संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — विकास एवं अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता।
संदर्भ: भूटान विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने कुत्तों से संक्रमित होने वाले मानव रेबीज़ को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन का सत्यापन प्राप्त किया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस उपलब्धि को 4 सितंबर 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सत्यापित किया गया। वन हेल्थ (One Health), बड़े पैमाने पर कुत्ता टीकाकरण, कुत्तों की आबादी का प्रबंधन, एकीकृत निगरानी तथा पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) तक सार्वभौमिक पहुँच में एक दशक से अधिक समय तक किए गए निरंतर निवेश को दर्शाती है।
- 2018 विश्व स्वास्थ्य संगठन विशेषज्ञ परामर्श ने सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में कुत्तों से फैलने वाले मानव रेबीज़ के उन्मूलन के सत्यापन के लिए मानदंड निर्धारित किए थे, जिसके अनुसार कम-से-कम दो वर्षों तक मानव मृत्यु का न होना आवश्यक है।
- 2030 तक कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ के कारण होने वाली मानव मृत्यु को समाप्त करने की वैश्विक रणनीतिक योजना (Zero by 30) WHO, WOAH और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक संयुक्त पहल है, जिसे ग्लोबल अलायंस फॉर रेबीज़ कंट्रोल (GARC) के सहयोग से संचालित किया जाता है।
रेबीज़ के बारे में

- रेबीज़ एक जूनोटिक वायरल रोग है, जो रेबीज़ वायरस के कारण होता है। यह रैबडोविरिडे परिवार के अंतर्गत लिसावायरस वंश का राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) वायरस है। यह मुख्यतः कुत्ते, बिल्ली और बंदर जैसे संक्रमित जानवरों की लार के माध्यम से फैलता है।
- रेबीज़ एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग है और 150 से अधिक देशों एवं क्षेत्रों में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। इसके अधिकांश मामले एशिया और अफ्रीका में पाए जाते हैं तथा हर वर्ष दसियों हजार लोगों की मृत्यु होती है।
- संचरण: रेबीज़ संक्रमित जानवरों की लार के माध्यम से फैलता है, मुख्यतः काटने और खरोंचने या क्षतिग्रस्त त्वचा अथवा श्लेष्म झिल्ली के संपर्क के माध्यम से।
- रेबीज़ की रोकथाम: कुत्तों का टीकाकरण सबसे अधिक लागत-प्रभावी रणनीति है; मनुष्यों के लिए पूर्व-जोखिम प्रतिरक्षण हेतु टीके उपलब्ध हैं।
- काटने/खरोंचने के बाद घाव को लगभग 15 मिनट तक पानी से धोएँ और अच्छी तरह साफ करें, आयोडीन युक्त/एंटीवायरल दवा लगाएँ, जलन पैदा करने वाले पदार्थों और पट्टियों से बचें तथा तुरंत स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करें।
- जानवर को सुरक्षित रूप से 10 दिनों तक अलग रखकर उसकी निगरानी करें। WHO कुत्तों में रेबीज़ के उन्मूलन, काटने से बचाव और इंट्राडर्मल पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) को बढ़ावा देता है, जिससे टीके की मात्रा और लागत में 60%–80% तक कमी की जा सकती है।
- लक्षण एवं ऊष्मायन अवधि: प्रारंभिक लक्षणों में बुखार, दर्द तथा घाव वाले स्थान पर असामान्य झनझनाहट, चुभन या जलन जैसी संवेदनाएँ (पैरेस्थेसिया) शामिल हैं। बाद के चरणों में वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँच जाता है, जिससे मस्तिष्क और मेरुरज्जु में घातक सूजन हो जाती है। ऊष्मायन अवधि 1 सप्ताह से 1 वर्ष तक हो सकती है, जो सामान्यतः 2–3 महीने होती है।
- उग्र रेबीज़ (Furious Rabies): उग्र रेबीज़ की विशेषता अत्यधिक सक्रियता, उत्तेजित व्यवहार, जलांतकता (Hydrophobia—पानी का भय) तथा कभी-कभी वायुभीति (Aerophobia—हवा के झोंकों या ताज़ी हवा का भय) है।
- पक्षाघाती रेबीज़ (Paralytic Rabies): पक्षाघाती रेबीज़ मानव मामलों के लगभग 20% मामलों में पाया जाता है और सामान्यतः उग्र रूप की तुलना में कम नाटकीय तथा अधिक लंबी अवधि वाला होता है।
भारतीय सरकार की पहल:
- राष्ट्रीय रेबीज़ नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP)
- उद्देश्य: मानव रेबीज़ से होने वाली मृत्यु दर को कम करना तथा वैश्विक लक्ष्य “2030 तक शून्य मृत्यु (Zero Deaths by 2030)” को क्रमिक रूप से प्राप्त करना।
- लक्ष्य: पशु-काटने के पीड़ितों को समय पर पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) सुनिश्चित करना; इंट्राडर्मल PEP तथा उच्च जोखिम वाली श्रेणियों के लिए पूर्व-जोखिम प्रोफिलैक्सिस को बढ़ावा देना; पशु-काटने के प्रबंधन एवं रेबीज़ PEP के संबंध में स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को प्रशिक्षित करना।
- कार्यक्रम के घटक: कार्यक्रम के दो घटक हैं—मानव घटक और पशु घटक।
- मानव घटक: सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को नोडल एजेंसी के रूप में लागू किया जाना है।
- पशु स्वास्थ्य घटक: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को नोडल एजेंसी के रूप में हरियाणा और चेन्नई में पायलट परीक्षण के लिए लागू किया जाना है।
- NRCP की रणनीतियाँ: सभी स्वास्थ्य सुविधाओं पर एंटी-रेबीज़ वैक्सीन (ARV) एवं एंटी-रेबीज़ सीरम (ARS) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- पशु-काटने के प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण।
- निगरानी एवं रेबीज़ निदान को सुदृढ़ करना।
- पशु-काटने के प्रति जागरूकता तथा समय पर उपचार के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियाँ।
