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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: केंद्रीय बजट 2026 में दो उन्नत टेलिस्कोप की स्थापना को मंजूरी दी है: लद्दाख में स्थित मेरक में नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप और हानले में नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलिस्कोप।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • सरकार ने हानले (लद्दाख) स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला में हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप  के अपग्रेडेशन को भी मंजूरी दी है।
  • लद्दाख में पहले से ही प्रमुख खगोलीय सुविधाएं मौजूद हैं, और हानले गांव को भारत के पहले और एकमात्र डार्क स्काई रिजर्व के रूप में नामित किया गया है। डार्क स्काई रिजर्व ऐसा संरक्षित क्षेत्र होता है जिसे रात्रि के समय आकाश के प्राकृतिक अंधकार को संरक्षित करने के लिए विकसित किया जाता है।
    • लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित हानले डार्क स्काई रिजर्व (HDSR) भारत का पहला डार्क स्काई रिजर्व है, जिसे आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2022 में अधिसूचित किया गया था। लगभग 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्काई रिजर्व खगोलीय अवलोकन के लिए विश्व के सबसे ऊंचे स्थलों में से एक है।
  • इन नई परियोजनाओं से अगले दशक में भारत की अवलोकन संबंधी खगोल विज्ञान क्षमताओं के बेहतर होने की उम्मीद है।

नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप (NLST)

  • नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप (NLST) 2-मीटर अपर्चर युक्त सतह-आधारित सौर वेधशाला होगी, जिसे पैंगोंग त्सो झील के पास मेरक क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा।
  • यह टेलिस्कोप विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम की दृश्य और निकट अवरक्त तरंगदैर्घ्य में कार्य करेगा।
  • NLST सौर भौतिकविदों को आधारभूत सौर गतिकी, चुंबकत्व और ऊर्जावान सौर घटनाओं के अध्ययन में सहायता करेगा।
  • यह टेलिस्कोप अंतरिक्ष मौसम प्रक्रियाओं की मैपिंग में मदद करेगा, जो पृथ्वी के उपग्रहों और अंतरिक्ष मिशनों को प्रभावित करती हैं।
  • पूर्ण होने के बाद, यह सुविधा कोडाइकनाल सौर वेधशाला (तमिलनाडु, स्थापना 1899) और उदयपुर सौर वेधशाला (राजस्थान, स्थापना 1975) के बाद भारत की तीसरी सतह-आधारित सौर वेधशाला बन जाएगी।
    • इस परियोजना के पांच से छह वर्षों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
  • इस टेलिस्कोप से प्राप्त डेटा आदित्य L1 के अवलोकनों का पूरक होगा, जो 2023 में लॉन्च की गई भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला है।

नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलिस्कोप (NLOT)

  • नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलिस्कोप (NLOT) 13.7-मीटर अपर्चर वाला खंडित-दर्पण टेलिस्कोप होगा, जिसे हानले में स्थापित किया जाएगा।
    • खंडित-दर्पण टेलिस्कोप में, एक बड़े प्राथमिक दर्पण में अत्यधिक जटिल, छोटे षट्कोणीय दर्पण खंड शामिल होते हैं।
  • 13.7-मीटर के प्राथमिक दर्पण में 90 षट्कोणीय खंड होंगे जो एक साथ मिलकर एक बड़े दर्पण के रूप में कार्य करेंगे।
  • यह टेलिस्कोप ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त तरंगदैर्घ्य में कार्य करेगा।
  • लद्दाख की अधिक ऊंचाई और शुष्क वायुमंडलीय स्थितियां अवलोकनों में न्यूनतम वायुमंडलीय विरूपण सुनिश्चित करेंगी।
  • यह टेलिस्कोप ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर अध्ययन के अलावा, बाह्यग्रहों (Exoplanets), तारकीय विकास, गांगेय निर्माण और सुपरनोवा पर उन्नत शोध को सक्षम बनाएगा।
  • थर्टी मीटर टेलिस्कोप (TMT) के निर्माण में भारत की भागीदारी और तकनीकी अनुभव का लाभ इस परियोजना को भी मिलेगा।
    • TMT, जिसके 30-मीटर के प्राथमिक दर्पण में 494 षट्कोणीय दर्पण खंड हैं, भारत, अमेरिका, कनाडा, चीन और जापान की एक सहयोगी परियोजना है।
    • भारत TMT के लिए दर्पण खंड और सेगमेंट सपोर्ट असेंबली सिस्टम्स उपलब्ध करा रहा है।

हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप का अपग्रेडेशन

  • हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप एक 2-मीटर की ऑप्टिकल टेलिस्कोप है जो पच्चीस वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहा है।
  • उन्नत सुविधा में 3.7-मीटर का खंडित प्राथमिक दर्पण होगा।
  • उन्नत टेलिस्कोप ऑप्टिकल और अवरक्त तरंगदैर्घ्य में कार्य करेगा।
  • यह टेलिस्कोप लीगो इंडिया (LIGO-India) और स्क्वायर किलोमीटर एरे जैसी वैश्विक सुविधाओं का पूरक होगा।
    • लीगो-इंडिया: यह भारत-अमेरिका सहयोग है, जिसमें महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एक उन्नत गुरुत्वाकर्षण-तरंग वेधशाला शामिल होगी।
    • स्क्वायर किलोमीटर एरे (SKA): यह दो स्थलों (ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका) में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील रेडियो टेलिस्कोप बनाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना है।

भारत और ग्लोबल साउथ के लिए महत्व

  • रणनीतिक अवलोकन लाभ: हिमालय के उच्च-ऊंचाई वाले, कम प्रकाश-प्रदूषण वाले स्थल निरंतर आकाश कवरेज और उच्च गुणवत्ता वाले खगोलीय अवलोकन को बढ़ावा देते हैं।
  • वैज्ञानिक क्षमता निर्माण: नई सौर और ऑप्टिकल-अवरक्त टेलिस्कोप हेलियोफिजिक्स, बाह्यग्रहों, तारकीय विकास और ब्रह्मांड विज्ञान  में भारत के अनुसंधान को बेहतर करेंगी।
  • अधिक घरेलू पहुंच: विस्तारित राष्ट्रीय सुविधाएं भारतीय वैज्ञानिकों के लिए अवलोकन समय और अनुसंधान के अवसरों में वृद्धि करेगीं, जिससे विदेशी वेधशालाओं पर निर्भरता कम होगी।
  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: इन परियोजनाओं से अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान में भारत की स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है, जो ग्लोबल साउथ में एक प्रमुख वैज्ञानिक केंद्र के रूप में इसकी भूमिका का समर्थन करेगी।

Source:
Indianexpress
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