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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार; महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।
संदर्भ: हाल ही में, यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिकी देशों के समूह मर्कोसुर (Mercosur) ने अपने आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ करने और व्यापार संबंधों के विस्तार हेतु पराग्वे की राजधानी असुन्सियोन में 25 वर्षों से अधिक समय से चल रही वार्ताओं को अंतिम रूप देते हुए लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के मुख्य बिंदु

- टैरिफ में कटौती और बाजार पहुँच: इस समझौते का लक्ष्य यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच व्यापार की जाने वाली 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ को समाप्त करना है।
- कुछ टैरिफ में कटौती 10 से 15 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
- मर्कोसुर औद्योगिक निर्यात (जिसमें कार, मशीनरी, रसायन, औषधियाँ और वाइन शामिल हैं) के लिए दक्षिण अमेरिकी बाजारों में यूरोपीय संघ की पहुँच का विस्तार करेगा।
- इसके बदले में, यूरोपीय संघ दक्षिण अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे बीफ, सोयाबीन, पोल्ट्री और चीनी के लिए बाजार पहुँच प्रदान करेगा, जिन पर प्रायः संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु कोटा सीमा लागू होती है।
- आर्थिक पैमाना: यूरोपीय संघ-मर्कोसुर के संयुक्त बाजार में 700 मिलियन से अधिक उपभोक्ता हैं और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
- वर्ष 2024 में दोनों क्षेत्रों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग €111 बिलियन ($128.8 बिलियन) रहा।
- इस समझौते से अटलांटिक महासागर के दोनों ओर निर्यात में वृद्धि, रोजगार सृजन और निवेश को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है, जिससे समय के साथ यूरोपीय संघ (EU) के निर्यात में पर्याप्त वृद्धि हो सकती है।
- भू-राजनीतिक महत्त्व: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सहित यूरोपीय नेताओं ने इस समझौते को एक बड़ी ‘भू-राजनीतिक विजय’ बताया है जो वैश्विक संरक्षणवाद के बीच सहयोग को प्रगाढ़ करता है।
- यह एक संदेश देता है कि दक्षिण अमेरिका पारंपरिक शक्तियों से इतर अपनी साझेदारियों में विविधता लाने का इच्छुक है। यह वैश्विक परिवर्तनों जैसे- अमेरिकी टैरिफ के दबाव और इस क्षेत्र में चीन के बढ़ता प्रभाव को लेकर उसकी प्रतिक्रिया है।
- अनुमोदन प्रक्रिया: इस समझौते को अब यूरोपीय संसद की स्वीकृति और अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे एवं उरुग्वे की विधायिकाओं का अनुसमर्थन मिलना शेष है।
मर्कोसुर (MERCOSUR) के बारे में
- परिचय: मर्कोसुर या ‘दक्षिणी साझा बाजार‘, एक दक्षिण अमेरिकी व्यापारिक गुट है जिसकी स्थापना 1991 में वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों के मुक्त आवागमन को बढ़ावा देने हेतु की गई थी।
- यह जनवरी 1995 में एक सीमा शुल्क संघ (Customs Union) बना और वर्तमान में एक ‘साझा बाजार’ (Common Market) बनने की दिशा में अग्रसर है।
- सदस्यता:
- संस्थापक सदस्य: अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे (असुन्सियोन संधि के हस्ताक्षरकर्ता)।
- बाद में जुड़े सदस्य: वेनेजुएला (2012 में शामिल; 2016 से निलंबित) और बोलीविया (जुलाई 2015 में सभी पाँचों देशों द्वारा इसे शामिल करने के लिए सहमति दी गई)।
- संबद्ध देश: चिली, कोलंबिया, इक्वाडोर, गुयाना, पनामा, पेरू और सूरीनाम।
- आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रोफाइल:
- 290 मिलियन लोगों से अधिक जनसंख्या और $2 ट्रिलियन से अधिक की जीडीपी के साथ, यह यूरोपीय संघ, नाफ्टा (NAFTA) और आसियान (ASEAN) के बाद चौथा सबसे बड़ा एकीकृत बाजार है।
- संरचना और शासन
- मुख्यालय: मोंटेवीडियो, उरुग्वे।
- अध्यक्षता: प्रत्येक छह माह में बदलती है, और इसके परिणामस्वरूप शिखर सम्मेलनों का आयोजन होता है।
यूरोपीय संघ के बारे में

- यूरोपीय संघ 27 यूरोपीय देशों का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो साझा आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा नीतियों का संचालन करता है।
- यूरोपीय संघ की नींव वास्तव में 1951 में रखी गई थी जब छह देशों ने ‘यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय’ (ECSC) के गठन हेतु ‘पेरिस की संधि’ पर हस्ताक्षर किए थे। इसके माध्यम से कोयला, इस्पात, श्रमिकों और पूंजी के मुक्त आवागमन की अनुमति प्रदान की गई थी।
- मास्ट्रिच संधि: 1 नवंबर, 1993 को लागू हुई इस संधि के माध्यम से औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ का गठन हुआ। इसके मुख्य उद्देश्य थे:
- साझा मुद्रा (यूरो) की स्थापना।
- साझा विदेश और सुरक्षा नीति का निर्माण।
- यूरोपीय संघ की नागरिकता की शुरुआत।
- आप्रवासन, शरण और न्यायिक मामलों पर सहयोग को बढ़ावा देना।
- यूरोपीय संघ के वर्तमान सदस्य: ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फ़िनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन।
- इसका एक संस्थापक सदस्य यूनाइटेड किंगडम आधिकारिक तौर पर 2020 में यूरोपीय संघ से अलग हो गया।
- शांति और लोकतंत्र को बढ़ावा देने हेतु 2012 में इसे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- 1999 में यूरो के प्रवर्तन के बाद से अब तक 20 देशों ने इसे अपनाया है, और बुल्गारिया 1 जनवरी, 2026 को यूरोज़ोन का 21वाँ सदस्य बन गया है।
Source:
Reutes
Mercosur
Britannica
