संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय; औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इसका प्रभाव।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में विनिर्माण, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए 100 ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्कों को विकसित करने हेतु ₹33,660 करोड़ की भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) को स्वीकृति प्रदान की।

BHAVYA योजना के बारे में

• BHAVYA एक प्रमुख औद्योगिक अवसंरचना योजना है, जिसका उद्देश्य भारत भर में विश्व स्तरीय और भविष्य के लिए तैयार विनिर्माण इकोसिस्टम बनाने हेतु 100 ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्क विकसित करना है।

• इस योजना को वर्ष 2026-27 से शुरू होने वाली छह साल की अवधि में कार्यान्वित किया जाएगा, जिसके पहले चरण में लगभग 50 पार्कों को विकसित किया जाना है।

• यह योजना राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के अंतर्गत औद्योगिक स्मार्ट शहरों की सफलता पर आधारित है और औद्योगिक गलियारा मॉडल के अगली पीढ़ी के विस्तार का प्रतिनिधित्व करती है।

• संस्थागत ढांचा:

  • नोडल मंत्रालय: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)
  • कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC)
  • राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के माध्यम से कार्यान्वयन।
  • योजना और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस शक्तियों के साथ विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का निर्माण अनिवार्य है।

• योजना की मुख्य विशेषताएँ:

  • यह योजना 100 से 1,000 एकड़ तक के औद्योगिक पार्कों के विकास का प्रावधान करती है, जिसमें न्यूनतम आकार 100 एकड़ निर्धारित है (पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए इसे शिथिल कर 25 एकड़ किया गया है)।
  • यह दायरे को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय बाधाओं के अनुरूप लचीलापन सुनिश्चित करती है।
  • उच्च गुणवत्ता वाली औद्योगिक अवसंरचना के निर्माण में सहायता के लिए ₹1 करोड़ प्रति एकड़ तक की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • यह योजना मुख्य अवसंरचना जैसे कि आंतरिक सड़कें, भूमिगत उपयोगिताएँ, जल निकासी प्रणाली, उपचार सुविधाएं और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) प्रणालियों के लिए सहायता प्रदान करती है।
  • इसमें फैक्ट्री शेड, परीक्षण प्रयोगशालाएँ और वेयरहाउसिंग (भंडारण) जैसी मूल्यवर्धित अवसंरचना के साथ-साथ श्रमिक आवास और सुविधाओं जैसी सामाजिक अवसंरचना भी सम्मिलित है।
  • बाहरी अवसंरचना के लिए परियोजना लागत का 25% तक प्रदान किया जाता है, जिससे राजमार्गों, रेलवे और बंदरगाहों के साथ निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है। यह लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाता है और परिवहन लागत को कम करता है।

• शासन और चयन तंत्र: परियोजनाओं का चयन चुनौती मोड के माध्यम से किया जाएगा, जिससे केवल उच्च गुणवत्ता वाले, सुधार-उन्मुख और निवेश के लिए तैयार प्रस्तावों का चयन सुनिश्चित हो सके। यह योजना व्यापार सुगमता और सुधारों पर राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करके प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देती है।

• ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और प्लग-एंड-प्ले मॉडल: यह योजना उद्योगों को पूर्व-अनुमोदित भूमि, तैयार बुनियादी ढांचा और एकीकृत सेवाएं प्रदान करती है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस और सुव्यवस्थित अनुमोदन उद्योगों को आशय से उत्पादन तक तेजी से बढ़ने में सक्षम बनाते हैं।

• भविष्य के लिए तैयार और संधारणीय डिजाइन: यह योजना पीएम गतिशक्ति के अनुरूप है ताकि मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह हरित ऊर्जा के उपयोग, कुशल संसाधन प्रबंधन और बिना खुदाई वाले वातावरण के लिए भूमिगत उपयोगिता गलियारों को बढ़ावा देती है।

• क्षेत्रीय दायरा और लाभार्थी: यह योजना क्षेत्र-निरपेक्ष है और उद्योगों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करती है। यह मुख्य रूप से एमएसएमई (MSMEs), स्टार्टअप्स, विनिर्माण इकाइयों और वैश्विक निवेशकों को लाभान्वित करती है, साथ ही श्रमिकों, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं, सेवा क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों को भी सहायता प्रदान करती है।

 योजना का महत्व

• विनिर्माण और विकास को प्रोत्साहन: BHAVYA योजना भारत की विनिर्माण क्षमता को गति प्रदान करती है और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप इसे एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में सशक्त बनाती है।

• बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन: इस योजना से लगभग 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है, साथ ही लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।

• निवेश आकर्षण: तैयार बुनियादी ढांचे के माध्यम से यह ‘प्रवेश बाधाओं’ को कम करती है, जिससे घरेलू और वैश्विक निवेश आकर्षित होता है और निवेशकों का विश्वास बढ़ता है।

• आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: BHAVYA ‘क्लस्टर-आधारित’ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है, जिससे उद्योगों का एक ही स्थान पर संकेंद्रण संभव होता है और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आती है।

• क्षेत्रीय औद्योगीकरण और समावेशिता: यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संतुलित औद्योगिक विकास सुनिश्चित करती है, जिसमें पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

• ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार: यह नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाती है और राज्य-स्तरीय सुधारों को प्रोत्साहित करती है, जिससे प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा मिलता है।

• अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स दक्षता: पीएम गतिशक्ति के साथ एकीकरण कनेक्टिविटी को बढ़ाता है, जिससे दक्षता, विश्वसनीयता और उत्पादकता में सुधार होता है।

• संधारणीय औद्योगिक विकास: यह योजना कुशल और निर्बाध औद्योगिक संचालन के लिए हरित ऊर्जा के उपयोग और संधारणीय पद्धतियों को बढ़ावा देती है।

SOURCES
Live Mint
The Hindu
PIB
Indian Express

Shares: