अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:

  • बैठक में उत्तर प्रदेश के पर्यटन विकास की समीक्षा की गई, मौजूदा चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया और पर्यटन को उत्तर प्रदेश की अर्थ शक्ति का स्तंभ बनाने की योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई।
  • प्रमुख चर्चाओं में से एक में उन्नाव के शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी अभयारण्य पर प्रकाश डाला गया, जिसने इस वर्ष 12 लाख से अधिक आगंतुकों को आकर्षित किया और एक प्रमुख प्रकृति गंतव्य के रूप में उभरा।
  • पर्यटकों की संख्या: सितंबर 2025 तक 120 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया, राज्य का अनुमान है कि वर्ष के अंत तक आगमन का यह आँकड़ा 130 करोड़ तक पहुँच जाएगा।

 उत्तर प्रदेश में पर्यटन से जुड़े मुद्दे

  • क्षेत्रीय एकाग्रता: लगभग 67% पर्यटकों ने सिर्फ पांच शहरों, अर्थात् अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज और आगरा का दौरा किया, जबकि मिर्जापुर, चित्रकूट और झांसी जैसे अन्य उल्लेखनीय स्थलों में केवल 10% लोग ही आए।
  • हालांकि घरेलू यात्रियों ने इस क्षेत्र को सशक्त करना जारी रखा है, विदेशी पर्यटकों का आगमन अभी भी पूर्व-महामारी के स्तर से नीचे है।
  • यहाँ तक कि लखनऊ, एक प्रमुख शहरी केंद्र और राज्य की राजधानी होने के बावजूद, कुल आगंतुकों का केवल 1.3% आकर्षित करता है, जो ब्रांडिंग और पोजिशनिंग गैप की ओर इशारा करता है।

विकसित भारत @2047 के लिए योजना:

इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की पहल

  • ‘बफर में सफर योजना: यहउत्तर प्रदेश वन और वन्यजीव विभाग द्वारा क्षेत्र में स्थायी पर्यटन तथा वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई।
    • यह लखीमपुर खीरी में भीरा और मोहम्मदी, सोहागीबरवा वन्यजीव अभयारण्य और सेमराई झील जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ दुधवा, पीलीभीत और उत्तर खीरी जैसे प्रमुख बाघ अभयारण्यों के बफर जोन के भीतर सफारी मार्ग विकसित करने पर केंद्रित है, जो पक्षी प्रवास स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
    • इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों को गाइड और रेस्तरां ऑपरेटरों के रूप में प्रशिक्षित कर उनके लिए रोजगार पैदा करके और पर्यटन अनुभव को बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना है।
  • विस्टाडोम जंगल सफारी ट्रेन: उत्तर प्रदेश ने कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (बहराइच) और दुधवा टाइगर रिजर्व (पीलीभीत) कोजोड़ने वाली एक विस्टाडोम कोच सेवा शुरू की, जिससे उत्तर प्रदेश विस्टाडोम ट्रेन के माध्यम से जंगल सफारी की पेशकश करने वाला पहला राज्य बन गया।
    • इस पहल से रोजगार सृजन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
    • राज्य के वन सर्किट को “एक गंतव्य तीन वन” के रूप में बढ़ावा देना- दुधवा, कतर्नियाघाट और किशनपुर
    • इसे उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा पूरे वर्ष एक अद्वितीय प्रकृति पथ और जंगल सफारी अनुभव प्रदान करने के लिए लॉन्च किया गया।
    • विस्टाडोम यात्रा जंगल के अंदर 107 किमी लंबी है, इसमें 4 घंटे 25 मिनट तक का समय लगता है और टिकट (कतर्नियाघाट-दुधवा) की लागत ₹275 है।
    • इस पहल का उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को मजबूत करना, रोजगार पैदा करना और होमस्टे, रिसॉर्ट्स तथा ट्रैवल एजेंटों का समर्थन करना है।
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