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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) और पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2031-2035 के लिए भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दी, जो इसकी जलवायु महत्वाकांक्षा को और बढ़ाता है।

अन्य संबंधित जानकारी

• भारत ने 2035 के लिए उन्नत जलवायु लक्ष्यों की घोषणा की है, जो विकास प्राथमिकताओं को जलवायु उत्तरदायित्व और विकसित भारत @2047 तथा 2070 तक नेट-जीरो (शुद्ध-शून्य उत्सर्जन) के विज़न के साथ जोड़ते हैं।

• ये लक्ष्य पिछली प्रतिबद्धताओं (2015, जिसे 2021-22 में अद्यतन किया गया था) पर आधारित हैं, जिनमें से कई को समय से पहले ही हासिल कर लिया गया था, जो भारत के विश्वसनीय जलवायु ट्रैक रिकॉर्ड को प्रदर्शित करता है।

• भारत का दृष्टिकोण आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन को दर्शाता है, विशेष रूप से एक विकासशील देश के रूप में जिसका ऐतिहासिक उत्सर्जन अत्यंत कम (~3.5%) रहा है।

• इसके निर्माण की प्रक्रिया में नीति आयोग के नेतृत्व में व्यापक हितधारक परामर्श शामिल थे, जिसने ‘संपूर्ण-सरकार’ और ‘संपूर्ण-समाज’ के दृष्टिकोण को सुनिश्चित किया गया है।

2035 के लिए भारत के NDCs लक्ष्य

• उत्सर्जन तीव्रता में कमी: वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी का लक्ष्य रखा गया है।

  • भारत वर्ष 2020 तक ही इसमें 36% की कमी हासिल कर चुका था।

• गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का विस्तार: वर्ष 2035 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का 60% प्राप्त करना।

  • पिछला 2030 का लक्ष्य 50% था (जिसे समय से पहले ही प्राप्त कर लिया गया है)।
  • फरवरी तक, 52% से अधिक क्षमता गैर-जीवाश्म आधारित है।

• कार्बन सिंक में वृद्धि: वन और वृक्षों के आवरण के माध्यम से 2035 तक (2005 के स्तर से) 3.5-4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना।

  • पिछला 2030 का लक्ष्य 2.5-3 बिलियन टन था।
  • वर्ष 2021 तक, 2.3 बिलियन टन का लक्ष्य पहले ही हासिल किया जा चुका है।

• प्रगतिशील संवर्धन: नया एनडीसी (2031-2035) भारत के पहले एनडीसी (2015) में किए गए जलवायु प्रतिज्ञाओं को और सुदृढ़ करता है, जिन्हें 2021-2022 में संशोधित और अद्यतन किया गया था। यह भारत के निरंतर प्रगति करने के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण को दर्शाता है।

• अद्यतन एनडीसी (NDC) में पांच गुणात्मक लक्ष्य भी शामिल हैं, जो केंद्रित हैं:

  • जलवायु-अनुकूल विकास पथ
  • स्वच्छ और संधारणीय आर्थिक विकास 
  • जलवायु वित्त जुटाना 
  • प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षमता निर्माण
  • संधारणीय जीवन शैली (LiFE) का संवर्धन

NDC प्रतिबद्धताओं का तुलनात्मक विवरण

प्रतिबद्धता क्षेत्रपहला NDC (2015)अद्यतन
NDC
(2021–2022)
भारत की चौथी द्विवार्षिक अध्यतन रिपोर्ट (2025)अद्यतन
NDC
(2031-2035)
उत्सर्जन तीव्रता:2005 के स्तर की तुलना में जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 33-35% तक कम करना। वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम करना।वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में भारत की जीडीपी (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी आई है (2020 के आंकड़ों के अनुसार)।वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी का लक्ष्य। 
गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता:वर्ष 2030 तक स्थापित विद्युत शक्ति क्षमता का 40% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करना। वर्ष 2030 तक अपनी संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों (जैसे सौर, पवन, जल विद्युत, और परमाणु ऊर्जा) से प्राप्त करना।जून 2025 तक, भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधनों का योगदान 50% रहा।वर्ष 2035 तक अपनी संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों (जैसे सौर, पवन, जल विद्युत और परमाणु ऊर्जा) से प्राप्त करना।
कार्बन सिंक (वन):वनों और वृक्षावरण में वृद्धि के माध्यम से 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन GtCO₂e अतिरिक्त कार्बन सिंक का सृजन करना।  वर्ष 2005 और 2021 के बीच 2.29 बिलियन टन CO₂e (कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर) का अतिरिक्त कार्बन सिंक हासिल किया गया। वन और वृक्षों के आवरण में वृद्धि के माध्यम से 3.5-4 बिलियन टन CO2e (कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर) का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना। 
दीर्घकालिक लक्ष्य: 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन   

NDC को हासिल करने के लिए भारत की पहल

• स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास: भारत उत्सर्जन कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और हरित बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहा है।

  • यह बैटरी स्टोरेज सिस्टम, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और स्वच्छ विनिर्माण प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  • इस परिवर्तन को गति देने वाली प्रमुख योजनाओं में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना और पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त, कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) और परमाणु ऊर्जा के विस्तार जैसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

• जलवायु अनुकूलन और लचीलापन: भारत जलवायु संवेदनशीलता से निपटने के लिए शमन (mitigation) के साथ-साथ अनुकूलन पर भी जोर देता है।

  • पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए मैंग्रोव बहाली और तटीय सुरक्षा के उपाय शामिल हैं।
  • यह चरम मौसम की घटनाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत कर रहा है और हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की निगरानी बढ़ा रहा है।
  • विभिन्न राज्यों में हीट एक्शन प्लान और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे का विकास इस लचीलेपन को और अधिक समर्थन प्रदान करता है।

• संस्थागत ढांचा: भारत के जलवायु संबंधी कार्य एक स्थापित संस्थागत ढांचे द्वारा निर्देशित होते हैं।

  • इनका कार्यान्वयन जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) और राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजनाओं (SAPCC) के माध्यम से किया जाता है।
  • इन्हें जल जीवन मिशन, सतत कृषि पर राष्ट्रीय मिशन और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं द्वारा समर्थन प्राप्त है, जो विकास में जलवायु संबंधी विचारों को एकीकृत करती हैं।

• अंतरराष्ट्रीय जलवायु नेतृत्व: भारत वैश्विक जलवायु शासन और सहयोग में सक्रिय भूमिका निभाता है।

  • यह अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) जैसी पहलों के माध्यम से सहयोग करता है।
  • यह वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और उद्योग संक्रमण के लिए नेतृत्व समूह (LeadIT) जैसे मंचों का भी हिस्सा है, जो संधारणीय औद्योगिक परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं।

• जन-केंद्रित जलवायु कार्रवाई: भारत व्यवहार परिवर्तन को जलवायु कार्रवाई के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में महत्व देता है।

  • पर्यावरण के लिए जीवन शैली (LiFE) और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान जैसी पहल व्यक्तिगत भागीदारी को प्रोत्साहित करती हैं।
  • इन प्रयासों का उद्देश्य संधारणीय जीवन शैली और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देकर जलवायु कार्रवाई को एक जन आंदोलन में बदलना है।

Sources:
Down To Earth
PIB
Indian Express
PM India

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