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सामान्य अध्ययन-3: पशुपालन का अर्थशास्त्र।

संदर्भ: राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) भारत की सबसे बड़ी पशुधन स्वास्थ्य पहलों में से एक है, जिसका उद्देश्य व्यापक टीकाकरण, निगरानी और डिजिटल पशुधन प्रबंधन के माध्यम से खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस को नियंत्रित करना तथा अंततः उनका उन्मूलन करना है।

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के बारे में

  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) को सितंबर 2019 में केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में शुरू किया गया था। इसके लिए वर्ष 2019–20 से 2023–24 तक ₹13,343 करोड़ का प्रारंभिक परिव्यय निर्धारित किया गया था तथा राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को 100% केंद्रीय वित्तपोषण प्रदान किया गया।
  • इसका उद्देश्य टीकाकरण के माध्यम से खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) को नियंत्रित करना और अंततः 2030 तक इसका उन्मूलन करना है। साथ ही, पशुओं में ब्रुसेलोसिस के नियंत्रण को मजबूत करना तथा इससे मनुष्यों को होने वाले संबंधित जोखिमों को कम करना भी इसका लक्ष्य है।
  • कार्यक्रम के तहत गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर को हर छह महीने में FMD के विरुद्ध 100% टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, 4–8 माह की आयु की मादा गोजातीय बछियों को जीवनकाल में एक बार ब्रुसेलोसिस का टीका लगाया जाता है।
  • संशोधित व्यवस्था के तहत NADCP, पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण (LH&DC) घटक तथा पशु औषधि  को पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) में समाहित कर दिया गया है। वर्ष 2026–27 के लिए LHDCP का परिव्यय ₹2,010 करोड़ है।
  • 20वीं पशुधन गणना, 2019 के अनुसार, भारत में कुल 535.78 मिलियन पशुधन हैं, जिनमें 302.79 मिलियन गोजातीय पशु शामिल हैं। इसलिए ग्रामीण आजीविका, पशुधन उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा के लिए पशु स्वास्थ्य का विशेष महत्व है।

NADCP के अंतर्गत प्रमुख हस्तक्षेप

  • व्यापक टीकाकरण एवं निगरानी: FMD के विरुद्ध हर छह महीने के अंतराल पर टीकाकरण किया जाता है। इसके लिए वैक्सीन की खरीद, कोल्ड-चेन अवसंरचना तथा टीकाकरण से पहले और बाद में परीक्षण की व्यवस्था की गई है।
    • सीरो-सर्विलांस एवं सीरो-मॉनिटरिंग, प्रकोप की जाँच, वायरस का पृथक्करण एवं टाइपिंग के माध्यम से पशुओं में प्रतिरक्षा स्तर और रोग के प्रसार का आकलन किया जाता है।
  • पशु पहचान एवं डिजिटल निगरानी: पशुओं की कान में टैगिंग (Ear-tagging) कर उनका पंजीकरण किया जाता है। टीकाकरण एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को भारत पशुधन पोर्टल पर 12 अंकों की विशिष्ट टैग आईडी के माध्यम से एकीकृत किया जाता है।
    • जुलाई 2026 तक 39 करोड़ से अधिक पशुधन का पंजीकरण किया जा चुका था।
  • पशु चिकित्सा एवं प्रवासी पशुधन कवरेज: 29 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 4,019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ (MVUs) 1962 हेल्पलाइन के माध्यम से घर-द्वार पर पशु चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करती हैं।
    • 2024 से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चरवाहा समुदायों की भेड़ एवं बकरियों को भी FMD टीकाकरण के दायरे में शामिल किया गया है।
  • अनुसंधान एवं मानव संसाधन सहायता: ICAR संस्थानों को वैक्सीन अनुसंधान, गुणवत्ता परीक्षण, रोग निगरानी और रोग मॉडलिंग के लिए सहायता दी जाती है। साथ ही, घर-द्वार पर पशुधन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 39,810 मैत्रियों (MAITRIs) को प्रशिक्षित किया गया है।

प्रमुख परिणाम एवं महत्व

  • रोग के बोझ में कमी: FMD टीकाकरण की संचयी संख्या 147.16 करोड़ खुराकों तक पहुँच गई है, जिससे 8.04 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं।
    • FMD के प्रकोप 2019 में 132 से घटकर 2025 में 40 हो गए, जबकि ब्रुसेलोसिस के प्रकोप 22 से घटकर 15 हो गए; पिछले तीन वर्षों से Asia-1 FMD का कोई प्रकोप नहीं हुआ है।
  • रोग प्रतिरक्षा में मजबूती: FMD के O, A और Asia1 सीरोटाइप के विरुद्ध सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा क्रमशः 78.1%, 71.7% और 77.6% तक पहुँच गई।
    • 2025 में ब्रुसेलोसिस सीरोकन्वर्जन गाय के बछड़ों में 75.63% और भैंस के बछड़ों में 67.17% था, जबकि NSP एंटीबॉडी की व्यापकता 2019 और 2025 के बीच 20.8% से घटकर 8.1% हो गई।
  • पशु चिकित्सा सेवाओं तक बेहतर पहुँच और ट्रेसबिलिटी: MVUs ने 136 लाख किसानों को घर-द्वार पर सेवाएँ प्रदान की हैं और 276 लाख पशुओं का उपचार किया है।
    • भारत पशुधन पोर्टल वास्तविक समय में निगरानी और ट्रेसबिलिटी को सक्षम बनाता है, जिससे डेटा-आधारित रोग नियंत्रण और पशुधन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को मजबूती मिलती है।
  • पशुधन उत्पादकता में वृद्धि: 2014–15 और 2024–25 के बीच देशी और गैर-वर्णित मवेशियों की उत्पादकता में 44.89%, जबकि भैंस की उत्पादकता में 25.80% वृद्धि हुई।
    • दूध उत्पादन में 69.4% की वृद्धि हुई, जो 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 247.87 मिलियन टन हो गया, जबकि 2030 तक प्रति पशु प्रति वर्ष औसत 3,000 किलोग्राम दूध उत्पादकता का लक्ष्य है।
  • वन हेल्थ और महामारी तैयारी: NADCP प्रारंभिक रोग पहचान और जूनोटिक जोखिमों में कमी के माध्यम से वन हेल्थ दृष्टिकोण को मजबूत करता है।
    • जी20 पेंडेमिक फंड द्वारा समर्थित US$25 मिलियन की पेंडेमिक फंड प्रोजेक्ट, ADB, FAO और विश्व बैंक के साथ जीनोमिक निगरानी, प्रयोगशालाओं और महामारी तैयारी को बढ़ावा देती है।
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