संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबधित विषय; समावेशी विकास और इससे संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 वर्ष पूर्ण हुए, जो वित्तीय समावेशन और जमीनी स्तर पर उद्यमिता के विस्तार के एक दशक का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के बारे में
- सूक्ष्म और लघु उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए PMMY को 8 अप्रैल, 2015 को लॉन्च किया गया था।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु व्यवसायों को संस्थागत ऋण प्रदान करके वित्तहीन को वित्त प्रदान करना (Fund the Unfunded) है।
- यह योजना विशेष रूप से वंचित वर्गों के बीच वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।
- मिशन: आर्थिक सफलता और वित्तीय सुरक्षा प्राप्त करने में अपने भागीदार संस्थानों के सहयोग से एक समावेशी, टिकाऊ और मूल्य-आधारित उद्यमशीलता संस्कृति का निर्माण करना।
- मुख्य विशेषताएँ:
- PMMY आय-सृजन गतिविधियों के लिए ₹20 लाख तक के बिना किसी गारंटी (संपार्श्विक-मुक्त) वाले ऋण प्रदान करता है।
- ऋण श्रेणियों का वर्गीकरण: व्यवसाय के विकास के चरणों के आधार पर ऋणों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- शिशु (Shishu): ₹50,000 तक — प्रारंभिक चरण के व्यवसायों के लिए।
- किशोर (Kishor): ₹50,000 से ₹5 लाख तक — विकासशील उद्यमों के लिए।
- तरुण (Tarun): ₹5 लाख से ₹10 लाख तक — विस्तार चरण के लिए।
- तरुण प्लस (Tarun Plus): ₹10 लाख से ₹20 लाख तक — उन्नत विकास चरण के लिए।
- पात्रता: ये ऋण गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को दिए जाते हैं, जिन्हें ‘मुद्रा ऋण’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- ब्याज दरें और पुनर्भुगतान: ऋण की ब्याज दरें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों द्वारा विनियमित होती हैं, जिनमें पुनर्भुगतान के लचीले विकल्प उपलब्ध हैं।
- ऋण प्रदाता संस्थान: ये ऋण वाणिज्यिक बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFIs) के माध्यम से प्रदान किए जाते हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) का महत्त्व एवं उपलब्धियाँ
- वित्तीय समावेशन का सुदृढ़ीकरण: अब तक 57.79 करोड़ ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं और ₹40.07 लाख करोड़ की राशि वितरित की गई है। PMMY ने लाखों लोगों के लिए संस्थागत ऋण तक पहुँच को औपचारिक बनाया है और अनौपचारिक ऋण प्रणालियों (साहूकारों आदि) पर निर्भरता को कम किया है।
- प्रथम-पीढ़ी के उद्यमियों को प्रोत्साहन: लगभग 12.15 करोड़ नए ऋणधारकों को ₹12 लाख करोड़ का ऋण प्राप्त हुआ है। यह डेटा भारत के उद्यमशीलता आधार के विस्तार में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
- रोजगार और सूक्ष्म-अर्थव्यवस्था का विस्तार: कुल खातों में ‘शिशु’ ऋणों की हिस्सेदारी 74% है। यह सूक्ष्म उद्यमों के प्रति मजबूत समर्थन को इंगित करता है, जिससे स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है।
- महिला-नेतृत्व और सामाजिक समावेशी विकास: PMMY के तहत 67% लाभार्थी महिलाएँ हैं और 51% लाभार्थी SC/ST/OBC श्रेणियों से संबंधित हैं। इसने लैंगिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को नई शक्ति प्रदान की है।
- MSME का विस्तार और ऋण की राशि: वार्षिक ऋण स्वीकृति की राशि वर्ष 2015-16 में ₹1.37 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹5.65 लाख करोड़ हो गई है। ‘किशोर’ और ‘तरुण’ ऋणों के बढ़ते अनुपात से पता चलता है कि अब उद्यमी केवल जीविकोपार्जन के स्तर से ऊपर उठकर विकास-उन्मुख वित्तपोषण की ओर बढ़ रहे हैं। यह विकास ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में सहायक है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की चुनौतियाँ और कमियाँ
