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सामान्य अध्ययन-3: अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास तथा नई प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: भारत ने 23 अगस्त 2026 को अपना तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया। यह दिवस 2023 में चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की स्मृति में मनाया जाता है तथा अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के बारे में
• राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस प्रतिवर्ष 23 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस 2023 में चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की सफल सॉफ्ट लैंडिंग की स्मृति में मनाया जाता है।
• भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश तथा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट उतरने वाला पहला देश बना।

• लैंडिंग स्थल का नाम शिव शक्ति पॉइंट रखा गया और इसके बाद विक्रम लैंडर ने वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए प्रज्ञान रोवर को तैनात किया।
• राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 का विषय है — “विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा” (Towards Viksit Bharat: Innovating, Collaborating and Aspiring to Global Space Leadership)। यह नवाचार, सहयोग, आत्मनिर्भरता तथा वैश्विक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी पर केंद्रित है।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र
• अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र: भारत ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोला और भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 लागू की।
- IN-SPACe निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत एवं सुगम बनाता है, जबकि न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) इसरो की प्रौद्योगिकियों और सेवाओं का व्यावसायीकरण करता है।
- 2026 में भारत में लगभग 440 पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्ट-अप थे।
- IN-SPACe ने 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को 113 प्राधिकरण प्रदान किए हैं, जिनमें 18 स्टार्ट-अप शामिल हैं।
• अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य 2023 में लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर था और इसके 2033 तक लगभग 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
• प्रक्षेपण यान और अवसंरचना: भारत उपग्रह प्रक्षेपण, अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों और वाणिज्यिक प्रक्षेपणों के लिए पीएसएलवी, जीएसएलवी, LVM3 और SSLV का संचालन करता है।
- नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) और पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकियाँ विकासाधीन हैं।
- श्रीहरिकोटा में तीसरा प्रक्षेपण परिसर और तमिलनाडु में कुलसेकरपट्टिनम अंतरिक्ष केंद्र प्रक्षेपण क्षमता का विस्तार करेंगे।
• नाविक (NavIC) और अंतरिक्ष अनुप्रयोग: NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन) भारत और इसकी सीमाओं से 1,500 किमी तक के क्षेत्र में स्थिति निर्धारण, नौवहन और समय-निर्धारण सेवाएँ प्रदान करता है।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग कृषि, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, जल संसाधन प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संचार और शासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।
भारत में अंतरिक्ष मिशन
• चंद्र अन्वेषण:
- चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्र मिशन; इसने चंद्रमा पर जल के अणुओं और हाइड्रॉक्सिल की उपस्थिति के प्रमाण प्रदान किए।
- चंद्रयान-2 (2019): अपने ऑर्बिटर के माध्यम से चंद्र अन्वेषण को आगे बढ़ाया और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास किया।
- चंद्रयान-3 (2023): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट भारत की पहली सफल सॉफ्ट लैंडिंग की।
- चंद्रयान-4: चंद्रमा से नमूने एकत्र करने और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने की क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए नियोजित मिशन।
- LUPEX/चंद्रयान-5: भारत-जापान का संयुक्त मिशन, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों तथा जल सहित वाष्पशील पदार्थों का अध्ययन करना है।
• अंतरग्रहीय एवं सौर मिशन:
- मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन), 2014: अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला भारत पहला देश बना।
- आदित्य-L1 (2023): भारत का पहला समर्पित सौर मिशन, जिसे सूर्य-पृथ्वी के L1 लैग्रांज बिंदु के आसपास स्थापित किया गया है।
- शुक्र ऑर्बिटर मिशन: 2028 के लिए प्रस्तावित, जिसका उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करना है।
• अंतरिक्ष विज्ञान एवं उन्नत प्रौद्योगिकियाँ
- एस्ट्रोसैट (AstroSat), 2015: भारत की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला।
- एक्सपोसैट (XPoSat), 2024: एक्स-रे ध्रुवण खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत किया।
- स्पैडेक्स (SpaDeX), 2025: अंतरिक्ष में स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग का सफल प्रदर्शन किया, जिससे भारत यह क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बन गया।
• मानव अंतरिक्ष उड़ान एवं अंतरिक्ष स्टेशन:
- गगनयान (Gaganyaan): इसका उद्देश्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी की कक्षा में अधिकतम तीन दिनों तक भेजकर और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर भारत की स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना है।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): यह भारत का प्रस्तावित पाँच मॉड्यूल वाला अंतरिक्ष स्टेशन है, जिसे 2035 तक परिचालन में लाने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य दीर्घ अवधि की मानव अंतरिक्ष उड़ान और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) अनुसंधान को समर्थन देना है।

चंद्रयान-3 के बारे में
• चंद्रयान-3, जिसे 14 जुलाई 2023 को LVM3-M4 के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया था, में प्रोपल्सन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और रोवर शामिल थे।
• इसके तीन उद्देश्य थे:
- चंद्रमा पर सुरक्षित एवं सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन करना।
- रोवर की गतिशीलता का प्रदर्शन करना।
- चंद्रमा की सतह पर स्व-स्थाने वैज्ञानिक प्रयोग करना।
• 23 अगस्त 2023 को विक्रम लैंडर शिव शक्ति पॉइंट पर उतरा और उसने प्रज्ञान रोवर को तैनात किया।
• मिशन ने चंद्रमा की सतह, तापीय गुणों, भूकंपीय गतिविधि, प्लाज्मा पर्यावरण और तत्वीय संरचना का अध्ययन किया। APXS ने लैंडिंग स्थल के निकट सल्फर (गंधक) की उपस्थिति का पता लगाया।
• मिशन के निष्कर्षों ने लूनर मैग्मा ओशन परिकल्पना का भी समर्थन किया।
• चंद्रयान-3 ने चंद्र नमूना वापसी, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य के ग्रहीय अन्वेषण के लिए भारत की क्षमताओं को सुदृढ़ किया।
