संदर्भ: लखनऊ में, शोधकर्ता भारतीय उपमहाद्वीप की लगभग 10,000 साल पुरानी आबादी और जनसांख्यिकीय इतिहास का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक आनुवंशिक उपकरणों और पुरातत्व तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • भारतीय पुरातत्व सोसायटी (IAS), भारतीय प्रागैतिहासिक एवं चतुर्धातुक अध्ययन सोसाइटी (ISPQS) और इतिहास एवं संस्कृति सोसायटी (HCS) के सहयोग से मानव विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित लखनऊ विश्वविद्यालय में त्रिदिवसीय संयुक्त सम्मेलन में इस पर चर्चा की गई।
  • इस कार्यक्रम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASK) द्वारा प्रायोजित किया गया था।
  • इसमें लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज (BSIP) में प्राचीन DNA प्रयोगशाला के वरिष्ठ वैज्ञानिक और समूह प्रमुख शामिल थे।
  • भारत में पहली बार, जनसंख्या इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए प्राचीन DNA डेटा का व्यवस्थित रूप से उपयोग किया जा रहा है।
  • इस शोध में हड़प्पा सभ्यता, गंगा के मैदानों के मध्यपाषाण शिकारी-संग्रहकर्ताओं, ताम्रपाषाण समुदायों और दक्षिण भारत की महापाषाण संस्कृतियों के नमूनों का आनुवंशिक विश्लेषण शामिल है।
  • ये मानव हड्डी के नमूने विश्वविद्यालयों, राज्य पुरातत्व विभागों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण से प्राप्त किए गए थे।
  • यह BSIP, लखनऊ में भारत की पहली समर्पित प्राचीन DNA प्रयोगशाला में किया जा रहा है, जो बेहद नाजुक आनुवंशिक सामग्री को बिना किसी संदूषण के संभालने के लिए डिज़ाइन की गई सुविधा है।
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