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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरणीय प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।
संदर्भ: हाल ही में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत नए नियमों को अधिसूचित किया और इनमें ‘पर्यावरण (संरक्षण) कोष’ के उपयोग की प्रक्रियाओं का विवरण दिया गया है।
पर्यावरण (संरक्षण) कोष नियम, 2026
- ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) कोष को 11 निर्दिष्ट गतिविधियों के लिए उपयोग करने की अनुमति देते हैं, जिनमें पर्यावरणीय निगरानी उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव आदि शामिल हैं।
- निवारण, नियंत्रण और शमन: वायु, जल और मृदा प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और शमन के उद्देश्य से की जाने वाली गतिविधियाँ।
- उपचार और बहाली: दूषित स्थलों पर सुधारात्मक कार्रवाई और क्षरित पर्यावरणीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली।
- निगरानी उपकरण: परिवेशी वायु, जल की गुणवत्ता और ध्वनि के नेटवर्क जैसे पर्यावरणीय निगरानी उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव।
- प्रयोगशाला अवसंरचना: परीक्षण और अनुपालन के लिए पर्यावरणीय प्रयोगशालाओं का विकास, आधुनिकीकरण और उन्नयन।
- क्षमता निर्माण: CPCB, SPCBs और शहरी स्थानीय निकायों सहित नियामक संस्थाओं की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना।
- अनुसंधान और नवाचार: स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, संधारणीय प्रथाओं और वैज्ञानिक मूल्यांकनों पर अनुसंधान और विकास को प्रायोजित करना।
- IT प्रणालियाँ: पर्यावरणीय निगरानी और अनुपालन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणालियों और संबंधित उपकरणों का निर्माण।
- कानूनी अधिदेश: न्यायालयों या न्यायाधिकरणों द्वारा विशेष रूप से जारी किए गए आदेशों के अनुरूप पर्यावरण का अध्ययन या निर्देशों का पालन।
- जागरूकता कार्यक्रम: इको-क्लबों के माध्यम से संचालित कार्यक्रमों सहित पर्यावरणीय जागरूकता सृजन कार्यक्रमों का वित्तपोषण।
- प्रदर्शन परियोजनाएं: नवीन स्वच्छ पर्यावरणीय प्रौद्योगिकियों के परिनियोजन और उनका परीक्षण करने वाली प्रदर्शन परियोजनाओं में सहयता करना।
- प्रशासनिक व्यय: कोष के प्रबंधन से संबंधित प्रशासनिक लागतों के लिए वित्तपोषण, जैसे कि परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) का वेतन, जो कोष की अंतिम शेष राशि का अधिकतम 5% तक हो सकती है।
- इन नियमों में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को “सक्षम प्राधिकारी” के रूप में नामित किया गया है, जिन्हें पर्यावरण संरक्षण और सुधार के लिए आवश्यक समझे जाने वाले किसी भी अन्य उद्देश्य हेतु कोष का उपयोग करने के लिए स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित और संचालित करेगा, जो चालू होने के बाद इन नियमों को लागू करने में शामिल सभी अधिकारियों और हितधारकों के लिए एकमात्र इंटरफेस के रूप में कार्य करेगा।
- सभी भुगतान पोर्टल के माध्यम से जमा किए जाएंगे, और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वार्षिक रूप से प्राप्त कुल धनराशि, उपयोग की गई राशि और शेष राशि का विवरण देना भी अनिवार्य होगा।
पर्यावरण संरक्षण कोष के बारे में
- जन विश्वास अधिनियम, 2023 के तहत बनाया गया पर्यावरण संरक्षण कोष, वायु अधिनियम 1981, जल अधिनियम 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत उल्लंघन के लिए जुर्माने (₹10,000 से ₹15 लाख) की राशि को एकत्र करता है।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एक छत्र अधिनियम है और पर्यावरण के संरक्षण एवं सुधार तथा मनुष्यों, अन्य जीवित प्राणियों, पौधों और संपत्ति को होने वाले नुकसान को कम करने का प्रावधान करता है।
- इस अधिनियम के अनुसार, केंद्र सरकार के पास पर्यावरण संरक्षण मानक निर्धारित करने का अधिकार है जो वैधानिक हैं और पूरे देश में लागू होते हैं।
- कोष का व्यय
- अधिसूचना न केवल कोष की स्थापना का प्रावधान करती है बल्कि धन के अनुमेय उपयोगों को भी स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करती है।
- अनुमत व्यय गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करते हैं, जिनमें से अधिकांश निगरानी, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्रशासन से संबंधित हैं।
- हालिया अधिसूचना में कहा गया है कि पर्यावरण कोष से जुर्माने की 75% राशि राज्य की संचित निधि में जाएगी, जबकि 25% राशि केंद्र द्वारा हरित पहल के लिए रखी जाएगी।
- कोष के खातों का ऑडिट भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किया जाएगा, और ऑडिट रिपोर्ट संसद तथा राज्य विधानसभाओं के पटल पर रखी जाएगी।
नियमों का महत्व
- जुर्माने का वैधानिक सुदृढ़ीकरण: ये नियम कानूनी रूप से सभी पर्यावरणीय जुर्मानों को एक एकल ‘पर्यावरण संरक्षण कोष’ में केंद्रीकृत करते हैं।
- राजस्व के स्रोत के रूप में प्रदूषण: कोष की जुर्माने पर निर्भरता, नियामक वित्तपोषण को निरंतर पर्यावरणीय उल्लंघनों से जोड़ती है।
- पारिस्थितिक फोकस पर प्रशासनिक प्राथमिकता: कोष का उपयोग सुनिश्चित पर्यावरणीय बहाली के बजाय नियामक प्रणालियों को प्राथमिकता देता है।
- कमजोर होता ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत‘ : जुर्माने की राशि को एकत्रित करना पर्यावरणीय क्षति और उपचार के बीच प्रत्यक्ष संबंध को प्रभावित करता है।
