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सामान्य अध्ययन-2: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व; संघीय ढांचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियां; विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियां, कार्य और उत्तरदायित्व।

संदर्भ: हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों के बीच पेन्नैयार नदी जल बँटवारे को लेकर चल रहे विवादों के समाधान हेतु एक महीने के भीतर न्यायाधिकरण का गठन करने का निर्देश दिया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

• तमिलनाडु ने 2018 में संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत एक मूल वाद दायर किया था, जिसमें राज्यों और संघ के बीच विवादों में उच्चतम न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार का आह्वान किया गया था।

• यह विवाद कर्नाटक द्वारा पेन्नैयार और उसकी सहायक मार्कण्‍डेय  नदी पर बनाए गए बांधों और जल मोड़ने वाली संरचनाओं से संबंधित है।

• तमिलनाडु ने तर्क दिया कि चूँकि अंतर-राज्यीय नदी के जल का प्रवाह एक राष्ट्रीय संपत्ति है और कोई भी एकल राज्य इसके जल पर विशेष स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता है, अतः कर्नाटक की परियोजनाएं निचले प्रवाह में जल की उपलब्धता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं और मौजूदा समझौतों का उल्लंघन करती हैं।

  • पेन्नैयार नदी बेसिन में कर्नाटक ऊपरी तटवर्ती राज्य है, जबकि तमिलनाडु निचला तटवर्ती राज्य है।

बातचीत और मध्यस्थता के प्रयास

  • केंद्र सरकार ने प्रारंभ में राज्यों के बीच बातचीत के माध्यम से विवाद को सुलझाने की संभावना की तलाश की थी।
  • जनवरी 2024 में, उच्चतम न्यायालय ने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत एक वार्ता समिति के गठन का निर्देश दिया।
  • न्यायालय ने उल्लेख किया कि इस अधिनियम के तहत एक वर्ष के भीतर बातचीत विफल होने के बाद ही न्यायाधिकरण के गठन की अनुमति दी जाती है।
  • नवंबर 2024 में, न्यायालय को सूचित किया गया कि राज्यों के बीच मध्यस्थता विफल रही है, जिसके कारण न्यायाधिकरण तंत्र का सहारा लेना आवश्यक हो गया है।

नदी जल विवाद न्यायाधिकरण के बारे में

  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (ISWD) अधिनियम, 1956, संसद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 262 के तहत अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल को लेकर राज्यों के बीच विवादों के समाधान हेतु बनाया गया प्राथमिक कानून है।
  • इस अधिनियम के तहत, केंद्र सरकार ने राज्यों के बीच विशिष्ट विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई तदर्थ अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद न्यायाधिकरण गठित किए हैं।
  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय अंतिम होते हैं और संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं।
  • संविधान के अनुच्छेद 262(2) एवं अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (ISWD) अधिनियम, 1956 की धारा 11 के प्रावधानों के अंतर्गत, किसी न्यायाधिकरण को प्रेषित जल विवादों के संबंध में उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार स्पष्टतः वर्जित है।
  • हालांकि एक स्थायी न्यायाधिकरण का प्रस्ताव ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक, 2019’ की एक मुख्य विशेषता थी, लेकिन 2024 में 17वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक आधिकारिक तौर पर व्यपगत हो गया।
  • वर्तमान ढांचा: चूंकि संशोधन कानून नहीं बना, इसलिए अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 अभी भी प्रभावी है। इसका अर्थ है कि सरकार को अभी भी एक स्थायी निकाय के बजाय प्रत्येक विशिष्ट विवाद के लिए तदर्थ (अस्थायी) न्यायाधिकरणों का गठन करना होगा।

पेन्नैयार नदी के बारे में

  • पेन्नैयार नदी को दक्षिण पेन्नार, पोन्नैयार या दक्षिणा पिनाकिनी के नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्व की ओर बहने वाली 576 किमी लंबी एक प्रायद्वीपीय नदी है। यह कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों से होकर प्रवाहित होती है।
  • यह पेन्नार और कावेरी बेसिनों के मध्य स्थित, पूर्व की ओर प्रवाहित होने वाली दूसरी सबसे बड़ी अंतर-राज्यीय नदी घाटी है।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ मार्कण्‍डेय , पम्बई और चिन्नार हैं। 
  • उद्गम: इसका उद्गम कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में नंदी पहाड़ियों में लगभग 900 मीटर की ऊँचाई से होता है।
  • प्रवाह मार्ग: अपने स्रोत से, यह कर्नाटक में लगभग 80 किमी. तक दक्षिण की ओर बहती है और होसुर के पास तमिलनाडु में प्रवेश करती है। इसके बाद यह दक्षिण-पूर्व दिशा में 320–420 किमी. की यात्रा करती है और अंततः कुड्डालोर के पास बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
  • बेसिन वितरण: इसका कुल अपवाह क्षेत्र लगभग 16,019 वर्ग किमी. है। इस बेसिन का लगभग 77% हिस्सा तमिलनाडु में है, शेष कर्नाटक (~22%) में और एक बहुत छोटा हिस्सा आंध्र प्रदेश में है।

Source:
The Hindu
New indian express
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