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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।

संदर्भ: ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड माइग्रेटरी स्पीशीज’ रिपोर्ट के नए अंतरिम आँकड़ों ने चेतावनी दी है कि ‘प्रवासी वन्यजीवों की प्रजातियों के संरक्षण पर सम्मेलन’ (CMS) के तहत संरक्षित 49% प्रवासी वन्यजीव आबादी में गिरावट आ रही है, और वैश्विक स्तर पर 24% प्रजातियाँ अब विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं।

रिपोर्ट के बारे में:

  • यह अंतरिम रिपोर्ट 2024 की ऐतिहासिक ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड् माइग्रेटरी स्पीशीज’ रिपोर्ट का अद्यतन रूप है, जो प्रवासी वन्यजीवों का पहला व्यापक वैश्विक मूल्यांकन था।
  • यह CMS के तहत सूचीबद्ध 1,189 प्रजातियों की प्रवृत्तियों का मूल्यांकन करती है। इसके लिए मुख्य रूप से IUCN रेड लिस्ट, वैज्ञानिक साहित्य और अद्यतन आबादी मूल्यांकनों के डेटा का उपयोग किया गया है।
  • इस विश्लेषण में उन 386 CMS-सूचीबद्ध प्रजातियों की समीक्षा की गई है जिनका पिछले मूल्यांकन के बाद पुनर्मूल्यांकन किया गया था।
  • इन निष्कर्षों को ब्राजील के कैम्पो ग्रांडे में (23-29 मार्च को) आयोजित होने वाले CMS COP15 में प्रस्तुत किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

