संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबधित विषय।   

सामान्य अध्ययन -3: जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता।  

संदर्भ: नीति आयोग ने “2035 तक भारत को अग्रणी जैव-अर्थव्यवस्था महाशक्ति बनाने हेतु रोडमैप” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें ₹50,000 करोड़ के जैव-अर्थव्यवस्था विकास कोष तथा मिशन-आधारित रणनीति का प्रस्ताव किया गया है, ताकि 2035 तक भारत को विश्व की शीर्ष तीन जैव-प्रौद्योगिकी शक्तियों में शामिल किया जा सके।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह रिपोर्ट नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब द्वारा सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत के हितधारकों, शोधकर्ताओं तथा विषय-विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार की गई है, ताकि भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जा सके।
  • यह रोडमैप मिशन-आधारित रणनीति प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य 2035 तक भारत को विश्व की शीर्ष तीन जैव-प्रौद्योगिकी शक्तियों में स्थापित करना तथा जैव-प्रौद्योगिकी को आर्थिक विकास, नवाचार, सतत विकास एवं रणनीतिक लचीलापन का प्रमुख माध्यम बनाना है।
  • यह रोडमैप अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं रोजगार हेतु जैव-प्रौद्योगिकी नीति तथा विकसित भारत–2047 की व्यापक परिकल्पना के अनुरूप है।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को समझना

  • जैव-अर्थव्यवस्था से तात्पर्य उन आर्थिक गतिविधियों से है, जो जैविक संसाधनों, जैव-प्रौद्योगिकी तथा जैव-विनिर्माण पर आधारित हों तथा जिनके माध्यम से स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए वस्तुओं, सेवाओं एवं सतत समाधानों का उत्पादन किया जाता है।
  • भारत की जैव-अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति
    • भारत की जैव-अर्थव्यवस्था वर्ष 2014 में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025 में 195.3 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है, अर्थात इसमें 16 गुना वृद्धि हुई है। वर्तमान में इसका सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 4.8% है।
    • भारत में 10,000 से अधिक जैव-प्रौद्योगिकी नवउद्यम हैं, विश्व के सबसे बड़े टीका विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक उपलब्ध है तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर 700 से अधिक अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा अनुमोदित विनिर्माण इकाइयाँ हैं।
    • भारत सस्ती वैक्सीन, जैव-समान औषधियों, जेनेरिक दवाओं तथा अनुबंध आधारित अनुसंधान एवं विनिर्माण सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनकर उभरा है।
  • भविष्य के विकास लक्ष्य
    • रोडमैप के अनुसार भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को 2030 तक 392 अरब अमेरिकी डॉलर, 2035 तक 691 अरब अमेरिकी डॉलर तथा 2047 तक 2.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
    • इसके अतिरिक्त 2035 तक 3 करोड़ से अधिक उच्च-मूल्य रोजगार सृजित करने तथा सकल घरेलू उत्पाद में जैव-अर्थव्यवस्था का योगदान 2035 तक 5–6% और 2047 तक 8–10% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

