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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसधानों को जुटाने, प्रगति और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन के दूसरे चरण राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0’ का शुभारंभ किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • पाइपलाइन का दूसरा चरण नीति आयोग द्वारा बुनियादी ढांचागत लाइन मंत्रालयों के परामर्श से विकसित किया गया है, जो केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना 2025-30’ के अधिदेश पर आधारित है।
  • इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-2030 की अवधि हेतु 12 बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के माध्यम से ₹16.72 लाख करोड़ की कुल मुद्रीकरण क्षमता का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें ₹5.8 लाख करोड़ का निजी निवेश भी अंतर्निहित है।
    • NMP 2.0 के तहत निर्धारित लक्ष्य, NMP 1.0 के ₹6 लाख करोड़ के लक्ष्य की तुलना में 2.6 गुना अधिक है।
  • NMP 2.0 बुनियादी ढांचा-आधारित आर्थिक विकास को गति देने के व्यापक ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के मुख्य बिंदु

  • उद्देश्य और समय-सीमा (वित्त वर्ष 2026–2030): यह परिचालनगत सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए एक संरचित पांच वर्षीय रोडमैप प्रदान करता है, जो निवेशकों को पूर्वानुमान क्षमता प्रदान करने के साथ-साथ सरकार द्वारा व्यवस्थित पूंजी पुनर्चक्रण को सक्षम बनाता है।
  • कुल मुद्रीकरण लक्ष्य: यह प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में लगभग ₹5.8 लाख करोड़ के निजी क्षेत्र के निवेश सहित कुल ₹16.72 लाख करोड़ की मुद्रीकरण क्षमता की परिकल्पना करता है।
  • क्षेत्रीय कवरेज और परिसंपत्ति फोकस: यह 12 प्रमुख क्षेत्रों को कवर करता है जैसे-राजमार्ग (सर्वाधिक हिस्सेदारी), रेलवे, बिजली, बंदरगाह, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, दूरसंचार, विमानन, कोयला, खान, भंडारण, शहरी बुनियादी ढांचा और पर्यटन जो मुख्य रूप से प्रमुख ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों पर केंद्रित है।
    • राजमार्ग/MMLPs/रोपवे (4.42 लाख करोड़; कुल का 26%), बिजली (2.77; 17%), पत्तन (2.64; 16%), रेलवे (2.62; 16%).
  • फ्रेमवर्क: NMP 2.0 मोटे तौर पर NMP 1.0 में निर्धारित परिसंपत्ति मुद्रीकरण की अवधारणा का पालन करेगा। परिसंपत्ति मुद्रीकरण में एक सीमित अवधि के लिए परिसंपत्तियों का हस्तांतरण, अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए सूचीबद्ध संस्थाओं के कुछ हिस्सों का विनिवेश, नकद प्रवाह का प्रतिभूतिकरण या रणनीतिक वाणिज्यिक नीलामी जैसे तत्व शामिल होंगे।
  • प्राप्तियों का वितरण: परिसंपत्ति मुद्रीकरण परियोजनाओं से प्राप्त आय को परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी और मुद्रीकरण के स्वरूप के आधार पर चार अलग-अलग मदों आवंटित किया जाता है।
  • भारत की संचित निधि: किसी भी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित मुद्रीकरण परियोजना से प्राप्त किसी भी प्रकार का सरकारी राजस्व (उदाहरण के लिए: राजस्व हिस्सेदारी, प्रीमियम, पट्टा किराया/लीज रेंटल, रॉयल्टी) भारत की संचित निधि में जमा होगा।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU)/पत्तन प्राधिकरण आवंटन: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा की गई मुद्रीकरण गतिविधियों से प्राप्त आय संबंधित सार्वजनिक उपक्रम को प्राप्त होगी (यही मानक मुख्य पत्तन प्राधिकरणों के लिए भी अपनाया जाएगा)।
  • राज्य की संचित निधि: NMP 2.0 के तहत कुछ परियोजनाओं से राज्य सरकारों को राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है, विशेष रूप से वे जो खान और कोयला क्षेत्रों (रॉयल्टी भुगतान) से संबंधित हैं। यह आय संबंधित राज्य की संचित निधि में जमा होगी।
  • प्रत्यक्ष निवेश (निजी): इस मद के अंतर्गत निजी क्षेत्र द्वारा उन मुद्रीकरण परियोजनाओं में किए गए निवेश को दर्ज किया जाएगा जिनमें निर्माण और/या प्रमुख रखरखाव घटक शामिल हैं।
  • परिसंपत्ति मुद्रीकरण के चरण: NMP 2.0 के तहत मुद्रीकरण क्षमता के आकलन के दृष्टिकोण को पांच चरणों में विभाजित किया गया है:

NMP 2.0 का महत्व

  • बुनियादी ढांचा वित्तपोषण को उत्प्रेरित करना: यह परिपक्व ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों से पूंजी के पुनर्चक्रण  को नई ग्रीनफील्ड बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की ओर स्थानांतरित करता है, जिससे उच्च सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (CapEx) को बनाए रखते हुए राजकोषीय दबाव कम होता है।
  • निजी निवेश को आकर्षित करना: यह दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों (जैसे InvITs, पेंशन फंड, सॉवरेन वेल्थ फंड) को आकर्षित करता है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) इकोसिस्टम को बढ़ावा देता है, जिससे भारत की बुनियादी ढांचा वित्तपोषण संरचना सुदृढ़ होती है।
  • परिचालन दक्षता में वृद्धि: यह स्वामित्व हस्तांतरित किए बिना, संरचित निजी भागीदारी के माध्यम से परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग, उच्च रखरखाव मानकों और प्रदर्शन-आधारित प्रबंधन को बढ़ावा देता है।
  • विकसित भारत और विकास की गति का समर्थन: यह लॉजिस्टिक्स, कनेक्टिविटी और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि, रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 1.0 के बारे में

  • नीति आयोग द्वारा अगस्त 2021 में राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP 1.0) का शुभारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2022-25 की अवधि में 13 अवसंरचना क्षेत्रों के माध्यम से ₹6 लाख करोड़ का परिसंपत्ति मुद्रीकरण करना था, जिसमें राजमार्ग, रेलवे, विद्युत, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा दूरसंचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों का कुल योगदान लगभग 72% निर्धारित था।
  • इस कार्यक्रम ने अपने लक्ष्य का लगभग 90% (₹5.3–5.4 लाख करोड़) प्राप्त किया। यह सफलता राजमार्गों और विद्युत पारेषण के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs), सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) आधारित टोल सड़कों, हवाई अड्डों के निजीकरण और रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास जैसे सफल लेन-देन के माध्यम से प्राप्त हुई।
  • NMP 1.0 ने वृहद् स्तर पर ब्राउनफील्ड मुद्रीकरण की व्यावहारिकता को प्रमाणित किया है। इसने डिजिटल बोली प्रक्रियाओं और निवेशक विश्वास जैसी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को स्थापित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किए हैं, जो अब NMP 2.0 की रूपरेखा और कार्यान्वयन को दिशा प्रदान कर रहे हैं।
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