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सामान्य अध्ययन-I (प्रारंभिक परीक्षा): राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएँ

सामान्य अध्ययन -3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: भारत के प्रधानमंत्री ने हाल ही में गुजरात के साणंद में भारत की पहली सेमीकंडक्टर असेंबली और पैकेजिंग इकाई का उद्घाटन किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह उद्घाटन भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसके साथ साणंद ATMP (असेम्बली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग) इकाई से पहले ‘मेड-इन-इंडिया’ सेमीकंडक्टर मेमोरी मॉड्यूल के व्यावसायिक उत्पादन और प्रेषण का शुभारंभ हुआ है।
  • उद्घाटित की गई यह सुविधा एक ATMP संयंत्र है, जो सेमीकंडक्टर उत्पादन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। यहाँ ‘फैब्रिकेटेड चिप्स’ को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग करने से पहले पैक और टेस्ट किया जाता है।
  • यह संयंत्र घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए DRAM और NAND मेमोरी उत्पादों, SSD स्टोरेज मॉड्यूल तथा अन्य उन्नत मेमोरी समाधानों की असेंबली, परीक्षण और पैकेजिंग करेगा।
  • अमेरिका स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजीद्वारा लगभग ₹22,516 करोड़ के निवेश के साथ, यह सुविधा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत-अमेरिका प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी के सुदृढ़ीकरण का प्रतीक है।

भारत के लिए महत्व

  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार, जिसका मूल्य 600 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है और 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, भारत को आयात निर्भरता कम करने और घरेलू भागीदारी के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा: वर्ष 2023-24 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 115 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। घरेलू चिप पैकेजिंग क्षमता का विस्तार स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और ‘कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स’ जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सहायता प्रदान करेगा।
  • रोजगार और कौशल विकास: सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक प्रौद्योगिकी-गहन क्षेत्र है, जो इंजीनियरिंग और उन्नत विनिर्माण में उच्च-कौशल वाले रोजगार उत्पन्न करता है। साथ ही, यह सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में विशेष प्रशिक्षण और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVC) में एकीकरण: ATMP संयंत्र की स्थापना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय नोड के रूप में स्थापित करती है, जो पूर्वी एशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के ‘फैब्रिकेशन हब’ का पूरक बनेगा।
  • उभरती प्रौद्योगिकियों हेतु समर्थन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), दूरसंचार, रक्षा प्रणालियों और डेटा केंद्रों के लिए सेमीकंडक्टर अनिवार्य हैं, जो घरेलू क्षमता को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन के बारे में

  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) को देश में एक व्यापक सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया था।
    • हाल ही में, केंद्रीय बजट 2026-27 में ISM 2.0 की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य चिप पैकेजिंग, ‘कंपाउंड सेमीकंडक्टर’, सेमीकंडक्टर डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देकर केवल ‘फैब्रिकेशन’ से आगे इस पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करना है।
  • यह मिशन 76,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत संचालित होता है।
  • इसका लक्ष्य सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों, असेंबली और पैकेजिंग सुविधाओं तथा डिजाइन क्षमताओं की स्थापना में सहायता करना है।
  • यह कार्यक्रम वैश्विक और घरेलू सेमीकंडक्टर फर्मों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचा सहायता और नीतिगत सुविधा प्रदान करता है।
  • ISM सेमीकंडक्टर डिजाइन स्टार्टअप्स के विकास को भी बढ़ावा देता है और शैक्षणिक तथा अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित करता है।

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास हेतु अन्य पहल

  • इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI): यह योजना इलेक्ट्रॉनिक घटकों और उपकरणों के घरेलू विनिर्माण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए मांग सृजित होती है।
  • डिजाइन लिंक्ड प्रोत्साहन (DLI) योजना: यह योजना चिप डिजाइन और प्रोटोटाइपिंग के लिए वित्तीय और बुनियादी ढांचागत सहायता प्रदान करके सेमीकंडक्टर डिजाइन स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करती है।
  • सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन परियोजनाएं: अखिल भारतीय सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए कई राज्यों में विभिन्न फैब्रिकेशन और पैकेजिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी भागीदारी: भारत प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला और महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ताइवान जैसे देशों के साथ सहयोग को सुदृढ़ कर रहा है।

SOURCES
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Indian Express
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