रोडमैप की प्रमुख सिफारिशें

  • मिशन-आधारित विकास हेतु छह राष्ट्रीय जैव-मिशन
    • रोडमैप में स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-सुरक्षा, समुद्री संसाधनों तथा उन्नत उपचार के क्षेत्रों में क्षमताओं के विकास हेतु छह प्रमुख राष्ट्रीय जैव-मिशनों का प्रस्ताव किया गया है।
    • इनमें शामिल हैं—
      • जीन इंडिया – परिशुद्ध चिकित्सा, जीनोमिक्स, जीन एवं कोशिका चिकित्सा।
      • एग्रीबायो 2.0 – जलवायु-सहिष्णु फसलें, अगली पीढ़ी के जैव-इनपुट तथा सतत कृषि।
      • बायोएक्स फाउंड्री – सिंथेटिक जीवविज्ञान, परिशुद्ध किण्वन तथा औद्योगिक जैव-विनिर्माण।
      • वन हेल्थ ग्रिड – संक्रामक रोगों, जूनोसिस तथा रोगाणुरोधी प्रतिरोध की एकीकृत निगरानी।
      • समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी मिशन – समुद्री जैव-संसाधनों, समुद्री शैवाल तथा नीली जैव-अर्थव्यवस्था की संभावनाओं का उपयोग।
      • बायोफार्मा नेक्स्ट – उन्नत जैविक औषधियाँ, वैक्सीन, जैव-समान औषधियाँ तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित औषधि खोज।
  • ₹50,000 करोड़ का जैव-अर्थव्यवस्था विकास कोष
    • रिपोर्ट में 2026–2035 की अवधि के लिए ₹50,000 करोड़ के समर्पित जैव-अर्थव्यवस्था विकास कोष की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है, ताकि अनुसंधान एवं व्यावसायिक उपयोग के बीच वित्तीय अंतर को कम किया जा सके।
    • यह कोष जैव-विनिर्माण अवसंरचना, गहन-प्रौद्योगिकी जैव-प्रौद्योगिकी उद्यम, सिंथेटिक जीवविज्ञान प्लेटफ़ॉर्म, उन्नत उपचार, निदान तकनीक तथा जैव-आधारित सामग्रियों को उत्प्रेरक एवं मिश्रित वित्तपोषण के माध्यम से समर्थन देगा।
  • शासन एवं आँकड़ा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना
    • रोडमैप में अंतर-क्षेत्रीय समन्वय एवं कार्यान्वयन की निगरानी हेतु राष्ट्रीय जैव-मिशनों पर सशक्त समिति के गठन की अनुशंसा की गई है।
    • इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय जैव-आँकड़ा परिषद, जैव-अर्थव्यवस्था निवेश एवं नीति मंच तथा जैव-प्रौद्योगिकी से संबंधित बौद्धिक संपदा के संरक्षण एवं व्यावसायीकरण को गति देने हेतु विशेष व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • नियामकीय एवं प्रतिभा सुधार
    • रिपोर्ट में नियामकीय परीक्षण क्षेत्र, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के आधुनिकीकरण तथा उभरते जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों के लिए तेज़ अनुमोदन प्रक्रिया विकसित करने की अनुशंसा की गई है।
    • इसके अतिरिक्त जैव-विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करने, अनुसंधान छात्रवृत्तियों का विस्तार करने, वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने तथा जैव-सूचनाविज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जीवविज्ञान एवं उन्नत जैव-विनिर्माण में विशेषज्ञता विकसित करने की भी अनुशंसा की गई है।

रोडमैप का महत्त्व

  • आर्थिक विकास में तीव्रता: जैव-प्रौद्योगिकी को एक रणनीतिक विकास क्षेत्र के रूप में स्थापित करके यह रोडमैप भारत के सकल घरेलू उत्पाद, निर्यात तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है तथा ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को गति प्रदान कर सकता है।
  • रणनीतिक एवं प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: उन्नत उपचार, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, महत्त्वपूर्ण जैव-इनपुट तथा अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करके आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है तथा रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत किया जा सकता है।
  • स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना: परिशुद्ध चिकित्सा, जीनोमिक्स, जलवायु-सहिष्णु कृषि तथा जैव-आधारित इनपुट में निवेश से स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों में सुधार होगा तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि की सहनशीलता को बढ़ावा मिलेगा।
  • जैव-विनिर्माण एवं नवाचार को बढ़ावा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम जैव-प्रौद्योगिकी, सिंथेटिक जीवविज्ञान, जैव-विनिर्माण केंद्रों तथा परिशुद्ध किण्वन पर विशेष बल नवाचार को गति देगा तथा भारत को उन्नत जैव-विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनने में सहायता करेगा।
  • उच्च-मूल्य रोजगार सृजन: अनुसंधान, उद्यमिता, विनिर्माण तथा डिजिटल जीवविज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार से लाखों कुशल रोजगार सृजित होंगे तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जैव-प्रौद्योगिकी कार्यबल का विकास होगा।
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