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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।

संदर्भ: राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने पिग्मी हॉग को एकीकृत वन्यजीव आवास विकास (IDWH) योजना के प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है।

निर्णय का महत्व

  • प्रजाति पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देना: दुनिया के सबसे दुर्लभ स्तनधारियों में से एक को समर्पित वित्तीय और तकनीकी सहायता वाले राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम के अंतर्गत लाना।
  • घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण: एक संकेतक प्रजाति के रूप में पिग्मी हॉग का संरक्षण ब्रह्मपुत्र के बाढ़ मैदानों में संकटग्रस्त ऊँची जलोढ़ घासभूमियों और उनसे संबंधित जैव विविधता की भी रक्षा करता है।
  • संरक्षण की सफलता को आगे बढ़ाना: पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम (PHCP) को मजबूत करना, जिसने बंदी प्रजनन, आवास पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक पुनर्स्थापन को सफलतापूर्वक एकीकृत करके जंगली आबादी के पुनरुद्धार में योगदान दिया है।
  • विज्ञान-आधारित संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना: यह प्रजाति-विशिष्ट और विज्ञान-आधारित संरक्षण पर भारत के बढ़ते जोर को दर्शाता है तथा जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बदल प्रदान करता है।

गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम के बारे में

  • क्रियान्वयन: यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजना – एकीकृत वन्यजीव आवास विकास (IDWH) का एक प्रमुख घटक है।
  • उद्देश्य: प्रजाति-विशिष्ट एवं विज्ञान-आधारित पुनर्प्राप्ति योजनाओं के माध्यम से अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करना।
  • प्रमुख घटक:
    • आवास का पुनर्स्थापन एवं संरक्षण।
    • आबादी की निगरानी एवं वैज्ञानिक अनुसंधान।
    • संरक्षण प्रजनन एवं पुनर्स्थापन।
    • खतरों का न्यूनीकरण एवं परिदृश्य प्रबंधन।
    • समुदाय की भागीदारी एवं जागरूकता।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) के बारे में

  • वैधानिक निकाय: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित, यह भारत में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित शीर्ष सलाहकारी निकाय है।
  • अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री।
  • संरचना: इसमें केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, थल सेना प्रमुख, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, प्रख्यात संरक्षणवादी, गैर-सरकारी संगठन (NGO) तथा वन्यजीव एवं पारिस्थितिकी के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL): इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री करते हैं। यह वन्यजीव स्वीकृति की आवश्यकता वाले प्रस्तावों की जाँच करती है तथा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्डकी ओर से नीतिगत एवं संरक्षण संबंधी मामलों पर विचार करती है।
  • प्रमुख कार्य:
  • वन्यजीव एवं वनों के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देना।
  • नीतियों का निर्माण करना तथा वन्यजीव संरक्षण के संबंध में केंद्र सरकार को सलाह देना।
  • संरक्षित क्षेत्रों के भीतर या आसपास ऐसी परियोजनाओं एवं गतिविधियों को मंजूरी देना, जिनके लिए NBWL की स्वीकृति आवश्यक हो।
  • प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण एवं पुनर्प्राप्ति उपायों की सिफारिश करना, जिसमें प्रजातियों को प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल करने की सिफारिश भी शामिल है।
  • वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करना तथा संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन को बेहतर करने के उपाय सुझाना।

Sources:
Thehindu
Britannica
Downtoearth

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