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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।  

संदर्भ: हाल ही में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) ने “इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट इन ए टर्बुलेंट एरा” शीर्षक से वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट (WIR) 2026 जारी की, जो वैश्विक निवेश के रुझानों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह और अंतर्राष्ट्रीय निवेश परिदृश्य में उभरती चुनौतियों पर प्रकाश डालती है।

अन्य संबंधित जानकारी

• वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट UNCTAD का प्रमुख वार्षिक प्रकाशन है जो वैश्विक और क्षेत्रीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रुझानों, निवेश नीतियों और सतत विकास वित्तपोषण पर नज़र रखता है। 

• 2026 का संस्करण यह परीक्षण करता है कि भू-राजनीतिक तनाव, औद्योगिक नीतियां, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और आर्थिक अनिश्चितता कैसे अंतर्राष्ट्रीय निवेश प्रवाह को नया रूप दे रहे हैं।

वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026 के मुख्य निष्कर्ष

• वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में सुधार, लेकिन यह असमान बना हुआ है:

  • वर्ष 2025 में वैश्विक FDI प्रवाह 6% बढ़कर 1.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिससे पिछले वर्षों में देखी गई गिरावट की स्थिति में सुधार हुआ है।
  • हालाँकि, यह सुधार असमान रहा है; विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अधिक लाभ दर्ज किया गया, जबकि कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में मामूली वृद्धि हुई (विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में केवल 2% वृद्धि की तुलना में विकसित देशों में FDI अंतर्वाह में 11% की वृद्धि)।

• एशिया अग्रणी निवेश गंतव्य के रूप में बना हुआ है:

  • विकासशील एशिया ने 2025 में 644 बिलियन अमेरिकी डॉलर का FDI अंतर्वाह आकर्षित किया, जो वैश्विक FDI का लगभग 40% है। इस प्रकार, यह विकासशील क्षेत्रों में सबसे बड़े प्राप्तकर्ता के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।
  • आसियान (ASEAN) को रिकॉर्ड 225 बिलियन अमेरिकी डॉलर का FDI प्राप्त हुआ, जबकि पश्चिम एशिया के अंतर्वाह में 3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 76 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।

वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026 के अन्य प्रमुख निष्कर्ष

• निवेश का बढ़ता संकेंद्रण:

  • शीर्ष 20 मेजबान अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक FDI अंतर्वाह में 80% से अधिक की हिस्सेदारी रही, जो निवेश प्रवाह के बढ़ते संकेंद्रण को दर्शाता है।
  • निवेश तेजी से चुनिंदा देशों और रणनीतिक क्षेत्रों की ओर निर्देशित हो रहा है, जिससे कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हाशिए पर जाने का जोखिम पैदा हो गया है।

• रणनीतिक और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों ने निवेश प्रवाह को संचालित किया:

  • अंतर्राष्ट्रीय निवेश मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर्स, डिजिटल बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ-ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की ओर प्रवाहित हुआ।
  • AI-संबंधित निवेश 2020 में लगभग 109 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025 में 576 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

• भारत ने अपनी वैश्विक निवेश स्थिति को सुदृढ़ किया:

  • भारत 2025 में विश्व स्तर पर 11वें सबसे बड़े FDI प्राप्तकर्ता के रूप में उभरा है, जो पिछले वर्ष की 13वीं स्थिति से बेहतर है।
  • भारत में FDI अंतर्वाह 44% बढ़कर 39 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसे विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा-संबंधी क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन का समर्थन प्राप्त हुआ।

रिपोर्ट में रेखांकित चुनौतियाँ और जोखिम

• वैश्विक निवेश का बढ़ता संकेंद्रण: कुछ चुनिंदा देशों और क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का बढ़ता संकेंद्रण विकास संबंधी अंतराल को बढ़ा सकता है और छोटी अर्थव्यवस्थाओं के लिए निवेश के अवसरों में कमी ला सकता है।

• भू-राजनीतिक और आर्थिक विखंडन: व्यापारिक तनाव, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, औद्योगिक नीति के प्रति प्रतिस्पर्धा और आर्थिक अनिश्चितता वैश्विक निवेश परिवेश को अधिक खंडित और अप्रत्याशित बना रहे हैं।

• रणनीतिक निवेश तक असमान पहुँच: कई विकासशील देशों में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और सेमीकंडक्टर्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमताओं, बुनियादी ढांचे और राजकोषीय संसाधनों का अभाव है।

• सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के वित्तपोषण में निरंतर कमी: सतत बुनियादी ढांचे, जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश का स्तर उस आवश्यकता से काफी कम बना हुआ है जो 2030 तक SDG को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

आगे की राह

• अधिक समावेशी वैश्विक निवेश को बढ़ावा देना: विभिन्न क्षेत्रों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का अधिक संतुलित वितरण सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निवेश सुगमीकरण तंत्र को सुदृढ़ करना।

• विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निवेश तत्परता बढ़ाना: गुणवत्तापूर्ण निवेश आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे, विनियामक निश्चितता, संस्थागत क्षमता और व्यापार सुगमता में सुधार करना।

• सतत विकास वित्तपोषण को बढ़ाना: नवीकरणीय ऊर्जा, लचीले बुनियादी ढांचे, खाद्य प्रणालियों और अन्य सतत विकास लक्ष्य (SDG)-संबद्ध क्षेत्रों की दिशा में अधिक सार्वजनिक और निजी निवेश को जुटाना।

• उभरती प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण: विकासशील देशों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास और वित्त तक पहुँच के माध्यम से समर्थन प्रदान करना ताकि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत विनिर्माण और स्वच्छ-प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखलाओं में प्रभावी ढंग से भागीदारी कर सकें।

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