- बढ़ती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPAs) और ऋण जोखिम: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) के लिए PMMY के तहत NPA दर मार्च 2018 के 5.47% से बढ़कर मार्च 2025 में 9.81% हो गई है। यह योजना के तहत ऋण पुनर्भुगतान में बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
- हालाँकि, कुल वितरित ऋणों के सापेक्ष NPA दर मार्च 2025 में 2.19% पर बनी हुई है, जो यह संकेत देती है कि समग्र जोखिम अभी भी प्रबंधनीय है, लेकिन इसमें वृद्धि जारी है।
- संपार्श्विक-मुक्त ऋण की प्रकृति: चूँकि मुद्रा ऋण बिना किसी संपार्श्विक के दिए जाते हैं और इनका लक्ष्य नए और छोटे उद्यमी होते हैं, इसलिए पारंपरिक ऋणों की तुलना में इनमें स्वाभाविक रूप से उच्च ऋण जोखिम होता है। विशेष रूप से उन उधारकर्ताओं के लिए जिनके पास कोई पूर्व क्रेडिट इतिहास नहीं है, जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
- वित्तीय असाक्षरता और कमजोर ऋण अनुशासन: राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (NCFE) के अनुसार, केवल 27% भारतीय वयस्क ही बुनियादी वित्तीय साक्षरता मानकों को पूरा करते हैं। इसके परिणामस्वरूप ऋण राशि का अनुचित उपयोग, कमजोर व्यावसायिक योजना और निम्न पुनर्भुगतान व्यवहार जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- धन का विचलन और दुरुपयोग: कई मामलों में ऋण की राशि का उपयोग उत्पादक व्यावसायिक कार्यों के बजाय व्यक्तिगत उपभोग के लिए किया जाता है। इससे पुनर्भुगतान में चूक होती है और बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- MSME वित्तपोषण में संरचनात्मक मुद्दे: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अभी भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जैसे: संपार्श्विक का अभाव, परामर्श सेवाओं तक सीमित पहुँच, ऋण लेने की उच्च लागत, अपर्याप्त वित्तीय जानकारी। ये कारक सामूहिक रूप से उनकी ऋण चुकाने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
आगे की राह
- ग्रेजुएशन-आधारित क्रेडिट स्केलिंग: ‘तरुण प्लस’ की शुरुआत के साथ, PMMY को एक “ग्रेजुएशन पाथवे” को संस्थागत बनाना चाहिए। इसके तहत सफल ऋणधारकों को उच्च क्रेडिट ब्रैकेट और औपचारिक MSME वित्तपोषण में स्थानांतरित किया जाए, जिससे ऋण की ऊपरी सीमा बाधा न बने और उद्यमों का विस्तार सुगम हो सके।
- AI और फिनटेक-संचालित क्रेडिट अंडरराइटिंग: बैंकों और NBFCs को GSTN और UPI डेटा का उपयोग करते हुए AI-आधारित भविष्योन्मुखी विश्लेषण का लाभ उठाना चाहिए। साथ ही, LOKOS और डिजिटल आजीविका रजिस्टर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वास्तविक समय में आय की ट्रैकिंग और बेहतर क्रेडिट मूल्यांकन किया जा सकता है, जिससे NPA को कम करने में मदद मिलेगी।
- SHG और महिला-केंद्रित पहलों के साथ अभिसरण: PMMY को ‘लखपति दीदी योजना’ और स्वयं सहायता समूह (SHG) पारिस्थितिकी तंत्र के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। इससे ऋण अवशोषण की क्षमता बढ़ेगी और SHE-Marts जैसे बाजार संपर्कों के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाया जा सकेगा।
- गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का समावेश: EASE 8.0 जैसे बैंकिंग सुधारों के तहत PMMY के दायरे का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे डिलीवरी पार्टनर, फ्रीलांसर आदि) को भी शामिल किया जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म को वैध कार्यस्थल के रूप में मान्यता देकर शहरी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाया जा सकता है और वित्तीय समावेशन को और गहरा किया जा सकता है।
Source:
Pib
Mudra
Business
Researchgate