  • प्रवासी प्रजातियों की आबादी में भारी गिरावट: CMS-सूचीबद्ध 49% प्रजातियों (लगभग 582–592 प्रजातियाँ) की आबादी में गिरावट देखी गई है।
    • यह 2024 की रिपोर्ट 44% की तुलना में दो वर्षों के भीतर आबादी गिरावट में 5% की वृद्धि दर्शाता है।
    • वर्तमान में केवल 38% प्रजातियों की आबादी स्थिर या बढ़ती हुई है, जो पहले 43% थी।
  • विलुप्ति का बढ़ता जोखिम: CMS-सूचीबद्ध 24% प्रजातियाँ (284 प्रजातियाँ) अब IUCN रेड लिस्ट के तहत वैश्विक स्तर पर ‘खतरे में’ के रूप में वर्गीकृत हैं।
    • यह पूर्व के आकलन में 22% वृद्धि का संकेत है।
    • पुनर्मूल्यांकन की गई 386 प्रजातियों में से, 26 प्रजातियाँ अधिक खतरे वाली श्रेणी में आ गई हैं और 7 कम खतरे वाली श्रेणी में आ गई हैं।
  • संकट में प्रवासी तटवर्ती पक्षी: जिन 26 प्रजातियों को विलुप्ति के उच्च जोखिम वाली श्रेणी (higher extinction risk category) में स्थानांतरित किया गया है, उनमें से 18 प्रवासी तटवर्ती पक्षी हैं।
    • इनमें से कई प्रजातियों की आबादी में 1988 के बाद से दीर्घकालिक गिरावट देखी गई है।
    • ‘ईस्ट एशियन–ऑस्ट्रलैशियन फ्लाईवे’, ‘ईस्ट अटलांटिक फ्लाईवे’ और भारत के तटीय स्थलों जैसे प्रमुख प्रवासी मार्गों पर इनकी संख्या में महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई है।
  • उभरता हुआ रोग खतरा (H5N1): अत्यधिक संक्रामक एवियन इन्फ्लूएंजा (HPAI) H5N1 दुनिया भर में प्रवासी वन्यजीवों के लिए एक प्रमुख खतरे के रूप में उभरा है।
    • इस वायरस ने कई महाद्वीपों में सामूहिक मृत्यु की घटनाओं को जन्म दिया है, जिससे पक्षी और समुद्री स्तनधारी दोनों प्रभावित हुए हैं।
    • कई प्रवासी पक्षी प्रजातियां जैसे अफ्रीकी पेंगुइन, हम्बोल्ट पेंगुइन, पेरूवियन पेलिकन, डालमेटियन पेलिकन, हुडेड क्रेन और रेड-क्राउन्ड क्रेन गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं, जबकि दक्षिण अमेरिकी सी लायन (समुद्री शेर) और दक्षिण अमेरिकी फर सील जैसे समुद्री स्तनधारी भी इससे प्रभावित हुए हैं।
    • लंबी आयु वाली प्रवासी प्रजातियां विशेष रूप से सुभेद्य  हैं, क्योंकि मृत्यु दर में मामूली वृद्धि भी उनकी पहले से ही कमजोर आबादी में काफी कम कर सकती है।
  • गिरावट के प्रमुख चालक: यह रिपोर्ट प्रवासी वन्यजीवों को प्रभावित करने वाले कई प्रमुख दबावों की पहचान करती है:
  • अति-दोहन : निरंतर शिकार, मछली पकड़ना और कटाई एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
    • आवास का नुकसान और विखंडन: आर्द्रभूमि, तटीय क्षेत्रों, घास के मैदानों और जंगलों का अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग से महत्वपूर्ण आवासों में कमी आ रही है।
    • बुनियादी ढांचे का विस्तार: सड़कें, रेलवे, बाड़  और पाइपलाइन प्रवास मार्गों को बाधित करते हैं।
      • उदाहरण: बढ़ते बुनियादी ढांचे और यातायात के कारण 2002 और 2021 के बीच मंगोलियाई गज़ेल की गतिशीलता में नाटकीय गिरावट आई है।
    • जलवायु परिवर्तन : प्रजनन की परिवर्तित स्थितियाँ, बदलते प्रवास मार्ग और स्थानांतरित होते आवास प्रजातियों के अस्तित्व को प्रभावित करते हैं।
    • समुद्री प्रजातियों पर मत्स्य पालन का दबाव: अत्यधिक मछली पकड़ना और ‘बायकैच’ प्रवासी शार्क और रे  के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं, विशेष रूप से उत्तरी हिंद महासागर, भारत-पश्चिम प्रशांत, भूमध्य सागर और उष्णकटिबंधीय अटलांटिक में।
    • तटीय फ्लाईवे में आवास क्षरण: प्रवास के दौरान रुकने वाले स्थानों और गैर-प्रजनन आवासों के नुकसान से वैश्विक स्तर पर प्रवासी तटवर्ती पक्षी खतरे में हैं।
  • संरक्षण की सफलता की गाथा (सकारात्मक पहलू): व्यापक गिरावट के बावजूद, कुछ प्रजातियों में संरक्षण प्रयासों के कारण सुधार देखा गया है:
    • सैगा मृग (Saiga Antelope): कजाकिस्तान में इनकी आबादी बढ़ी है, जिससे इन्हें ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) से ‘निकट संकटग्रस्त’ (Near Threatened) श्रेणी में रखा गया है।
    • सिमिटर-हॉर्नड ओरिक्स (Scimitar-horned Oryx): चाड में इन्हें फिर से जंगल में छोड़ा गया और ये ‘वन- विलुप्त’ श्रेणी से बाहर हो गए हैं।
    • भूमध्यसागरीय मोंक सील: इनकी स्थिति में भी सुधार हुआ है और यह लुप्तप्राय से सुभेद्य स्थिति में आ गई है।
    • कुल मिलाकर, सात CMS-सूचीबद्ध प्रजातियों की संरक्षण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है।
  • प्रवासी प्रजातियों का पारिस्थितिक महत्व: प्रवासी प्रजातियाँ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    • ये प्रजातियाँ परागण (Pollination), पोषक तत्वों के परिवहन, कीट नियंत्रण और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    • कई प्रवासी जानवर कार्बन भंडारण (Carbon Storage) में भी योगदान देते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन को बढ़ाते हैं।
    • इनकी निरंतर गिरावट पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और उन समुदायों की आजीविका के लिए खतरा है जो उन पर निर्भर हैं।

Sources :
Down to Earth
Indian Express

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