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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ग्राहक शिकायत निवारण प्रक्रिया को सुगम एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ‘रिज़र्व बैंक – इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम‘ (RB-IOS), 2026 का शुभारंभ किया। यह योजना 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगी और पूर्ववर्ती ‘रिज़र्व बैंक – इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम, 2021 को प्रतिस्थापित करेगी।
अन्य संबंधित जानकारी:
- भारतीय रिजर्व बैंक ने इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम के लिए संशोधित मानदंडों को जारी करते हुए कहा कि वह एक सेंट्रलाइज्ड रिसीप्ट एंड प्रोसेसिंग सेंटर (CRPC) की स्थापना करेगा। यह केंद्र इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (जैसे ई-मेल) और अन्य भौतिक माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की प्रारंभिक संवीक्षा करेगा ताकि योजना के प्रावधानों के अनुसार उनकी स्वीकार्यता का आकलन किया जा सके।
RB-IOS 2026 की मुख्य विशेषताएं:
- लक्ष्य और उद्देश्य:
- डिजिटल लेनदेन के बढ़ती प्रवृत्ति और जटिलता को देखते हुए, डिजिटल सेवा में हुई गंभीर खामियों के लिए पर्याप्त राहत प्रदान करना।
- RBI द्वारा विनियमित वित्तीय संस्थाओं की सेवा में कमी से संबंधित समस्याओं का समाधान करना।
- कानूनी मुक़दमेबाजी के बिना ही शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित करना।
- कवरेज:
- सभी बैंक (इनमें वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंक, तथा 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाले शहरी सहकारी बैंक शामिल हैं)।
- गैर-बैंक (ऐसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां जो जमा स्वीकार करती हैं या जिनकी संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है और जो ग्राहकों के साथ सौदे (डील) करती हैं)।
- सभी गैर-बैंक प्रीपेड पेमेंट जारीकर्ता, जैसे डिजिटल वॉलेट।
- क्रेडिट सूचना कंपनियां जो क्रेडिट स्कोर का प्रबंधन करती हैं।
- विनियमित संस्थाओं को अपनी शाखाओं और वेबसाइटों पर योजना का विवरण प्रदर्शित करना होगा, एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा और योजना का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना होगा—अन्यथा उन्हें RBI की कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
- छूट: आवास वित्त और कोर निवेश कंपनियां इस योजना के दायरे से बाहर हैं।
- क्षतिपूर्ति की सीमा: नवीन योजना के अंतर्गत, ओम्बड्समैन द्वारा देय क्षतिपूर्ति की अधिकतम सीमा में 50% की वृद्धि करते हुए इसे ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता को हुए मानसिक तनाव तथा संबंधित व्ययों हेतु प्रदान की जाने वाली राशि को भी ₹1 लाख से संशोधित कर ₹3 लाख कर दिया गया है। पिछली योजना में ये राशि क्रमशः 20 लाख रुपये और 1 लाख रुपये थी|
- नई योजना में स्वयं विवाद के कुल राशि के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
- कवर किए गए मुद्दे: यह योजना सेवाओं में देरी, अनुचित शुल्क, या खातों के कुप्रबंधन जैसे मुद्दों को कवर करती है।
- समर्पित पोर्टल: RBI के शिकायत प्रबंधन प्रणाली (CMS) पोर्टल के माध्यम से शिकायतें ऑनलाइन दर्ज की जा सकती हैं।
- नियुक्ति: RBI अपने एक या अधिक अधिकारियों की नियुक्ति ‘RBI ओम्बड्समैन’ और ‘उप ओम्बड्समैन’ (सामान्यतः एक समय में तीन वर्ष की अवधि के लिए) के रूप में कर सकता है, ताकि वे योजना के तहत उन्हें सौंपे गए कार्यों का निष्पादन कर सकें।
- RBI ओम्बड्समैन के दायित्व:
- शिकायतकर्ता को हुए किसी भी नुकसान के लिए 30 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान करने की शक्ति।
- शिकायतकर्ता के समय के नुकसान, खर्च, उत्पीड़न/मानसिक वेदना के लिए 3 लाख रुपये तक का मुआवजा देना।
- समझौतों को सुविधाजनक बनाना, निर्दिष्ट सीमा तक क्षतिपूर्ति देना, साधारण मामलों को शीघ्रता से बंद करना और जनहित में रिपोर्ट प्रकाशित करना।
- उच्चतर अपील: यदि कोई ग्राहक ओम्बड्समैन के निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण (RBI के कार्यकारी निदेशक) के समक्ष अपील कर सकता है।
- संस्थाएं भी वरिष्ठ अधिकारी के अनुमोदन के साथ अपील कर सकती हैं, और केवल तभी हो सकता है जब उन्होंने पूर्व में दस्तावेजों के अनुरोध की अनदेखी न की हो।
योजना का महत्त्व:
- नागरिक-केंद्रित नीति: यह मुकदमों के निर्बाध विकल्प की पेशकश करके सामान्य ग्राहकों को सशक्त बनाती है।
- एक राष्ट्र, एक ओम्बड्समैन: ग्राहकों को अब यह जानने की आवश्यकता नहीं है कि कौन-सी ओम्बड्समैन योजना लागू है; कवर की गई किसी भी संस्था के विरुद्ध शिकायतें एक एकल सुव्यवस्थित तंत्र में दर्ज की जा सकती हैं।
- उपभोक्ता संरक्षण: यह वित्त में बेहतर उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में एक कदम है, जो बैंकिंग समस्याओं के लिए एक सुरक्षा तंत्र के रूप में कार्य करता है।
- नीतिगत निरंतरता: यह योजना पुरानी 2021 की योजना को प्रतिस्थापित करती है लेकिन लंबित मामलों को पूर्ववर्ती नियमों के तहत ही निपटाती है, जिससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा मिलता है।
