।
- प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (PMTBMBA): यह एक सामुदायिक पहल है जो जन-भागीदारी और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से टीबी रोगियों को पोषण संबंधी, नैदानिक और सामाजिक सहायता प्रदान करती है।
- नि-क्षय पोषण योजना (NPY, 2018): यह एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना है, जिसके अंतर्गत टीबी रोगियों को उपचार के दौरान पोषण सहायता हेतु ₹1000 प्रति माह (संशोधित राशि के अनुसार) प्रदान किए जाते हैं।
- नि-क्षय मित्र पहल: यह एक ऐसा कार्यक्रम है जो व्यक्तियों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और कॉर्पोरेट घरानों को टीबी रोगियों को ‘गोद लेने’ और कम से कम छह महीने तक सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- नि-क्षय पोर्टल: यह एक वेब-आधारित रोगी प्रबंधन और निगरानी प्रणाली है, जिसका उपयोग टीबी के मामलों के रियल टाइम पंजीकरण, ट्रैकिंग और निगरानी के लिए किया जाता है।
