संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य और मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय ।
संदर्भ: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने क्यूडेंगा (डेंगू टेट्रावेलेंट वैक्सीन- जीवित, दुर्बलित) को विपणन प्राधिकरण प्रदान किया है। इसके साथ ही यह भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वीकृत डेंगू का पहला टीका बन गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने जर्मनी की Takeda GmbH द्वारा विकसित क्यूडेंगा® को 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए स्वीकृति प्रदान की है।
- यह स्वीकृति औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, औषधि नियम, 1945 तथा नवीन औषधि एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 के अंतर्गत व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद दी गई।
- यह टीका भारत की वर्तमान डेंगू नियंत्रण रणनीति को सुदृढ़ करेगा, जिसमें वाहक नियंत्रण, निगरानी, शीघ्र निदान तथा रोगी प्रबंधन जैसे उपाय राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) के अंतर्गत संचालित किए जाते हैं।
- क्यूडेंगा को विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व-अर्हता प्राप्त है तथा इसे यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, स्विट्ज़रलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड सहित 40 से अधिक देशों में नियामकीय स्वीकृति मिल चुकी है।
- क्यूडेंगा ब्राज़ील के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है तथा अर्जेंटीना, कोलंबिया और इंडोनेशिया के सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रमों में भी उपलब्ध है।
क्यूडेंगा (डेंगू टेट्रावेलेंट वैक्सीन) के बारे में
- Takeda GmbH द्वारा विकसित किया गया है।
- भारत में टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयात एवं विपणन किया जाता है।
- टीके का प्रकार
- यह जीवित, दुर्बलित टेट्रावेलेंट डेंगू वैक्सीन है।
- इसका विकास पुनर्संयोजित डीएनए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया गया है।
- इसका निर्माण वीरो कोशिकाओं में डेंगू वायरस प्रकार-2 (डीईएनवी-2) के आधार ढाँचे पर, प्रत्येक सीरोटाइप-विशिष्ट सतही प्रोटीन को सम्मिलित करके किया गया है।
- इसमें आनुवंशिक रूप से परिवर्तित जीव (जीएमओ) सम्मिलित हैं।
- इसे पुनर्गठन (रीकन्स्टिट्यूशन) हेतु शुष्कीकृत (फ्रीज़-ड्राइड) चूर्ण के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।
- सुरक्षा
- यह टीका डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप— DENV -1, DENV -2, DENV -3 तथा DENV -4—से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- इसे पूर्व में डेंगू संक्रमण हुआ हो या नहीं, दोनों परिस्थितियों में लगाया जा सकता है।
- टीकाकरण से पूर्व-जांच अथवा सीरोलॉजिकल परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती।
- पात्रता
- यह टीका 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए स्वीकृत है।
क्यूडेंगा का महत्त्व
- वैश्विक स्तर पर रोग का उच्च बोझ: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व की लगभग आधी आबादी डेंगू के जोखिम में है तथा प्रतिवर्ष 10 से 40 करोड़ डेंगू संक्रमण के मामले सामने आते हैं।
- भारत में डेंगू के उच्च बोझ का समाधान: वैश्विक डेंगू बोझ का लगभग एक-तिहाई भारत में है तथा भारत डेंगू से सर्वाधिक प्रभावित 30 देशों में शामिल है।
- राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) के अनुसार, 2025 में 1,21,824 डेंगू के मामले तथा 121 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 और 2024 में मामलों की संख्या 2 लाख से अधिक रही।
- भारत की डेंगू रोकथाम रणनीति को सुदृढ़ बनाता है: यह भारत का पहला स्वीकृत डेंगू टीका है, जो देश की वर्तमान डेंगू रोकथाम रणनीति में टीकाकरण को एक नए एवं महत्त्वपूर्ण उपाय के रूप में जोड़ता है।
- आर्थिक बोझ में कमी: डेंगू भारत पर चिकित्सा एवं आर्थिक दृष्टि से बड़ा बोझ डालता है। जर्नल ऑफ इंफेक्शन एंड पब्लिक हेल्थ में 2019 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2016 में भारत में डेंगू की कुल आर्थिक लागत लगभग 5.71 अरब अमेरिकी डॉलर आँकी गई थी।
डेंगू के बारे में
- डेंगू (जिसे हड्डी-तोड़ बुखार भी कहा जाता है) डेंगू वायरस (डीईएनवी) से होने वाला मच्छर जनित विषाणुजनित रोग है।
- यह मुख्यतः संक्रमित मादा एडीज़ एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज़ एल्बोपिक्टस भी इसका वाहक हो सकता है।
- यह रोग 100 से अधिक देशों में स्थानिक (एंडेमिक) है, विशेषकर उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में।
- डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं— DENV -1, DENV -2, DENV -3, DENV -4 किसी एक सीरोटाइप से संक्रमण होने पर उसी सीरोटाइप के विरुद्ध आजीवन प्रतिरक्षा प्राप्त होती है, जबकि किसी अन्य सीरोटाइप से पुनः संक्रमण होने पर गंभीर डेंगू का जोखिम बढ़ जाता है।
- लक्षण: संक्रमण के 4–10 दिन बाद लक्षण प्रकट होते हैं तथा सामान्यतः 2–7 दिनों तक बने रहते हैं। प्रमुख लक्षण हैं— तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, मतली ,उल्टी, त्वचा पर चकत्ते, ग्रंथियों में सूजन
- गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत: पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, तेज़ साँस चलना, मसूड़ों या नाक से रक्तस्राव, उल्टी या मल में रक्त आना, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी
- निदान: डेंगू की पुष्टि निम्नलिखित परीक्षणों द्वारा की जाती है—
- न्यूक्लिक अम्ल प्रवर्धन परीक्षण (एनएएटी)
- प्रतिजन परीक्षण
- ELISA-आधारित प्रतिरक्षी परीक्षण
- त्वरित निदान परीक्षण (आरडीटी)
