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सामान्य अध्ययन-2: संघ और राज्यों के कार्य एवं उत्तरदायित्व; संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ; स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा इससे संबंधित चुनौतियाँ।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM VGSY) को मंजूरी दी है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप ग्राम पंचायतों को सशक्त, डिजिटल रूप से सक्षम, जवाबदेह और आत्मनिर्भर संस्थाओं में परिवर्तित करना है।

प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के बारे में

• कार्यान्वयन अवधि: 2026–27 से 2030–31 तक, जो सोलहवें वित्त आयोग की अवधि के अनुरूप है।

• कुल परिव्यय: ₹7,395.55 करोड़, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹4,869.48 करोड़ और राज्य का हिस्सा ₹2,526.07 करोड़ है।

• कवरेज: सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें उन क्षेत्रों की पारंपरिक ग्रामीण स्थानीय शासन संस्थाएँ भी शामिल हैं जो भाग IX के अंतर्गत नहीं आते हैं और जहाँ पंचायतें नहीं हैं।

• प्रत्यक्ष लाभार्थी: 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों में लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी तथा अन्य हितधारक।

• मुख्य उद्देश्य: एकीकृत नियोजन, डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण, नागरिक भागीदारी और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से जमीनी स्तर पर शासन को सुदृढ़ करना।

योजना की प्रमुख विशेषताएँ

• यह योजना जमीनी स्तर पर परिवर्तन के छह स्तंभों पर केंद्रित है:

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

• ई-ग्रामस्वराज: वर्ष 2020 में शुरू किया गया यह एप्लिकेशन पंचायत नियोजन, बजट निर्माण, लेखांकन, निगरानी, परिसंपत्ति प्रबंधन और ऑनलाइन भुगतान में सहायता करता है। यह सरकारी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के साथ एकीकृत है।

• पंचम (PANCHAM): जनवरी 2026 में शुरू किया गया व्हाट्सऐप-आधारित प्लेटफ़ॉर्म, जो योजना संबंधी अद्यतन, प्रशिक्षण सामग्री, सर्वेक्षण और पंचायत सेवाओं से संबंधित जानकारी प्रदान करता है।

• ऑडिटऑनलाइन (AuditOnline): वर्ष 2020 में शुरू किया गया यह प्लेटफ़ॉर्म लागू राज्य ऑडिट कानूनों और नियमों के अनुसार पंचायती राज खातों की ऑनलाइन ऑडिट की सुविधा प्रदान करता है।

कार्यान्वयन तंत्र

• राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन, मूल्यांकन एवं अनुमोदन के लिए नामित केंद्रीय सशक्त समिति को वार्षिक कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत करेंगे। मौजूदा संस्थाएँ और डिजिटल प्रणालियाँ कार्यान्वयन में सहायता करेंगी।

• कोई स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा, हालाँकि आवश्यकता के आधार पर राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर संविदा कर्मियों को नियुक्त किया जा सकता है।

योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व

• जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सुदृढ़ करना: ग्राम पंचायतों को सहभागी विकास योजनाएँ तैयार करने और स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करने में सक्षम बनाना।

• निधियों का बेहतर उपयोग: सोलहवें वित्त आयोग द्वारा 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिए अनुशंसित ग्रामीण स्थानीय निकायों के लगभग ₹4.35 लाख करोड़ के अनुदान का उपयोग करने हेतु पंचायतों की क्षमता का निर्माण करना।

• बेहतर समन्वय: विकास संबंधी कमियों की पहचान करने और विभिन्न प्रयासों के बीच बिखराव को कम करने के लिए केंद्र एवं राज्य के विभागों के हस्तक्षेपों में समन्वय स्थापित करना।

• डिजिटल एवं नागरिक-केंद्रित शासन: सूचना तक पहुँच, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी में सुधार करना।

• पारदर्शिता एवं आत्मनिर्भरता: जवाबदेह वित्तीय प्रबंधन के लिए लेखापरीक्षा, सार्वजनिक जानकारी के प्रकटीकरण और स्वयं के राजस्व (OSR) के संग्रहण को सुदृढ़ करना।

• समावेशी ग्रामीण विकास: सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करने और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय पहलों एवं उपलब्ध संसाधनों को गाँवों की आकांक्षाओं से जोड़ना।

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