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सामान्य अध्ययन-3:  अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता; विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: भारत का निजी स्पेसटेक इकोसिस्टम विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। विनियामक सुधारों, निजी क्षेत्र द्वारा सफल कक्षीय प्रक्षेपणों तथा वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में रिकॉर्ड 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ।

ट्रैक्सन की “स्पेस टेक इन इंडिया” रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • ट्रैक्सन की “स्पेस टेक इन इंडिया” रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 तक भारत के निजी स्पेसटेक इकोसिस्टम ने 241 वित्तपोषण दौरों के माध्यम से लगभग 871 मिलियन अमेरिकी डॉलर की पूंजी जुटाई है।
  • वर्तमान में इस इकोसिस्टम में 285 कंपनियाँ शामिल हैं, जिनमें से 274 सक्रिय हैं तथा 72 स्टार्टअप्स को संस्थागत इक्विटी वित्तपोषण प्राप्त हुआ है।
  • इस क्षेत्र में निवेश 2021 के 43 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। वहीं, 2026 में (वर्ष की शुरुआत से अब तक) 24 वित्तपोषण दौरों के माध्यम से 113 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्राप्त हो चुका है।
  • सीड-स्टेज (Seed Stage) वित्तपोषण 2022 के 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025 में 62 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। वहीं, लेट-स्टेज (Late Stage) वित्तपोषण पहली बार 2025 में 17 मिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया, जो 2026 में (वर्ष की शुरुआत से अब तक) बढ़कर 53 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
  • शीर्ष 10 वित्तपोषित कंपनियों ने सामूहिक रूप से 548 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाई, जो कुल वित्तपोषण का 60% से अधिक है।
  • स्काईरूट एयरोस्पेस ने 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाकर भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद पिक्सेल (96 मिलियन अमेरिकी डॉलर), अग्निकुल कॉसमॉस (76 मिलियन अमेरिकी डॉलर), दिगंतारा (67 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तथा बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस (34 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का स्थान है।
  • बेंगलुरु भारत के निजी स्पेसटेक इकोसिस्टम का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहाँ 106 वित्तपोषण दौरों के माध्यम से 495 मिलियन अमेरिकी डॉलर (कुल वित्तपोषण का लगभग 57%) का निवेश प्राप्त हुआ। इसके बाद हैदराबाद (205 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तथा चेन्नई (80 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का स्थान है।

भारत का स्पेसटेक इकोसिस्टम

  • निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का तीव्र विस्तार: वर्ष 2020 के अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों के बाद भारत का निजी स्पेसटेक इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। आज निजी स्टार्टअप लॉन्च वाहन, उपग्रह प्लेटफॉर्म, प्रणोदन प्रणाली, पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह संचार, डाउनस्ट्रीम एनालिटिक्स तथा अंतरिक्ष परिस्थितिजन्य जागरूकता (SSA) जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में निजी भागीदारी और विविधीकरण को दर्शाता है। अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में केवल 1 थी, जो फरवरी 2026 तक 400 से अधिक हो चुकी है।
  • प्रमुख व्यावसायिक उपलब्धि: 18 जुलाई 2026 को स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1, पेलोड को 450 किमी की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में सफलतापूर्वक स्थापित करने वाला भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-श्रेणी लॉन्च वाहन बन गया।
    • इसके साथ ही भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला तीसरा देश बन गया।
  • बढ़ती व्यावसायिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर (वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लगभग 2–3%) आंकी गई है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 40–45 अरब अमेरिकी डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक बाजार में लगभग 8% हिस्सेदारी प्राप्त करना है।
    • इस वृद्धि को न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) तथा इसरो (ISRO) के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण ढांचे से गति मिली है। इन पहलों ने व्यावसायीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों, परीक्षण सुविधाओं और मिशन विशेषज्ञता तक पहुंच को सुदृढ़ किया है।
  • उभरते निवेश रुझान: निवेशकों का रुझान तेजी से उन स्टार्टअप्स की ओर बढ़ रहा है जिन्होंने अपनी तकनीकी क्षमता और व्यावसायिक निष्पादन को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है। साथ ही, निवेश का बड़ा हिस्सा कुछ उच्च-प्रदर्शन कंपनियों में केंद्रित हो रहा है, जो भारत के स्पेसटेक इकोसिस्टम के परिपक्व होने तथा भविष्य में उद्योग समेकन की संभावना को दर्शाता है।

विकास को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलें

  • अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधार (2020): वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों के माध्यम से निजी क्षेत्र के लिए संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य श्रृंखला खोल दी गई।  इससे निजी कंपनियों एवं स्टार्टअप्स को लॉन्च अवसंरचना, उपग्रह निर्माण एवं विकास तथा डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों तक पहुंच प्राप्त हुई।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 (Indian Space Policy, 2023): इस नीति ने इसरो (ISRO), भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) तथा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की संस्थागत भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया।  इसका उद्देश्य अंतरिक्ष गतिविधियों के व्यावसायीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe): यह निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए सिंगल-विंडो नियामक एवं प्रोत्साहन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।  अब तक यह उद्योग एवं स्टार्टअप्स को इसरो की 71 प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान कर चुका है।
    • 2024 में IN-SPACe ने मानदंड, दिशानिर्देश एवं प्रक्रियाएँ (NGP) जारी कीं, जिनका उद्देश्य अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाना तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ाना है।
  • प्रौद्योगिकी अपनाना फंड (TAF): यह फंड शुरुआती चरण की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (TRL) 3/4 से TRL 7/8 अथवा उससे उच्च स्तर तक विकसित कर उनके व्यावसायीकरण में सहायता प्रदान करता है।  साथ ही, यह नवाचार, आयात प्रतिस्थापन, स्वदेशी क्षमता विकास तथा आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देता है।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) उदारीकरण, 2024: वर्ष 2024 में अंतरिक्ष क्षेत्र में 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई। प्रमुख प्रावधान:
    • उपग्रह निर्माण एवं संचालन – 74% तक ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से।
    • लॉन्च वाहन एवं स्पेसपोर्ट – 49% तक ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से।
    • उपग्रह घटकों एवं उप-प्रणालियों का निर्माण – 100% FDI की अनुमति।
  • वित्तीय एवं स्टार्टअप सहायता: सरकार ने निजी निवेश और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड, 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड (TAF), IN-SPACe सीड फंड योजना, तथा पूर्व-ऊष्मायन उद्यमिता कार्यक्रम (PIEP) प्रारंभ किए हैं।
  • कर्नाटक का स्पेसटेक उत्कृष्टता केंद्र: कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी (KITS) तथा SIA-India के सहयोग से बेंगलुरु में भारत का पहला राज्य-नेतृत्व वाला अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग बढ़ाकर राज्य में स्पेसटेक नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
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