संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले वैश्विक प्रभाव।
सामान्य अध्ययन -3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा।
संदर्भ: वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार की गई फरवरी 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापक आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अन्य संबंधित जानकारी

• पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली नौवहन गतिविधियों को बाधित किया। यह विश्व का सबसे महत्वपूर्ण ‘तेल चोकपॉइंट’ है, जहाँ से वैश्विक तेल प्रवाह का 20% हिस्सा गुजरता है।
• समीक्षा में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखलाओं तथा नौवहन मार्गों में व्यवधान से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप देश में मुद्रास्फीति परिदृश्य और अधिक चुनौतीपूर्ण बन सकता है।
• संभावित ऊर्जा संकट और तेल की कमी को रोकने के लिए सरकार ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग किया। इसके अंतर्गत तेल रिफाइनरियों को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाने का निर्देश दिया गया है ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
मासिक आर्थिक समीक्षा के मुख्य बिंदु
• तेल की कीमतों में उछाल और जोखिम:

- समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बढ़ने के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 9% की वृद्धि हुई और यह 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के निकट पहुँच गई।
- आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण वैश्विक एलएनजी (LNG) की कीमतों में तीव्र उछाल देखा गया, जिसमें लगभग 50% की भारी वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत वर्तमान में उच्च विदेशी मुद्रा भंडार बनाए हुए है। यह भंडार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण होने वाली विनिमय दर की अस्थिरता और भारतीय रुपये के अवमूल्यन को रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है।
- वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (H1 FY26) के दौरान भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का मात्र 0.8% रहा। यह एक अत्यंत स्थिर और सकारात्मक आर्थिक संकेतक है, जो दर्शाता है कि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत स्थिति में है।
मुद्रास्फीति और व्यापक आर्थिक जोखिम
• समीक्षा में कहा गया है कि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें परिवहन और उत्पादन लागत में वृद्धि के माध्यम से घरेलू मुद्रास्फीति में बदल सकती हैं।
• यह अनुमान लगाया गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें आधारभूत पूर्वधारणाओं से 10% ऊपर बढ़ती हैं, तो मुद्रास्फीति में लगभग 30 आधार अंकों की वृद्धि हो सकती है।
• भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2026 में 2.75% थी। हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में निरंतर वृद्धि इस मुद्रास्फीति परिदृश्य को जटिल बना सकती है।
बाह्य क्षेत्र और राजकोषीय निहितार्थ
• विश्लेषण में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान से विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है।
• रिपोर्ट में संभावित वैश्विक झटकों के लिए तैयार रहने हेतु भुगतान संतुलन के आवधिक ‘दबाव परीक्षण’ (Stress Testing) की सिफारिश की गई है।
• विश्लेषण के अनुसार, भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करने के लिए तेल की कीमतों को लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रखना होगा।
घरेलू ईंधन कीमतों पर प्रभाव
• दिल्ली में घरेलू तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतों में वृद्धि देखी गई है, जहाँ प्रति सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी हुई है।
• वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के तत्काल प्रभाव के कारण वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
• भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन नहीं किया है। वे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों की निरंतर निगरानी कर रही हैं।
