संदर्भ:
परियोजना दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP) के कारण रणथंभौर टाइगर रिजर्व का 37 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा, जिससे यह प्रभावी रूप से दो भागों में विभाजित हो जाएगा।
परियोजना के बारे में
- PKC-ERCP नदी जोड़ों कार्यक्रम (ILR) के अंतर्गत एक अंतर-राज्यीय सिंचाई पहल है।
- इसका उद्देश्य राजस्थान के 23 जिलों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए चंबल नदी बेसिन से अधिशेष जल को प्रवाहित करना है, जिससे लगभग 3.45 करोड़ लोग (मालवा और चंबल दोनों क्षेत्रों के) लाभान्वित होंगे।
- प्रस्तावित बांध सवाई माधोपुर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर डूंगरी गांव के पास, चंबल की सहायक बनास नदी पर स्थित होगा।
परियोजना के प्रथम चरण का विवरण :
- पहले चरण में डूंगरी बांध और कुल, पार्वती, कालीसिंध, मेज और बनास जैसी विभिन्न नदियों पर पांच बैराजों का निर्माण शामिल है।
- इसमें जल संवाहक प्रणाली और इसरदा बांध का नवीनीकरण भी शामिल है।
- पहले चरण के पूरा होने की समय सीमा 2028 है।
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परियोजना से संबंधित चिंताएँ
- PKC-ERCP के तहत सबसे बड़े बांध के निर्माण से रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान और केलादेवी वन्यजीव अभयारण्य का 37 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा, जो दोनों रणथंभौर टाइगर रिजर्व का हिस्सा हैं।
- रिजर्व का 37.03 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलमग्न होने से उत्तर-दक्षिण पशु प्रसार मार्ग बाधित हो जाएगा, जिससे बाघ रिजर्व दो भागों में विभाजित हो जाएगा।
- संरक्षणवादियों ने आवास कनेक्टिविटी और रिजर्व की वहन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभावों के बारे में चिंता जताई है।
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• संयोगवश, रणथम्भौर तीसरा बाघ अभयारण्य है, जो आगामी जलाशयों के कारण भूमि के नुकसान का सामना कर रहा है।
- झारखंड में पलामू टाइगर रिजर्व का 10.07 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना से जलमग्न हो जाएगा।
- केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के पन्ना बाघ अभयारण्य का 41.41 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलमग्न होने की आशंका है।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बारे में
- 1973 में इसे भारत के प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्वों में से एक घोषित किया गया।
- रणथंभौर टाइगर रिजर्व कुल 1,113 वर्ग किमी (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) में फैला है और वर्तमान में 57 बाघ (अखिल भारतीय बाघ अनुमान, 2018 में 53) है।
- इसमें रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान, सवाईमाधोपुर अभयारण्य, सवाईमान सिंह अभयारण्य, केलादेवी अभयारण्य और राष्ट्रीय घड़ियाल अभयारण्य का एक हिस्सा तथा अन्य वन क्षेत्र शामिल हैं।
- अरावली और विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं के संगम पर स्थित यह अभ्यारण्य उत्तर में बनास नदी और दक्षिण में चम्बल नदी से घिरा है।
- यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (2013) रणथंभौर किला इसके भीतर स्थित है।