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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 भारत और विश्व भर में बच्चों में मोटापे (Obesity) और अधिक वजन (Overweight) के मामलों में तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालता है और चेतावनी देता है कि यदि निवारक उपाय नहीं किए गए तो इनसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
अन्य संबंधित जानकारी
• ‘वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन’ ने ‘ विश्व मोटापा दिवस’ के अवसर पर ‘वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026’ जारी किया।
- विश्व मोटापा दिवस प्रतिवर्ष 4 मार्च को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2015 में ‘वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन’ द्वारा मोटापे के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और इसके निवारण एवं उपचार के लिए सामूहिक समाधानों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।

• रिपोर्ट के अनुसार, उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले बच्चों की संख्या के मामले में विश्व स्तर पर भारत, चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
• रिपोर्ट का अनुमान है कि 2025 में भारत में लगभग 41 मिलियन बच्चों का BMI उच्च था और लगभग 14 मिलियन बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे।
• अध्ययन चेतावनी देता है कि बालपन मोटापे में तीव्र वृद्धि से आने वाले दशकों में गैर-संचारी रोगों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
• रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत सहित कई देश 2030 तक बालपन मोटापे में वृद्धि को रोकने के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्ग से विचलित हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
1. भारत और वैश्विक परिदृश्य:
• भारत में 2025 में 5-9 वर्ष की आयु के लगभग 14.9 मिलियन और 10-19 वर्ष की आयु के 26 मिलियन से अधिक बच्चों का वजन अधिक था या वे मोटापे से ग्रस्त थे।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भी भारत प्रथम स्थान पर है, जहाँ 0-19 वर्ष की आयु के 45 मिलियन से अधिक युवा अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं।
• चीन, वैश्विक स्तर पर अग्रणी है जहाँ लगभग 62 मिलियन बच्चों का BMI उच्च है और 33 मिलियन मोटापे से ग्रस्त हैं।
• संयुक्त राज्य अमेरिका तीसरे स्थान पर है जहाँ लगभग 27 मिलियन बच्चों का BMI उच्च है।
• एटलस में पाया गया कि विश्व स्तर पर 5-19 वर्ष के स्कूल जाने वाले बच्चों का वजन अधिक है और मोटापे की समस्या विश्व भर के मात्र 10 देशों में ही है।
2. स्वास्थ्य जोखिम और भविष्य के अनुमान:
• बालपन मोटापा युवा आबादी को उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और चयापचय संबंधी विकारों जैसी गंभीर स्थितियों के प्रति सुभेद्य बनाता है।
• अनुमान सुझाव देते हैं कि यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो 2040 तक भारत में 20 मिलियन बच्चे मोटापे से ग्रस्त होंगे और 56 मिलियन बच्चों का वजन अधिक होगा या वे मोटे होंगे।
• बच्चों में BMI-संबंधित उच्च रक्तचाप के मामले 2025 में लगभग 2.99 मिलियन से बढ़कर 2040 तक लगभग 4.21 मिलियन होने का अनुमान है।
• हाइपरग्लाइसीमिया (रक्त में शर्करा की अधिकता) की घटनाएँ लगभग 1.39 मिलियन से बढ़कर 2040 तक लगभग 1.91 मिलियन हो सकती है।
• चयापचय संबंधी शिथिलता से जुड़ी ‘स्टीटोटिक लिवर डिजीज’ (MASLD) से प्रभावित बच्चों की संख्या 8.39 से बढ़कर 2040 तक तक़रीबन 11.18 मिलियन से अधिक हो सकती है।
- MASLD को पूर्व में गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (NAFLD) के रूप में जाना जाता था। इसकी विशेषता लिवर में अत्यधिक वसा जमा होना (>5% स्टीटोसिस) है और यह एक जीर्ण रोग है, जो मोटापा, टाइप 2 मधुमेह या उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसे चयापचय जोखिम कारकों से जुड़ा होता है।
3. कारण और जोखिम कारक:
• 11-17 वर्ष की आयु के लगभग 74% किशोर अनुशंसित शारीरिक गतिविधि के स्तर को पूरा करने में विफल रहते हैं।
• केवल 35.5% स्कूली आयु के बच्चों को ही स्कूलों में भोजन मिलता है, जो संतुलित पोषण तक उनकी पहुँच को सीमित करता है।
• 6-10 वर्ष की आयु के बच्चों द्वारा शर्करा युक्त पेय पदार्थों (sugary beverages) का नियमित सेवन मोटापे का जोखिम बढ़ाता है।
• पांच महीने तक की आयु के लगभग 32.6% शिशुओं को पर्याप्त स्तनपान नहीं कराया जाता है।
• 15-49 वर्ष की आयु की महिलाओं में, लगभग 13.4% का BMI उच्च है और लगभग 4.2% टाइप-2 मधुमेह से ग्रस्त हैं, जिससे अगली पीढ़ी में स्वास्थ्य जोखिमों का हस्तांतरण बढ़ जाता है।
सुझाए गए नीतिगत उपाय
• सरकारों को प्रारंभिक चरण में ही मोटापे को दूर करने के लिए निवारक नीतियों का सुदृढ़ीकरण करने की आवश्यकता है।
• चीनी-युक्त पेय पदार्थों पर कर जैसे उपाय अस्वस्थ आहार संबंधी आदतों को हतोत्साहित कर सकते हैं।
• बच्चों को अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों के विपणन पर प्रतिबंधों को अधिक सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
• शिक्षण संस्थानों में बेहतर स्कूली पोषण मानकों और स्वस्थ खाद्य आदतों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
• प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के माध्यम से प्रारंभिक स्क्रीनिंग और उपचार दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में सहायता कर सकते हैं।
