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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण के प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।
संदर्भ:
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- भारत पर 50% टैरिफ अमेरिका द्वारा इस आधार पर लगाया गया है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है। इसके परिणामस्वरूप, भारत भी ब्राज़ील की तरह उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन पर अमेरिका ने सबसे अधिक टैरिफ लगाए हैं।
- अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात साझेदार है, जिसकी भारत से कुल निर्यात में लगभग 18% हिस्सेदारी है। यह हिस्सा भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 2.3% के बराबर है।
- थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव का अनुमान है कि 2024-25 में अमेरिका को भारत से होने वाला निर्यात 87 अरब डॉलर से घटकर 49.6 अरब डॉलर तक रह जाएगा।
विभिन्न क्षेत्रों पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव

- झींगा: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत ने अपने कुल झींगा निर्यात का 32.4% अमेरिका को निर्यात किया। भारतीय झींगा पर पहले लागू 10% प्रतिकारी शुल्क (countervailing duty) को अब बढ़ाकर कुल 60% कर दिया गया है।
- हीरा, सोना और आभूषण: भारत से अमेरिका को हीरे, सोने और आभूषणों का निर्यात 2024-25 में इस क्षेत्र के कुल निर्यात का 40% था और अब इस पर टैरिफ 2.1% से बढ़कर 52.1% हो गया है।
- वस्त्र एवं परिधान: भारत से होने वाले परिधान निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 35% है, और इस क्षेत्र में अब 63.9% (जो पहले 13.9% था) टैरिफ लगेगा। नतीजतन, यह सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक बन गया है।
- कालीन: भारत ने 2024-25 में अमेरिका को 1.2 बिलियन डॉलर मूल्य के कालीन निर्यात किए, जो कुल कालीन निर्यात का 58.6% है। अब इस पर टैरिफ 2.9% से बढ़कर 52.9% हो गया है।
- अन्य क्षेत्र: अन्य गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में हस्तशिल्प, चमड़ा और जूते, फर्नीचर और बिस्तर, और कृषि उत्पाद जैसे बासमती चावल, मसाले, चाय, दालें और तिल शामिल हैं।
- अमेरिकी बाजार में अप्रतिस्पर्धी: अमेरिका को भारत से होने वाले लगभग 66% निर्यात पर अब 50% टैरिफ लग रहा है। यह श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए एक गहरा आघात है, क्योंकि वे अमेरिकी मांग पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, जिस कारण ये निर्यात अप्रतिस्पर्धी हो जाते हैं।
50% टैरिफ से छूट प्राप्त वस्तुएँ
- वित्त वर्ष 2025 में भारत से अमेरिका को होने वाला लगभग 30% निर्यात (जिसका मूल्य 27.6 बिलियन डॉलर है) शुल्क-मुक्त रहेगा क्योंकि फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों को अमेरिकी टैरिफ से छूट दी गई है।
- धातुएँ: इसमें बिना गढ़ा हुआ एंटीमनी (unwrought antimony), निकल, जिंक, क्रोमियम, टंगस्टन, प्लैटिनम, पैलेडियम, गोल्ड बार, सोने के सिक्के, तकनीकी रूप से निर्दिष्ट प्राकृतिक रबर, मूंगा, इकाइनोडर्म और कटलबोन शामिल हैं।
- अन्य छूट प्राप्त वस्तुओं में परिष्कृत पेट्रोलियम ईंधन और उत्पाद (2024-25 में 4.1 बिलियन डॉलर), साथ ही पुस्तकें, ब्रोशर (brochures), प्लास्टिक, सेल्यूलोज ईथर, फेरोमैंगनीज, फेरोसिलिकॉन मैंगनीज, फेरोक्रोमियम और कंप्यूटिंग गियर जैसे मदरबोर्ड और रैक सर्वर शामिल हैं।
आगे की राह
- घरेलू माँग को बढ़ाना: आवश्यक वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) में नियोजित कटौती से घरेलू लागत कम होने और घरेलू खपत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- सरकारी सहायता और नीतियाँ: लक्षित सब्सिडी, शुल्क वापसी या प्रतिपूर्ति योजनाओं को लागू करना और प्रभावित क्षेत्रों में नौकरियों के संरक्षण के लिए अस्थायी वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- निर्यात गंतव्यों में विविधता लाना: यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और खाड़ी देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को गति देना; वस्त्र, रत्न और समुद्री उत्पादों के लिए अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में नए बाज़ारों की तलाश करना।
- वैश्विक मानक के लिए नवाचार: वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए वस्त्र और रत्नों में प्रौद्योगिकी अपनाने, उत्पाद नवाचार और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना।